Ratlam contaminated water: मध्यप्रदेश के इंदौर में हुए कुख्यात भागीरथपुरा कांड जैसी ही एक गंभीर लापरवाही अब रतलाम जिले से सामने आई है।
रतलाम की पिपलोदा तहसील के आजमपुर डोडिया गांव में कुएं का दूषित पानी पीने की वजह से अचानक एक-दो नहीं, बल्कि 80 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए।
करीब 800 की आबादी वाले इस छोटे से गांव में पिछले तीन-चार दिनों से उल्टी, दस्त और पेट दर्द का कहर बरप रहा था।
देखते ही देखते मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई कि पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
कैसे फैली गांव में बीमारी?
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस बीमारी की मुख्य वजह गांव का एक पुराना कुआं है।
गांव के सरपंच समर्थ मल खरोल ने एक बेहद चौंकाने वाली बात बताई।
उन्होंने कहा कि गांव में सरकारी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई होती है, लेकिन ग्रामीणों को उस पानी का स्वाद ‘फीका’ लगता था।
वहीं, कुएं का पानी पीने में ‘मीठा’ था। इसी मीठे स्वाद के चक्कर में गांव के ज्यादातर लोग कुएं का पानी ही पीना पसंद करते थे।
हैरानी की बात यह है कि कुछ दिन पहले ही मोटर लगाकर इस कुएं की सफाई भी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद पानी में संक्रमण फैल गया।
इसी दूषित पानी को पीने से लोग धीरे-धीरे इन्फेक्शन का शिकार होते गए और पूरा गांव महामारी की चपेट में आ गया।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का एक्शन
शुक्रवार को जब इस सामूहिक बीमारी की खबर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची, तो हड़कंप मच गया।
खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) पवन पाटीदार ने बिना वक्त गंवाए तुरंत गांव में एम्बुलेंस और डॉक्टरों की टीम रवाना की।
जिन मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर थी, उनमें से 21 ग्रामीणों को आनन-फानन में पिपलोदा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों की मुस्तैदी के चलते सभी मरीजों का समय पर इलाज हुआ और हालत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
फिलहाल सभी की हालत ठीक बताई जा रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) किरण वाडिया के निर्देश पर महामारी विशेषज्ञ गौरव बोरिवाल की लीडरशिप में एक विशेष मेडिकल टीम ने आजमपुर डोडिया गांव में डेरा डाल दिया है।
टीम ने गांव में ही एक मेडिकल कैंप लगाया, जहां 80 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें जरूरी दवाइयां बांटी गईं।
इसके साथ ही, स्वास्थ्यकर्मियों ने घर-घर जाकर सर्वे भी किया, ताकि अगर कोई और भी बीमार हो, तो उसे वक्त रहते इलाज दिया जा सके।
जांच में ग्रामीणों का इनकार और प्रशासनिक मुस्तैदी
बीमारी की सटीक वजह जानने के लिए जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के लिए मरीजों के मल (Stool Samples) के नमूने मांगे, तो ग्रामीणों ने संकोच के चलते सैंपल देने से साफ मना कर दिया।
इसके बाद मेडिकल टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए मरीजों के खून (Blood Samples) के नमूने लिए।
इन सैंपलों को लैब में जांच के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण के असली बैक्टीरिया का पता चल पाएगा।
सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने उस दूषित कुएं को पूरी तरह से सील कर दिया है, ताकि कोई दोबारा उसका पानी न पी सके।
अब गांव में पीने के साफ पानी की किल्लत न हो, इसके लिए टैंकरों के जरिए शुद्ध पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है।
प्रशासन अब ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटा है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
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