HomeTrending Newsपुतिन ने फोड़ा 'डिजिटल परमाणु बम': 10 करोड़ यूजर्स पर पड़ेगा असर,...

पुतिन ने फोड़ा ‘डिजिटल परमाणु बम’: 10 करोड़ यूजर्स पर पड़ेगा असर, रूस में सरकारी App की एंट्री

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Russia WhatsApp Ban: रूस और पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रह गई है।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब ‘डिजिटल मोर्चे’ पर एक बड़ा हमला बोला है।

रूस सरकार ने देश में दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp, फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म Instagram और वीडियो स्ट्रीमिंग साइट YouTube समेत कई विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह से ब्लॉक करने का फैसला किया है।

इस कदम को रूस का ‘डिजिटल परमाणु बम’ कहा जा रहा है, क्योंकि इससे एक झटके में करीब 10 करोड़ यूजर्स प्रभावित हुए हैं।

रूस का इरादा साफ है विदेशी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता खत्म करना और अपनी ‘डिजिटल संप्रभुता’ (Digital Sovereignty) को मजबूत करना।

क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

सरकार का तर्क है कि विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स रूसी नागरिकों की प्राइवेसी और पर्सनल डेटा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

सरकार के मुताबिक, अमेरिकी कंपनियां जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं करतीं और डेटा लीक होने का खतरा बना रहता है, जिसका इस्तेमाल रूस के खिलाफ दुष्प्रचार या जासूसी के लिए किया जा सकता है।

रूसी संचार विभाग ने WhatsApp को अपनी आधिकारिक डायरेक्टरी से हटा दिया है।

सरकार का कहना है कि ये कंपनियां रूसी कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं।

राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने स्पष्ट किया कि रूस की किसी ऐप से निजी दुश्मनी नहीं है, लेकिन अगर वे रूस की शर्तों और कानूनों को नहीं मानेंगे, तो उन्हें देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

‘देसी’ सोशल मीडिया: MAX ऐप की एंट्री

इस बैन के साथ ही पुतिन सरकार ने एक बड़ा वैकल्पिक प्लान भी पेश किया है।

रूस ने अपनी खुद की सोशल नेटवर्किंग साइट्स और मैसेजिंग ऐप्स का ट्रायल पूरा कर लिया है।

खबर है कि रूस जल्द ही ‘MAX’ नाम का एक सरकारी ऐप प्रमोट करने जा रहा है।

रूस का दावा है कि ये स्थानीय ऐप अधिक सुरक्षित हैं और स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं।

वहीं, WhatsApp के प्रवक्ताओं का आरोप है कि रूस जानबूझकर उन्हें ब्लॉक कर रहा है ताकि लोगों को जबरन सरकारी ऐप्स पर शिफ्ट किया जा सके।

WhatsApp ने इन सरकारी ऐप्स को ‘निगरानी ऐप’ (Surveillance App) करार दिया है, जिससे सरकार लोगों की हर गतिविधि पर नजर रख सकेगी।

सिर्फ WhatsApp नहीं, लंबी है लिस्ट

रूस की यह डिजिटल स्ट्राइक केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है।

सरकार ने Apple के FaceTime, Snapchat, YouTube और Telegram पर भी सख्ती शुरू कर दी है।

हैरानी की बात यह है कि Telegram, जिसे अक्सर रूस के करीब माना जाता था, उसे भी धोखाधड़ी और संदिग्ध गतिविधियों का हवाला देते हुए प्रतिबंधित किया जा रहा है।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान जैसे BBC, Deutsche Welle और Radio Free Europe को भी ब्लॉक कर दिया गया है।

‘सॉवरेन इंटरनेट’ कानून- तकनीकी घेराबंदी

रूस ने अपने इंटरनेट को पूरी दुनिया से अलग करने के लिए ‘नेशनल डोमेन नेम सिस्टम’ (DNS) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है।

2021 में ही गूगल और अन्य विदेशी DNS पर रोक लगा दी गई थी।

अब इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को आदेश दिया गया है कि वे विदेशी डोमेन को पूरी तरह से ब्लॉक कर दें।

यह सब रूस के ‘सॉवरेन इंटरनेट’ कानून के तहत हो रहा है, जिसका मकसद जरूरत पड़ने पर रूस के इंटरनेट को ग्लोबल वेब से पूरी तरह काटकर सुरक्षित करना है।

अमेरिका की बढ़ती टेंशन

रूस के इस कदम ने अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है।

मेटा (WhatsApp और Instagram की पैरेंट कंपनी) और गूगल जैसी कंपनियों के लिए रूस एक बड़ा बाजार रहा है।

10 करोड़ यूजर्स का हाथ से निकलना इन कंपनियों के लिए बड़ा वित्तीय झटका है।

साथ ही, अमेरिका को डर है कि रूस का यह ‘डिजिटल अलगाव’ अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जिससे इंटरनेट की वैश्विक पहुंच कम हो सकती है।

दुनियाभर में बढ़ रही है सोशल मीडिया पर सख्ती

दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया पर सख्ती केवल रूस में ही नहीं दिख रही।

ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, डेनमार्क और स्पेन जैसे देशों ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्त कानून बनाए हैं।

भारत में भी लंबे समय से बच्चों की मानसिक सेहत और डेटा सुरक्षा को लेकर विदेशी ऐप्स पर नकेल कसने की मांग उठती रही है।

पुतिन ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं के भीतर डिजिटल दुनिया का कंट्रोल अपने हाथ में रखना चाहते हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या विदेशी कंपनियां झुककर रूस की शर्तें मानती हैं या फिर रूसी नागरिक पूरी तरह से स्वदेशी ऐप्स की दुनिया में सिमट कर रह जाते हैं।

- Advertisement -spot_img