Sanskrit Pakistan University: बंटवारे के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच सियासी और सामाजिक दूरियां रही हैं, लेकिन अब एक ऐसी पहल सामने आई है जो संस्कृति की डोर को फिर से मजबूत कर सकती है।
दरअसल, पाकिस्तान में पहली बार किसी विश्वविद्यालय ने औपचारिक रूप से संस्कृत भाषा के पाठ्यक्रम की शुरुआत की है।
लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) के कक्षा-कक्ष अब महाभारत और भगवद् गीता के संस्कृत श्लोकों की गूंज से गुलजार हो रहे हैं।
यह कदम न केवल शैक्षणिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
Sanskrit is back in Pakistan! A new course at LUMS sparks cultural curiosity and hope for regional harmony.#SanskritInPakistan #NewBeginnings #KnowledgeTraditions pic.twitter.com/sojtCbZhnH
— Samskrita Bharati (@samskritbharati) December 12, 2025
एक प्रोफेसर की दृढ़ इच्छा से हुई शुरुआत
इस पहल के केंद्र में हैं फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद रशीद।
उन्होंने वर्षों तक स्वयं संस्कृत का अध्ययन किया और अब LUMS में छात्रों को यह ज्ञान बांट रहे हैं।
प्रोफेसर रशीद का दृढ़ मत है कि संस्कृत सिर्फ एक भाषा या किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे उपमहाद्वीप की साझी सांस्कृतिक धरोहर और एक जीवंत स्मारक है।
वे कहते हैं, “हमें संस्कृत क्यों नहीं पढ़नी चाहिए? पाणिनि जैसे महान भाषाविद् का गांव इसी क्षेत्र (लाहौर के आसपास) में था। सिंधु घाटी सभ्यता के समय की बहुत सारी रचनाएं यहीं हुईं। यह हमारी भी विरासत है।“
Pakistan’s LUMS University has started a Sanskrit course and now plans to teach Hindu epics like the Ramayana and Mahabharat. The irony is clear: a country once opposed to India’s scriptures is now teaching them to its own youth. #Pakistan #Ramayan #Mahabharat #Sanskrit pic.twitter.com/uAhwCjq25i
— Lok Pahal (@lokpahal) December 12, 2025
‘है कथा संग्राम की…’ से जुड़ रहे हैं छात्र
इस कोर्स की खास बात यह है कि इसे रुचिकर बनाने के लिए शिक्षण विधियों में नवाचार किया गया है।
छात्रों को न सिर्फ संस्कृत के मूल सिद्धांत सिखाए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें भारतीय टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ के प्रसिद्ध टाइटल सॉन्ग ‘है कथा संग्राम की…’ का उर्दू रूपांतरण भी सिखाया जा रहा है।
इससे छात्र सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संदर्भों को आसानी से समझ पा रहे हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी के दुर्लभ दस्तावेज मिलेंगे छात्रों को
लाहौर यूनिवर्सिटी के गुरमानी सेंटर के निदेशक डॉ. अली उस्मान कासमी के मुताबिक, पंजाब यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में संस्कृत के कई दुर्लभ दस्तावेज संरक्षित हैं, लेकिन 1947 के बाद उन पर ध्यान नहीं दिया गया।
अब इन दस्तावेजों को शोध और अध्ययन के लिए LUMS में लाने की योजना है, ताकि छात्र स्थानीय विद्वानों से सीधे ज्ञान प्राप्त कर सकें।
LUMS University view…✌️❤️ pic.twitter.com/pkI1U87PDD
— Dr Javeria ❤️ (@DrJaweriaS) June 22, 2025
एक साल का कोर्स और अलग से महाभारत-गीता का अध्ययन
यह पहल अभी शुरुआती चरण में है।
शुरू में इसे सप्ताहांत कार्यक्रम के तौर पर पेश किया गया था, जिसमें छात्रों, शोधकर्ताओं, वकीलों और शिक्षाविदों ने बढ़-चढ़कर रुचि दिखाई।
इसी उत्साह के मद्देनजर अब इसे पूर्ण शैक्षणिक कोर्स का रूप दिया गया है।
योजना है कि 2027 तक संस्कृत को एक वर्षीय पूर्ण कोर्स के रूप में शुरू किया जाएगा।
साथ ही, महाभारत और भगवद् गीता पर अलग से विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की भी तैयारी है।

एक सार्थक कदम
प्रोफेसर शाहिद रशीद इसे एक छोटी शुरुआत मानते हैं। उनका सपना है कि संस्कृत, जिसने दर्शन, साहित्य और आध्यात्मिक परंपराओं को आकार दिया है, पाकिस्तान के राष्ट्रीय शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बने।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह टकराव की राजनीति से परे हटकर साझी मानवीय एवं सांस्कृतिक जड़ों की ओर ध्यान खींचती है।


