Homeन्यूजशंकराचार्य विवाद: फलाहारी बाबा ने CM योगी को खून से लिखा लेटर,...

शंकराचार्य विवाद: फलाहारी बाबा ने CM योगी को खून से लिखा लेटर, एक और अफसर ने दिया इस्तीफा

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Shankaracharya Controversy: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से शुरू हुआ एक छोटा सा विवाद अब प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है।

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच की यह जंग अब “सम्मान की लड़ाई” में बदल गई है।

इस विवाद की आंच अब लखनऊ से अयोध्या तक पहुंच गई है, जहां एक और अधिकारी अपने पद से इस्तीफा दे दिया हैं।

दूसरी तरफ संत समाज भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सीएम को खून से पत्र लिख रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद

इस विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को हुई।

मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी में सवार होकर गंगा स्नान के लिए जा रहे थे।

पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें पालकी ले जाने से रोक दिया और पैदल जाने को कहा।

इसी दौरान पुलिस और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

Avimukteshwaranand vs Prayagraj Administration, Shankaracharya Padvi Vivad

प्रशासन की वो गलती जिसने आग में घी डाला

विवाद तब और बढ़ गया जब माघ मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को नोटिस भेजकर उनके ‘शंकराचार्य’ होने का ही सबूत मांग लिया।

भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने अपनी मर्यादा लांघी है।

किसी के शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना प्रशासन का काम नहीं है, यह अधिकार केवल विद्वत परिषद और अन्य शंकराचार्यों के पास है।

खून से लिखा सीएम को पत्र

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी बाबा ने इस मामले में बड़ा मोड़ ला दिया है।

उन्होंने अपने खून से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोका गया, तो यह ‘गौ हत्या’ के समान पाप होगा।

उन्होंने यह भी आगाह किया कि संतों की इस लड़ाई का फायदा विपक्षी दल उठा सकते हैं।

Falahari Baba, Uma Bharti, resignation, Magh Mela, Prayagraj, Falahari Baba, Uma Bharti, resignation, Magh Mela, Prayagraj,

अफसरों का इस्तीफा

इस विवाद का सबसे हैरान करने वाला पहलू प्रशासनिक अधिकारियों का इस्तीफा है।

अयोध्या में तैनात GST कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ शंकराचार्य द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों से आहत हैं।

प्रशांत कुमार सिंह का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे अपनी पत्नी से फोन पर बात करते हुए रो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, उसके मुखिया का अपमान कैसे सहूं? 

उनसे पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी संतों के अपमान और यूजीसी के विरोध में इस्तीफा दिया था, जिन्हें बाद में सरकार ने सस्पेंड कर दिया।

Falahari Baba, Uma Bharti, resignation, Magh Mela, Prayagraj,

शंकराचार्य का कड़ा रुख

दूसरी ओर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयान पर कायम हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना ‘अकबर और औरंगजेब’ तक से कर दी।

उनका तर्क है कि वाराणसी में विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों को तोड़ा गया, जो एक सच्चा हिंदू नहीं कर सकता।

उन्होंने इसे ‘असली और नकली हिंदू’ के बीच की लड़ाई करार दिया है।

क्या होगा आगे?

फिलहाल अयोध्या के परमहंस महाराज जैसे कुछ संत शंकराचार्य के खिलाफ खड़े हैं और उन पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाने की मांग कर रहे हैं।

वहीं, उमा भारती जैसे नेता बीच-बचाव की कोशिश में हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि योगी सरकार इस धार्मिक और प्रशासनिक संकट को कैसे सुलझाती है, क्योंकि एक तरफ संतों की नाराजगी है और दूसरी तरफ अपने ही वफादार अधिकारियों का टूटता मनोबल।

- Advertisement -spot_img