Shankaracharya Controversy: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से शुरू हुआ एक छोटा सा विवाद अब प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है।
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच की यह जंग अब “सम्मान की लड़ाई” में बदल गई है।
इस विवाद की आंच अब लखनऊ से अयोध्या तक पहुंच गई है, जहां एक और अधिकारी अपने पद से इस्तीफा दे दिया हैं।
दूसरी तरफ संत समाज भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सीएम को खून से पत्र लिख रहे हैं।
#WATCH | Ayodhya, UP | On his resignation, Prashant Kumar Singh, GST Commissioner, Ayodhya, says, “In favour of the government and to oppose Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand, I have resigned. For the last 2 days, I was deeply hurt by his baseless allegations against our CM… pic.twitter.com/ajPjHErYIQ
— ANI (@ANI) January 27, 2026
कैसे शुरू हुआ विवाद
इस विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को हुई।
मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी में सवार होकर गंगा स्नान के लिए जा रहे थे।
पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें पालकी ले जाने से रोक दिया और पैदल जाने को कहा।
इसी दौरान पुलिस और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

प्रशासन की वो गलती जिसने आग में घी डाला
विवाद तब और बढ़ गया जब माघ मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को नोटिस भेजकर उनके ‘शंकराचार्य’ होने का ही सबूत मांग लिया।
भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने अपनी मर्यादा लांघी है।
किसी के शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना प्रशासन का काम नहीं है, यह अधिकार केवल विद्वत परिषद और अन्य शंकराचार्यों के पास है।
मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों…
— Uma Bharti (@umasribharti) January 27, 2026
खून से लिखा सीएम को पत्र
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी बाबा ने इस मामले में बड़ा मोड़ ला दिया है।
उन्होंने अपने खून से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोका गया, तो यह ‘गौ हत्या’ के समान पाप होगा।
उन्होंने यह भी आगाह किया कि संतों की इस लड़ाई का फायदा विपक्षी दल उठा सकते हैं।

अफसरों का इस्तीफा
इस विवाद का सबसे हैरान करने वाला पहलू प्रशासनिक अधिकारियों का इस्तीफा है।
अयोध्या में तैनात GST कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ शंकराचार्य द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों से आहत हैं।
प्रशांत कुमार सिंह का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे अपनी पत्नी से फोन पर बात करते हुए रो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, उसके मुखिया का अपमान कैसे सहूं?
CM योगी का अपमान, ले इस्तीफा!#अयोध्या में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने योगी आदित्यनाथ के अपमान के खिलाफ अपने पद से रोते हुए इस्तीफा दे दिया है pic.twitter.com/A8If1QtYNT
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) January 27, 2026
उनसे पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी संतों के अपमान और यूजीसी के विरोध में इस्तीफा दिया था, जिन्हें बाद में सरकार ने सस्पेंड कर दिया।

#WATCH बरेली, उत्तर प्रदेश| कल बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार में काफी समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है। ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। कहीं, एक डिप्टी जेलर एक… pic.twitter.com/qTGM08Z8Bz
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 27, 2026
शंकराचार्य का कड़ा रुख
दूसरी ओर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयान पर कायम हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना ‘अकबर और औरंगजेब’ तक से कर दी।
उनका तर्क है कि वाराणसी में विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों को तोड़ा गया, जो एक सच्चा हिंदू नहीं कर सकता।
उन्होंने इसे ‘असली और नकली हिंदू’ के बीच की लड़ाई करार दिया है।
‘Yogi को हम औरंगज़ेब कहते हैं, ये हिंदू कहलाने लायक नहीं…’
Uttar Pradesh के CM Yogi Adityanath से नाराज़ Shankaracharya अविमुक्तेश्वरानंद क्या बोल गए – pic.twitter.com/NsTtm176Mg
— News Pinch (@TheNewspinch) January 21, 2026
क्या होगा आगे?
फिलहाल अयोध्या के परमहंस महाराज जैसे कुछ संत शंकराचार्य के खिलाफ खड़े हैं और उन पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, उमा भारती जैसे नेता बीच-बचाव की कोशिश में हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि योगी सरकार इस धार्मिक और प्रशासनिक संकट को कैसे सुलझाती है, क्योंकि एक तरफ संतों की नाराजगी है और दूसरी तरफ अपने ही वफादार अधिकारियों का टूटता मनोबल।


