Shivpuri Teacher Suspend: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक सरकारी शिक्षक को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल (मिमिक्री) करना भारी पड़ गया।
पोहरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय (सेमरखेड़ी) में तैनात शिक्षक साकेत पुरोहित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साकेत पुरोहित हुबहू प्रधानमंत्री मोदी के अंदाज में ‘भाइयों-बहनों’ कहकर संबोधित करते नजर आ रहे हैं।
इस वीडियो पर पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से लिखित शिकायत की।
क्या था उस वीडियो में?
वीडियो में वह गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर व्यंग्य करते हुए कहा:
“मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, गैस के दाम कम हुए कि नहीं हुए? नहीं हुए। दाम बढ़े कि नहीं बढ़े? बढ़ गए। तो भाइयों-बहनों, गैस के दाम इसलिए बढ़ाए गए हैं क्योंकि गैस की रोटी खाने से पेट में गैस बनती है। अगर पेट में गैस बनेगी तो आप बीमार पड़ोगे, और आप बीमार पड़ोगे तो देश बीमार पड़ जाएगा।”
इतना ही नहीं, वीडियो में वह आगे कहते हैं कि जब सिलेंडर महंगा होगा, तो गरीब और अमीर दोनों ही चूल्हे की रोटी खाएंगे, जिससे अमीरी और गरीबी की खाई खत्म हो जाएगी।
शिक्षक का यह तंजिया लहजा सोशल मीडिया पर तेजी से फैला और राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया।
भाजपा विधायक की शिकायत और कार्रवाई
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का कहना है कि कि एक सरकारी पद पर रहते हुए किसी संवैधानिक पद (प्रधानमंत्री) की इस तरह गरिमा गिराना और आपत्तिजनक टिप्पणी करना ‘सिविल सेवा आचरण नियमों’ का खुला उल्लंघन है।
विधायक लोधी ने सख्त लहजे में कहा कि साकेत पुरोहित का “चाल, चरित्र और चेहरा गंदा है” और भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता प्रधानमंत्री के प्रति ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई से समाज में एक संदेश जाएगा ताकि दूसरे लोग अपनी मर्यादा न भूलें।

शिक्षक का पक्ष: “नहीं मिला सफाई का मौका”
दूसरी ओर, निलंबित शिक्षक साकेत पुरोहित ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताया है।
उनका कहना है कि उन्हें न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया।
साकेत के अनुसार, यह सिर्फ एक व्यंग्य था, लेकिन प्रशासन ने बिना जांच और बिना उनकी बात सुने सीधे निलंबन का आदेश थमा दिया।

नियमों का हवाला और सस्पेंशन
जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के बाद माना कि साकेत पुरोहित का कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत है।
सरकारी कर्मचारी को राजनीति या सरकार की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से इस तरह कटाक्ष करने की अनुमति नहीं होती।
निलंबन अवधि के दौरान साकेत का मुख्यालय बदरवास तय किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
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