Homeन्यूजNCERT की 'ज्यूडिशियल करप्शन' चैप्टर वाली किताब पर सुप्रीम कोर्ट का बैन,...

NCERT की ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर वाली किताब पर सुप्रीम कोर्ट का बैन, अवमानना नोटिस जारी

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Supreme Court NCERT Controversy: NCERT की सोशल साइंस की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Judicial Corruption) से जुड़े चैप्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है।

चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस मामले में न केवल किताब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, बल्कि इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की एक “गहरी साजिश” करार दिया है।

इसके साथ ही फटकार लगाते हुए कहा है कि सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा

कोर्ट की फटकार: “माफी से काम नहीं चलेगा”

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का लहजा बेहद सख्त था।

जब NCERT की ओर से पक्ष रखा गया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि इस गंभीर गलती के लिए सिर्फ माफी मांग लेना काफी नहीं है।

CJI सूर्यकांत ने कहा, “यह न्यायपालिका की छवि खराब करने की सोची-समझी कोशिश लगती है।”

कोर्ट ने इस मामले में ‘स्वत: संज्ञान’ (Suo Motu) लेते हुए शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और NCERT के डायरेक्टर को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया है।

उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

NCERT Judicial Corruption Chapter, CJI Suryakant on NCERT, Class 8 Social Science New Book, Judicial Pendency India, Supreme Court vs NCERT Hindi News, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, एनसीईआरटी नई किताब विवाद

सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े और कड़े निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुलझाने के लिए पांच अहम आदेश दिए हैं:

  1. पूरी तरह से प्रतिबंध: किताब की छपाई, बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी गई है। अब इस किताब को किसी भी रूप (हार्ड कॉपी या डिजिटल) में बांटना अपराध माना जाएगा।

  2. कॉपियां जब्त करने का आदेश: कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों के शिक्षा विभागों को निर्देश दिया है कि वे स्कूलों और दुकानों से इस किताब की सभी प्रतियां तुरंत वापस लें और डिजिटल वर्जन को इंटरनेट से हटाएं।

  3. लेखकों की पहचान: NCERT से उन सभी लोगों के नाम और उनकी योग्यता की जानकारी मांगी गई है, जिन्होंने यह चैप्टर लिखा या इसे मंजूरी दी। कोर्ट जानना चाहता है कि करिकुलम बोर्ड के किन सदस्यों ने इस विवादित कंटेंट को पास किया।

  4. मीटिंग के रिकॉर्ड: सिलेबस तय करने के लिए जो भी बैठकें हुईं, उनकी पूरी लिखित कार्यवाही (Minutes of Meeting) अगली सुनवाई तक कोर्ट में पेश करने को कहा गया है।

  5. मुख्य सचिवों को अल्टीमेटम: सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया गया है कि वे दो हफ्ते के भीतर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपें कि उनके राज्य में इस किताब को हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

कैसे शुरू हुआ विवाद

विवाद की जड़ NCERT की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई किताब है।

इस किताब के एक अध्याय में न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के बारे में विस्तार से लिखा गया था।

कोर्ट का मानना है कि इस कंटेंट में संतुलन की भारी कमी थी।

इसमें यह तो बताया गया कि सिस्टम में कमियां हैं, लेकिन न्यायपालिका ने खुद को सुधारने या न्याय दिलाने के लिए जो ऐतिहासिक प्रयास किए हैं, उनका कोई जिक्र नहीं था।

जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया, तो बेंच ने पाया कि यह सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि बच्चों के मन में देश की न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश है।

Supreme Court on WhatsApp, WhatsApp Data Privacy India, Meta CCI Penalty, CJI Suryakant on WhatsApp, WhatsApp India Exit Warning, डेटा प्राइवेसी सुप्रीम कोर्ट, वॉट्सऐप पर जुर्माना।

भविष्य की पीढ़ियों पर असर

कोर्ट ने चिंता जताई कि अगर कक्षा 8 के बच्चे, जो अभी किशोरावस्था में कदम रख रहे हैं, अपनी पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका के बारे में ऐसी एकतरफा बातें पढ़ेंगे, तो उनका लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ से भरोसा उठ जाएगा।

कोर्ट ने अखबारों की उन रिपोर्ट्स का भी जिक्र किया जिनमें कहा गया था कि NCERT डायरेक्टर ने शुरुआत में इस कंटेंट का बचाव किया था, जिसे कोर्ट ने ‘क्रिमिनल कंटेम्पट’ (आपराधिक अवमानना) की श्रेणी में माना है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

तब तक कोर्ट ने एक जांच समिति बनाने का भी संकेत दिया है जो यह पता लगाएगी कि आखिर किस मंशा से इस चैप्टर को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था।

- Advertisement -spot_img