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लॉ ग्रेजुएट्स को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: अब 3 नहीं, 1 साल की प्रैक्टिस पर बन सकेंगे जज

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Law Graduates Judge Eligibility: निचली अदालतों में जज बनने का सपना देख रहे लॉ ग्रेजुएट्स और युवा वकीलों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बेहद राहत भरी खबर आई है।

अदालत ने अपने मई 2025 के पुराने फैसले को बदलते हुए एंट्री लेवल ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम (न्यायिक सेवा परीक्षा) के लिए वकालत के अनुभव की शर्त में भारी ढील दी है।

पहले जहां जज बनने के लिए कम से कम 3 साल का कानूनी प्रैक्टिस (वकालत) का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया था, वहीं अब इसे घटाकर महज 1 साल कर दिया गया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की 3 जजों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया।

यह फैसला उस समीक्षा याचिका (Review Petition) पर आया है, जो मई 2025 के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थीं।

जानिए किन उम्मीदवारों को मिलेगी क्या राहत?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आने वाले समय में परीक्षा देने वाले युवाओं को दो अलग-अलग चरणों में फायदा पहुंचेगा:

* ट्रैंजिशन पीरियड (25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 तक):

   25 मई 2025 से लेकर 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाले किसी भी ज्यूडिशियरी परीक्षा के नोटिफिकेशन के लिए किसी भी अनुभव की जरूरत नहीं होगी।

यानी फ्रेश लॉ ग्रेजुएट और बिना किसी वकालत अनुभव वाले उम्मीदवार भी इस दौरान सीधी परीक्षा दे सकेंगे।

 * परमानेंट नियम (1 अप्रैल 2027 से लागू):

1 अप्रैल 2027 को या उसके बाद निकलने वाले सभी ज्यूडिशियरी परीक्षा नोटिफिकेशन्स के लिए उम्मीदवारों के पास केवल 1 साल का प्रैक्टिस एक्सपीरियंस होना जरूरी होगा।

पुराना 3 साल वाला नियम पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

बिना अनुभव चुने गए उम्मीदवारों के लिए क्या होंगे नियम?

अगर कोई उम्मीदवार बिना अनुभव के इस बीच परीक्षा पास कर लेता है, तो उसे सीधे अदालत की कुर्सी पर बैठकर फैसला सुनाने का अधिकार नहीं मिलेगा।

कोर्ट ने इसके लिए एक खास ट्रेनिंग प्रोसेस तैयार किया है:

* 1 साल की ट्रेनी ऑफिसर पोस्टिंग: फ्रेश सिलेक्टेड कैंडिडेट्स को 1 साल तक ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर (Trainee Judicial Officer) के रूप में ग्राउंड पर काम सीखना होगा।

* स्ट्रक्चर्ड क्लर्कशिप: इसके साथ ही उन्हें 1 साल की अनिवार्य क्लर्कशिप प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ेगा, ताकि वे कोर्ट की व्यावहारिक कार्यवाही को अच्छी तरह समझ सकें।

कोर्ट ने फैसला बदलने की पीछे क्या वजह बताई?

मई 2025 में जब 3 साल के अनुभव का नियम लागू किया गया था, तो उससे फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स और युवाओं के सामने अचानक बड़ा संकट खड़ा हो गया था।

वे बिना किसी पूर्व तैयारी के परीक्षा देने से वंचित हो गए थे।

समीक्षा याचिकाओं पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बिना किसी ट्रांजिशन पीरियड (बदलाव के वक्त) के अचानक 3 साल का नियम थोपना सही नहीं था।

इससे युवाओं को बहुत असुविधा हुई।

कोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था में परिपक्वता के लिए अनुभव बेहद जरूरी है, लेकिन नियम इस तरह बनने चाहिए कि युवाओं का करियर प्रभावित न हो।

आगे की राह: हाईकोर्ट्स अपडेट करेंगी अपने नियम

इस फैसले के बाद अब देश भर के लॉ ग्रेजुएट्स के लिए जज बनने की राह काफी आसान हो गई है।

आने वाले कुछ हफ्तों और महीनों में सभी राज्यों की हाईकोर्ट्स सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के मुताबिक अपनी राज्य स्तरीय न्यायिक सेवा परीक्षाओं (State Judiciary Exams) के नियमों को अपडेट करेंगी।

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