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सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, सरकार को दोबारा ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Supreme Court stays UGC: देशभर में हंगामा मचाने वाले UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी है और केंद्र सरकार को इन्हें दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनका दुरुपयोग हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

29 जनवरी को सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जे. बी. पारदीवाला की बेंच ने सुनवाई की।

कोर्ट ने नियमों पर तुरंत रोक लगा दी और कहा कि इनमें इस्तेमाल शब्दों से लगता है कि इनका दुरुपयोग हो सकता है।

सीजेआई ने केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा, “हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ हासिल किया है? क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं?”

कोर्ट ने सरकार के उस प्रस्ताव पर भी सवाल उठाया जिसमें एससी/एसटी छात्रों के लिए अलग हॉस्टल की बात कही गई थी।

सीजेआई ने कहा, “ऐसा मत कीजिए। आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं।”

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दोबारा ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।

इस कमेटी का काम यह देखना होगा कि कैसे ‘सबका साथ, सबका विकास’ सुनिश्चित किया जाए और बिना किसी भेदभाव के समान अवसर मिलें।

कोर्ट ने सरकार से नए नियमों का ड्राफ्ट दोबारा तैयार करके पेश करने को कहा है।

क्या थे विवादित नियम?

यूजीसी ने 13 जनवरी को नए नियम जारी किए थे, जिनके तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में ‘इक्विटी सेंटर’, ‘इक्विटी स्क्वॉड’ और ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना अनिवार्य कर दिया गया था।

आयोग का कहना था कि इसका मकसद उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना है।

नियमों में 24×7 हेल्पलाइन का भी प्रावधान था और चेतावनी दी गई थी कि नियम न मानने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द या फंड रोका जा सकता है।

हालांकि, इन नियमों का सवर्ण समुदाय के छात्रों और लोगों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया।

दिल्ली यूनिवर्सिटी, लखनऊ यूनिवर्सिटी समेत कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन हुए।

विरोधियों का आरोप था कि ये नियम ‘भेदभाव’ को और बढ़ावा देंगे तथा संस्थानों में एक ‘निगरानी तंत्र’ बन जाएगा।

इसी विरोध के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

एम.के. स्टालिन ने किया समर्थन

इधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इन नियमों का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि यह उच्च शिक्षा प्रणाली में भेदभाव खत्म करने की दिशा में एक अच्छा कदम है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार को नए सिरे से इन प्रावधानों पर विचार करना होगा।

अगली सुनवाई तक इन नियमों पर रोक जारी रहेगी।

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