Supreme Court stays UGC: देशभर में हंगामा मचाने वाले UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी है और केंद्र सरकार को इन्हें दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनका दुरुपयोग हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
29 जनवरी को सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जे. बी. पारदीवाला की बेंच ने सुनवाई की।
कोर्ट ने नियमों पर तुरंत रोक लगा दी और कहा कि इनमें इस्तेमाल शब्दों से लगता है कि इनका दुरुपयोग हो सकता है।
Supreme Court stays the University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, notified on January 23, 2026 which was challenged by various petitioners as being arbitrary, exclusionary, discriminatory and in violation of the Constitution… pic.twitter.com/KUuXgEMntL
— ANI (@ANI) January 29, 2026
सीजेआई ने केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा, “हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ हासिल किया है? क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं?”
कोर्ट ने सरकार के उस प्रस्ताव पर भी सवाल उठाया जिसमें एससी/एसटी छात्रों के लिए अलग हॉस्टल की बात कही गई थी।
सीजेआई ने कहा, “ऐसा मत कीजिए। आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं।”

दोबारा ड्राफ्ट तैयार करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।
इस कमेटी का काम यह देखना होगा कि कैसे ‘सबका साथ, सबका विकास’ सुनिश्चित किया जाए और बिना किसी भेदभाव के समान अवसर मिलें।
कोर्ट ने सरकार से नए नियमों का ड्राफ्ट दोबारा तैयार करके पेश करने को कहा है।
क्या थे विवादित नियम?
यूजीसी ने 13 जनवरी को नए नियम जारी किए थे, जिनके तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में ‘इक्विटी सेंटर’, ‘इक्विटी स्क्वॉड’ और ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना अनिवार्य कर दिया गया था।
आयोग का कहना था कि इसका मकसद उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना है।
नियमों में 24×7 हेल्पलाइन का भी प्रावधान था और चेतावनी दी गई थी कि नियम न मानने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द या फंड रोका जा सकता है।
हालांकि, इन नियमों का सवर्ण समुदाय के छात्रों और लोगों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी, लखनऊ यूनिवर्सिटी समेत कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन हुए।
विरोधियों का आरोप था कि ये नियम ‘भेदभाव’ को और बढ़ावा देंगे तथा संस्थानों में एक ‘निगरानी तंत्र’ बन जाएगा।
इसी विरोध के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
एम.के. स्टालिन ने किया समर्थन
इधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इन नियमों का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि यह उच्च शिक्षा प्रणाली में भेदभाव खत्म करने की दिशा में एक अच्छा कदम है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार को नए सिरे से इन प्रावधानों पर विचार करना होगा।
अगली सुनवाई तक इन नियमों पर रोक जारी रहेगी।


