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सियासत का ‘दही-चूड़ा’: क्या खत्म हुआ तेजप्रताप का वनवास? लालू ने गले लगाया पर तेजस्वी-राबड़ी नदारद

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Lalu Yadav meets Tej Pratap: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के पर आयोजित होने वाला ‘दही-चूड़ा भोज’ अक्सर बड़ा सियासी संदेश देता है।

इस बार राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव द्वारा आयोजित भोज सबसे अधिक चर्चा में रहा।

करीब 8 महीने के लंबे अंतराल और पारिवारिक निष्कासन के बाद, यह पहला मौका था जब लालू यादव स्वयं अपने बड़े बेटे के आवास पहुंचे और सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि “अब तेजप्रताप साथ ही रहेंगे।”

8 महीने का वनवास

पिछले साल मई में तेजप्रताप यादव की एक युवती के साथ फोटो सार्वजनिक होने के बाद लालू यादव ने कड़ा रुख अपनाया था।

लालू ने सोशल मीडिया (X) पर एक भावुक और सख्त पोस्ट लिखते हुए तेजप्रताप को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था और परिवार से भी दूरी बना ली थी।

लालू ने तब कहा था कि तेजप्रताप का आचरण पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के संघर्ष के खिलाफ है।

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भोज में लालू का आशीर्वाद और तेजस्वी की गैरमौजूदगी

बुधवार को तेजप्रताप के सरकारी आवास (26 एम स्ट्रैंड रोड) पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में लालू यादव पहुंचे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने बेटे से अब नाराज नहीं हैं।

हालांकि, इस पूरे आयोजन में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी का शामिल न होना चर्चा का विषय बना रहा।

भले ही तेजप्रताप ने एक दिन पहले राबड़ी आवास जाकर अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में खिलाया और सबको न्योता दिया, लेकिन भोज के दौरान मां और छोटे भाई की अनुपस्थिति ने पारिवारिक मतभेदों के पूरी तरह खत्म न होने के संकेत दिए।

विपक्ष से नजदीकी और सियासी मायने

तेजप्रताप का यह भोज केवल पारिवारिक मिलन तक सीमित नहीं रहा।

इसमें बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अलावा एनडीए के कई नेता और पुराने बागी रिश्तेदार जैसे साधु यादव भी नजर आए।

सबसे चौंकाने वाली बात तेजप्रताप की डिप्टी सीएम विजय सिन्हा से बढ़ती नजदीकी रही।

तेजप्रताप पिछले दिन विजय सिन्हा के घर भोज पर गए थे और विजय सिन्हा ने उनके एनडीए में आने के सवाल पर “वक्त” की बात कहकर सस्पेंस बढ़ा दिया है।

बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद ने भी इस भोज में शिरकत की और तेजप्रताप को अपना बड़ा भाई बताया।

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फिलहाल लालू यादव के रुख से ऐसा लगता है कि तेजप्रताप की घर वापसी हो गई है, लेकिन राजद की मुख्यधारा और तेजस्वी के साथ उनके तालमेल पर अब भी सवालिया निशान हैं।

क्या यह केवल एक पारिवारिक सुधार है या तेजप्रताप किसी नई सियासी राह (NDA) की तलाश में हैं, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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