Donald Trump Global Tariff: 20 फरवरी का दिन अमेरिकी राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी हाई-वोल्टेज ड्रामे से कम नहीं था।
एक तरफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को ‘अवैध’ बताते हुए रद्द कर दिया।
वहीं दूसरी तरफ ट्रम्प ने महज 3 घंटे के भीतर अपने विशेष अधिकारों (सेक्शन 122) का इस्तेमाल करते हुए दुनिया भर पर 10% नया ग्लोबल टैरिफ ठोक दिया।
यह नया आदेश 24 फरवरी की आधी रात से लागू होने जा रहा है, जिसने पूरी दुनिया के बाजारों में हलचल मचा दी है।
VIDEO | After the decision of the SC to strike down tariffs levied on other countries, US President Donald Trump (@realDonaldTrump) says he will sign an order today to impose a 10 pc global tariff under Section 122 over and above our normal tariffs already being charged.
He… pic.twitter.com/wN2xy9vSnn
— Press Trust of India (@PTI_News) February 20, 2026
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी संविधान के मुताबिक, देश पर टैक्स या टैरिफ लगाने का हक सिर्फ संसद (Congress) को है, राष्ट्रपति को नहीं।
कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है, इसलिए राष्ट्रपति मनमाने ढंग से ऐसे टैक्स नहीं थोप सकते।
कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा पिछले दिनों लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया।

ट्रम्प का गुस्सा
इस फैसले से ट्रम्प आगबबूला हो गए। उन्होंने जजों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें “कट्टर वामपंथियों के पालतू” और “देश के लिए कलंक” तक कह दिया।
ट्रम्प का तर्क है कि देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति के पास ये अधिकार होने चाहिए।
ट्रम्प का मानना है कि जजों में देश के लिए सही फैसला लेने की हिम्मत नहीं है। हालांकि, कोर्ट में मौजूद तीन रिपब्लिकन जजों ने इस फैसले का विरोध भी किया था।
U.S President Donald Trump posted on Truth Social, “It is my Great Honor to have just signed, from the Oval Office, a Global 10% Tariff on all Countries, which will be effective almost immediately. Thank you for your attention to this matter” pic.twitter.com/a5ojIAduFF
— IANS (@ians_india) February 21, 2026
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर
- ट्रम्प के लगाए टैरिफ हट जाएंगे।
- अमेरिका को कंपनियों को पैसा वापस करना पड़ सकता है।
- दुनिया के देशों को अमेरिका में सामान बेचने में राहत मिलेगी।
- भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को फायदा होगा।
- कई चीजें सस्ती हो सकती हैं।
- शेयर बाजारों में तेजी आ सकती है।
- दुनिया का व्यापार ज्यादा स्थिर हो सकता है।
भारत को राहत: 18% से घटकर 10% हुआ टैरिफ
इस उठापटक के बीच भारत के लिए एक राहत की खबर है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भारत, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देश जिनके साथ अमेरिका के व्यापारिक समझौते चल रहे हैं अब पुराने भारी-भरकम टैरिफ की जगह केवल 10% के नए ग्लोबल टैरिफ के दायरे में आएंगे।
इसका सीधा मतलब यह है कि भारत पर जो टैरिफ पहले 18% तक पहुंचने की आशंका थी, वह अब घटकर 10% रह जाएगा।
STORY | India faces lower tariff rate of 10% as Trump issues proclamation on new levies
India now faces a lower tariff rate of 10 per cent, down from 18 per cent, after US President Donald Trump announced a new global levy on items imported into America in the wake of the… pic.twitter.com/sZOmrSvtg8
— Press Trust of India (@PTI_News) February 21, 2026
ट्रम्प ने खुद सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘अच्छा दोस्त’ बताते हुए स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय समझौतों पर बातचीत पहले की तरह ही आगे बढ़ेगी।

सेक्शन 122: क्या है ट्रम्प का ‘कानूनी ब्रह्मास्त्र’
जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के पुराने आदेश को अवैध बताया, तो ट्रम्प ने ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ के सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया।
यह एक ऐसा कानून है जो राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश की अर्थव्यवस्था पर अचानक कोई खतरा आए या व्यापार घाटा बढ़ जाए, तो वह 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इस कानून का इस्तेमाल 55 साल पहले राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने किया था।
ट्रम्प ने इसी कानून की आड़ लेकर कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर दिया।
उनका तर्क है कि विदेशी ताकतें अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही हैं और इसे रोकने के लिए उन्हें संसद की इजाजत की जरूरत नहीं है।

किसे मिली छूट और किसे लगा झटका?
ट्रम्प के इस 10% ग्लोबल टैरिफ से कुछ जरूरी चीजों को बाहर रखा गया है ताकि अमेरिकी जनता पर महंगाई की मार न पड़े। इसमें शामिल हैं:
- कृषि उत्पाद: जैसे बीफ, संतरा और टमाटर।
- दवाइयां: जीवन रक्षक दवाओं को छूट दी गई है।
- महत्वपूर्ण खनिज: जो अमेरिकी फैक्ट्रियों के लिए जरूरी हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: कुछ चुनिंदा कैटेगरी के गैजेट्स।
वहीं, स्टील और एल्युमिनियम पर लगने वाले टैरिफ पहले की तरह जारी रहेंगे क्योंकि वे अलग कानूनों के तहत आते हैं।
भारत-यूएस ट्रेड डील का भविष्य
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, अमेरिका के साथ ‘अंतरिम व्यापार समझौता’ (Interim Trade Deal) फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएगा।
मार्च में इस पर हस्ताक्षर होने की संभावना है और अप्रैल से यह पूरी तरह लागू हो सकता है।
23 फरवरी को भारतीय अधिकारियों का एक दल अमेरिका जाकर कानूनी ड्राफ्ट तैयार करेगा।
टैक्स में इस संभावित कटौती से भारत के कपड़ा (Textile), चमड़ा (Leather) और जेम्स-ज्वैलरी जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा मिलने की उम्मीद है।

कुलमिलाकर, डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम दिखाता है कि वे अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें न्यायपालिका से ही क्यों न टकराना पड़े।
भारत के लिए स्थिति फिलहाल सकारात्मक दिख रही है, क्योंकि टैरिफ का बोझ कम होने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
अब पूरी दुनिया की नजरें 24 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह नया आर्थिक आदेश प्रभावी होगा।


