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VIT यूनिवर्सिटी ने सरकार को भेजा 49 पेज का जवाब, कहा- फेक न्यूज की वजह से हुई हिंसा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

VIT university controversy: VIT विश्वविद्यालय, भोपाल ने राज्य सरकार के एक शो-कॉज नोटिस (कारण बताओ नोटिस) का जवाब देते हुए 49 पन्नों का ब्योरा भेजा है।

यूनिवर्सिटी ने सरकार के आरोपों को भ्रम फैलाने वाले, तथ्यहीन और गलत जानकारी पर आधारित बताया है।

उनका कहना है कि पूरा विवाद सोशल मीडिया पर फैलाई गई फर्जी खबरों और अफवाहों की वजह से भड़का था।

क्या हुआ था:

नवंबर 2025 के आखिर में, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर अफवाहें फैलीं कि विश्वविद्यालय में तीन छात्रों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा की हालत गंभीर है।

इन खबरों के बाद कुछ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, VIT ने अपने जवाब में साफ किया कि करीब 17,121 छात्रों में से केवल 35 छात्रों में ही पीलिया के लक्षण पाए गए थे।

सभी 35 को तुरंत इलाज मुहैया कराया गया।

यूनिवर्सिटी ने कहा कि छात्रों की मेडिकल रिपोर्ट पहले ही संबंधित समिति को सौंप दी गई थी।

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भोजन और पानी की गुणवत्ता पर सफाई:

आरोपों के विपरीत, विश्वविद्यालय ने दावा किया कि उनके सभी 10 हॉस्टल (8 बॉयज और 2 गर्ल्स) के लिए भोजन इंदौर, भोपाल और चेन्नई के नामी केटरर्स से मंगाया जाता है।

मेन्यू एक छात्र खाद्य समिति तय करती है और छात्रों के फीडबैक पर तुरंत कार्रवाई होती है।

पीने के पानी की गुणवत्ता ISO 10500 मानकों के अनुसार नियमित जांची जाती है और ओजोनाइजर, सैंड फिल्टर जैसी आधुनिक व्यवस्था है।

जल्द ही कैंपस में ही फूड और वॉटर टेस्टिंग लैब भी बनाई जाएगी, जिसके नतीजे सबके देखने के लिए ऑनलाइन डाले जाएंगे।

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स्वास्थ्य और सुरक्षा सुविधाएं:

कैंपस में 8 बेड की मेडिकल सुविधा है, जहां 4 डॉक्टर और 6 नर्स 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं।

गंभीर मामलों में छात्रों को नजदीक के अच्छे अस्पतालों में भेजा जाता है।

सुरक्षा के मामले में यूनिवर्सिटी ने कहा कि SOP के मुताबिक ही बिना जानकारी वाले वाहनों की जांच होती है, लेकिन किसी अधिकारी को 2 घंटे रोके जाने का आरोप गलत है।

उन्होंने छात्रों के आईडी कार्ड जब्त करने या धमकाने के आरोपों से भी इनकार किया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का उल्लेख:

विश्वविद्यालय ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, जिसमें एक एम्बुलेंस, एक बस और तीन कारों को आग लगा दी गई।

कई वाहनों के शीशे तोड़े गए। हॉस्टल और सर्विलांस बिल्डिंग के सीसीटीवी सिस्टम तोड़ दिए गए।

लैब में जबरन घुसकर कंप्यूटर और गेमिंग पीसी को नुकसान पहुंचाया गया।

वार्डन और सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट भी हुई।

यूनिवर्सिटी की मांग:

VIT ने सरकार से कहा है कि शो-कॉज नोटिस “झूठी और फर्जी सूचनाओं” पर आधारित है।

चूंकि संस्था ने सभी नियमों और मानकों का पालन किया है, इसलिए नोटिस वापस लिया जाना चाहिए।

साथ ही, उन्होंने सरकार से अपना पक्ष रखने का मौका देने की अपील की है।

अपने जवाब में, यूनिवर्सिटी ने 2017 में स्थापना के बाद से अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों और 100% डॉक्टरेट फैकल्टी जैसे पहलुओं का भी जिक्र किया है।

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