VIT University Controversy: मध्य प्रदेश विधानसभा में VIT विश्वविद्यालय के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं।
कांग्रेस विधायक ने जबरन कंसेंट बॉन्ड, दूषित पानी और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ जैसे मामले उजागर किए।
उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय के खिलाफ कठोर कार्रवाई का ऐलान किया है।
विधायक का बड़ा खुलासा: “सहमति पत्र के नाम पर जबरदस्ती”
मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने VIT विश्वविद्यालय (वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के खिलाफ चौंकाने वाले आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रवेश के समय छात्रों से एक अनिवार्य “कंसेंट बॉन्ड” (सहमति पत्र) भरवाता है।
इस बॉन्ड के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी समय छात्रों का ब्लड और यूरिन सैंपल ले सकता है, उसे स्टोर कर सकता है और जरूरत पड़ने पर परिणाम विश्वविद्यालय को दे सकता है।

कटारे ने सदन में बॉन्ड की विशेष लाइन पढ़कर सुनाई:
“I consent to permit the tracing doctor to collect and store blood, urine samples and also to disclose the result to VIT Bhopal if necessary”
मैं सहमति देता/देती हूं कि ट्रेसिंग डॉक्टर मेरे रक्त और मूत्र के नमूने एकत्रित और संग्रहित कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर रिजल्ट VIT भोपाल को साझा कर सकते हैं।)
उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया छात्रों की वास्तविक और स्वैच्छिक सहमति के बिना, दबाव में करवाई जाती है, जो उनके निजता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
VIT यूनिवर्सिटी में बिना सहमति लेते हैं ब्लड-यूरिन सैंपल: विधानसभा में हेमंत कटारे बोले- स्टूडेंट्स से जबरन कंसेंट बॉन्ड भरवाते हैं; यहां बजरंगबली का नाम लेने पर फाइन#MadhyaPradesh #Bhopal #VIT https://t.co/k5BzYUyX7L pic.twitter.com/Sx1vlqHhl9
— Dainik Bhaskar (@DainikBhaskar) December 4, 2025
बजरंगबली का नाम लेने पर लगता है जुर्माना
हेमंत कटारे ने एक और मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह वही संस्थान है जहां बजरंगबली (हनुमान जी) का नाम लेने पर छात्रों पर 5,000 रुपए का जुर्माना (फाइन) लगाया जाता है और दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने बताया कि 8 जुलाई 2022 को भी कुछ छात्रों ने बजरंगबली का नाम लिया था, जिस पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई।
कटारे ने कहा, “मोदी जी और डॉ. मोहन भागवत जी राम राज्य की कल्पना करते हैं, लेकिन हम ऐसे राम राज्य की कल्पना नहीं कर सकते जहां हनुमान जी का नाम लेने पर ऐसी कार्रवाई हो। देश में ऐसा कभी नहीं देखा।”
Basically bad hygiene, ignored complaints, students exploded.
Story of VIT Bhopal. pic.twitter.com/GXhMa6wNaH
— Squint Neon (@TheSquind) November 26, 2025
छात्र आंदोलन की जड़: दूषित पानी-खराब भोजन
विधायकों ने बताया कि विश्वविद्यालय में छात्रों के आक्रोश की मुख्य वजह बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
परिसर के पेयजल के 18 नमूनों की जांच में से 4 में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए।
छात्रों की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें महीनों तक लंबित रहीं।
इन सभी समस्याओं के कारण छात्रों में भारी असंतोष पनपा, जो 25 नवंबर की रात हुए हिंसक आंदोलन का कारण बना।
उस रात करीब 4,000 छात्र आंदोलन पर उतर आए थे।
उन्होंने परिसर में बसों और वाहनों में आग लगा दी, शीशे तोड़े और तोड़फोड़ की।
Urgent: Massive Jaundice Outbreak at VIT Bhopal – 300+ Students Affected, 3 Lives Lost
What was supposed to be a safe campus has turned into a nightmare. Over 300 students are battling jaundice after consuming contaminated food and water from the hostel mess. Tragically, 3… pic.twitter.com/P2JsXN7Cn4
— MasterMindUserr (@MasterMindUserr) November 25, 2025
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 5 थानों की पुलिस को मौके पर उतारना पड़ा था, जिसके बाद छात्रों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गईं।
शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने की कार्रवाई की घोषणा
इस पूरे मामले पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन में जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को धारा 41(1) के तहत नोटिस जारी किया गया है।
7 दिनों के बाद धारा 41(2) के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें विश्वविद्यालय को सरकारी नियंत्रण में लेना भी शामिल है।
मंत्री ने कहा, “मैं विश्वास दिलाता हूं कि एक भी छात्र का भविष्य खराब नहीं होगा। समस्या विश्वविद्यालय प्रबंधन के कारण पैदा हुई है, छात्रों के कारण नहीं।”

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विश्वविद्यालय की व्यवस्था मानवीय दृष्टिकोण से ठीक नहीं थी, इसलिए सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े।
मजिस्ट्रियल जांच की मांग, छात्रों के खिलाफ केस वापस हो
महिदपुर से कांग्रेस विधायक दिनेश जैन (बोस) ने मांग की कि इस पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच होनी चाहिए और छात्रों को शीघ्र न्याय मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लिए जाएं, ताकि मध्य प्रदेश का नाम देशभर में खराब न हो।
हेमंत कटारे ने भी लगभग 3,000 छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एफआईआर को निरस्त या वापस लेने की मांग की।
मंत्री परमार ने जवाब में कहा कि जिला प्रशासन पहले से ही इस मामले में शामिल है और यदि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सीएमएचओ को रोककर शासकीय कार्य में बाधा डाली है, तो उसके खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की जाएगी।
A peaceful protest in VIT started for clean and hygienic food but it took a different turn… pic.twitter.com/OJSaAzynN0
— Coding Doctor (@CodingDoctor) November 28, 2025
VIT भोपाल विश्वविद्यालय का यह मामला निजी शिक्षण संस्थानों में छात्र अधिकारों, नैतिकता और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बिना वास्तविक सहमति के मेडिकल नमूने लेना गंभीर चिंता का विषय है।
सरकार द्वारा घोषित कठोर कार्रवाई से यह उम्मीद बंधी है कि न केवल छात्रों को न्याय मिलेगा, बल्कि भविष्य में अन्य संस्थानों के लिए भी यह एक सबक साबित होगा।
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ही छात्रों का विश्वास बहाल कर सकती है।
