Bihar Next CM: बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से एक ही नाम गूंजता रहा है—नीतीश कुमार।
लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि बिहार की सियासत में एक युग का अंत होने जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर यह जानकारी दी कि वे अब राज्यसभा जा रहे हैं।
इसका सीधा मतलब है कि नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ रहे हैं।

आइए जानते हैं उन 5 दिग्गजों के बारे में जो बिहार के मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे हैं।
1. सम्राट चौधरी: बीजेपी का सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड
बिहार में फिलहाल जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है सम्राट चौधरी का।
सम्राट वर्तमान में बिहार के डिप्टी सीएम हैं और कोइरी (कुशवाहा) समाज से आते हैं।
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क्यों हैं खास: नीतीश कुमार का मुख्य वोट बैंक ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कोइरी) समीकरण रहा है। सम्राट चौधरी को सीएम बनाकर बीजेपी सीधे तौर पर नीतीश के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
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अनुभव: वे सबसे कम उम्र के मंत्री रहने के साथ-साथ संगठन और सरकार दोनों का लंबा अनुभव रखते हैं।
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अक्रामक तेवर: सम्राट की सबसे बड़ी खूबी उनकी आक्रामक राजनीति है। वे लालू यादव और नीतीश कुमार, दोनों के खिलाफ मजबूती से मोर्चा खोलते रहे हैं।

2. विजय सिन्हा: संघ के पसंदीदा और अनुभवी नेता
दूसरे नंबर पर नाम आता है विजय सिन्हा का। वे भी वर्तमान में डिप्टी सीएम हैं और भूमिहार समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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ताकत: विजय सिन्हा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का बहुत करीबी माना जाता है। वे पीएम मोदी और अमित शाह की गुड बुक में भी शामिल हैं।
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प्रशासनिक पकड़: विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और मंत्री के रूप में उनका कामकाज बहुत सराहनीय रहा है।
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चुनौती: बिहार की राजनीति पिछले 35 सालों से पिछड़ों के इर्द-गिर्द घूम रही है। ऐसे में एक सवर्ण (फॉरवर्ड) चेहरे को सीएम बनाना बीजेपी के लिए एक बड़ा प्रयोग होगा, जैसा उन्होंने यूपी में योगी आदित्यनाथ के साथ किया था।

3. विजय चौधरी: नीतीश कुमार के ‘हनुमान’
अगर जेडीयू की ओर से कोई सीएम बनता है, तो विजय चौधरी का नाम सबसे ऊपर है।
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विश्वसनीयता: इन्हें नीतीश कुमार का सबसे करीबी और ‘नंबर 2’ माना जाता है। वे हर मुश्किल वक्त में नीतीश के साथ खड़े रहे हैं।
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छवि: विजय चौधरी की छवि एक शांत और मृदुभाषी नेता की है। उन्हें प्रशासन चलाने का गहरा अनुभव है और वे सभी दलों में स्वीकार्य नेता माने जाते हैं।

4. नित्यानंद राय: बीजेपी का यादव चेहरा
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद नित्यानंद राय भी इस रेस में मजबूती से बने हुए हैं।
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समीकरण: बिहार में यादव वोटर सबसे निर्णायक भूमिका में होते हैं। नित्यानंद राय के जरिए बीजेपी राजद (RJD) के यादव वोट बैंक को तोड़ने की कोशिश कर सकती है।
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भूमिका: चुनाव के दौरान गठबंधन को संभालने और रणनीति बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है।

5. निशांत कुमार: नीतीश का नया उत्तराधिकारी?
एक चौंकाने वाली चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे निशांत कुमार को सौंप सकते हैं।
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बदलाव: निशांत अब तक राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में उनकी सक्रियता बढ़ी है। पार्टी के भीतर एकता बनाए रखने के लिए नीतीश उन पर दांव लगा सकते हैं।

बीजेपी का ‘सरप्राइज’ कार्ड?
बीजेपी की पुरानी कार्यशैली रही है कि वह अंतिम समय में किसी ऐसे नाम को सामने लाती है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती (जैसे मध्य प्रदेश में मोहन यादव या राजस्थान में भजनलाल शर्मा)।
बिहार में भी किसी अति पिछड़ा (EBC) या दलित चेहरे को आगे लाकर बीजेपी बड़ा राजनीतिक दांव खेल सकती है।
क्या है इस्तीफे की असली वजह?
सूत्रों की मानें तो यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। पिछले काफी समय से नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं हो रही थीं।
साथ ही, 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन (NDA) की शानदार जीत के बाद से ही बीजेपी के भीतर से यह मांग उठ रही थी कि अब बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री होना चाहिए।
एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जिसमें बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है।

सत्ता का नया फॉर्मूला क्या होगा?
राजनीतिक जानकारों के बीच दो तरह के फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है:
- मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा और जेडीयू के पास दो डिप्टी सीएम के पद रहेंगे।
- मुख्यमंत्री जेडीयू का ही रहे (नीतीश की पसंद का) और बीजेपी के पास पहले की तरह दो डिप्टी सीएम रहें।
हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पलड़ा बीजेपी के सीएम की ओर झुकता दिख रहा है।
बिहार में अब नीतीश युग का अंत हो रहा है, लेकिन आने वाला वक्त यह तय करेगा कि क्या बिहार अब ‘भगवा’ रंग में रंगेगा या जेडीयू अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब होगी।


