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प्रदूषण पर दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल: जब हालात इमरजेंसी जैसे, तो एयर प्यूरीफायर पर 18% GST क्यों?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Delhi Air Purifier GST: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि जब दिल्ली की हवा लगातार आपातकालीन स्तर पर पहुंच रही है, तो साफ हवा के लिए जरूरी एयर प्यूरीफायर पर 18% GST क्यों लगाया जा रहा है?

अदालत ने कहा कि अगर सरकार लोगों को स्वच्छ हवा नहीं दे पा रही है, तो कम से कम उन उपकरणों पर टैक्स कम करे जो लोगों को सांस लेने में मदद करते हैं।

कोर्ट का सवाल: “21,000 बार सांस लेते हैं, नुकसान की गणना करें”

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

पीठ ने कहा, “हर नागरिक को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार है। ऐसे में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम मानकर 18% जीएसटी लगाना उचित नहीं है।”

अदालत ने आगे कहा, “हम एक दिन में लगभग 21,000 बार सांस लेते हैं। इस जहरीली हवा से होने वाले नुकसान की गणना कीजिए।”

याचिका में एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में शामिल करने और जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब से गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है, तो एयर प्यूरीफायर लक्जरी नहीं बल्कि एक आवश्यकता बन जाता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए।

गडकरी ने स्वीकारा: 40% प्रदूषण परिवहन क्षेत्र से

इस बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदूषण का 40% हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है, जिसके वह स्वयं मंत्री हैं।

गडकरी ने कहा, “दिल्ली में दो-तीन दिन रहने पर मुझे भी इन्फेक्शन हो जाता है। हमें ईंधन पर निर्भरता कम करनी होगी। इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण कम होगा।”

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने गडकरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कम से कम एक नेता तो ऐसा है जो सच बोल रहा है। पिछले तीन महीनों में दिल्ली की लगभग 60% आबादी बीमार पड़ गई है।”

अदालत की मुख्य टिप्पणियां और सुझाव

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:

  1. मूलभूत कदम की बात: अदालत ने कहा कि जब सरकार स्वच्छ हवा देने में नाकाम है, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाना या टैक्स में छूट देना सबसे बुनियादी कदम हो सकता है।
  2. आपातकालीन प्रावधान पर सवाल: कोर्ट ने पूछा कि जब हालात एयर इमरजेंसी जैसे हैं, तो क्या किसी आपात प्रावधान के तहत अस्थायी रूप से एयर प्यूरीफायर को जीएसटी से छूट नहीं दी जा सकती?
  3. समयबद्ध राहत का सुझाव: पीठ ने सुझाव दिया कि 15 दिन या किसी तय अवधि के लिए ही सही, टैक्स राहत पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह सिर्फ लंबी तारीखें नहीं, बल्कि मौजूदा हालात में ठोस प्रस्ताव चाहती है।

केंद्र सरकार का रुख और अगली सुनवाई

लंच के बाद की सुनवाई में केंद्र सरकार के वकील ने जवाब दाखिल किया और कहा कि यह मामला जीएसटी काउंसिल का है, जिसमें सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सदस्य शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई भी निर्णय एक तय प्रक्रिया के तहत जीएसटी काउंसिल द्वारा ही लिया जाएगा।

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद नायर ने तर्क दिया कि 2020 की अधिसूचना के आधार पर एयर प्यूरीफायर को आसानी से मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है, जिससे इन पर 5% जीएसटी लागू हो सके।

अदालत ने कहा, “पहली नजर में हमें कोई कारण नहीं दिखता कि 2020 की अधिसूचना के आधार पर एयर प्यूरीफायर पर 5% जीएसटी क्यों नहीं दिया जा सकता।”

मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर के लिए तय की गई है, ताकि केंद्र सरकार यह पता लगा सके कि जीएसटी काउंसिल कितनी जल्दी बैठक बुला सकती है।

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