Deepinder Goyal Resignation: ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स की दिग्गज कंपनी जोमैटो (अब इटरनल) के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने 21 जनवरी को ग्रुप CEO के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।
उनकी जगह अब ब्लिंकिट के मौजूदा CEO अलबिंदर ढींडसा को ग्रुप की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।
Deepinder Goyal resigns as Eternal Group CEO; Albinder Dhindsa to succeed
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अलबिंदर ढींडसा ही क्यों?
दीपिंदर गोयल ने अलबिंदर पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनके काम करने की क्षमता और एग्जीक्यूशन का तरीका असाधारण है।
अलबिंदर ने ब्लिंकिट को घाटे से उबारकर सफलता के उस मुकाम पर पहुंचाया है जहां वह जोमैटो के कोर बिजनेस को टक्कर दे रही है।
अलबिंदर आईआईटी दिल्ली और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से शिक्षित हैं और जोमैटो के शुरुआती दिनों में इंटरनेशनल एक्सपेंशन हेड भी रह चुके हैं।

गोयल ने पद क्यों छोड़ा?
दीपिंदर गोयल ने स्पष्ट किया कि वे अब कुछ ऐसे ‘हाई-रिस्क’ आइडिया पर काम करना चाहते हैं जिनमें बहुत प्रयोग की आवश्यकता है।
एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी (शेयर बाजार में लिस्टेड) के CEO होने के नाते कई सीमाएं होती हैं।
गोयल अब स्पेस-टेक कंपनी ‘पिक्सेल’ में करीब ₹210 करोड़ का निवेश कर रहे हैं और ‘कंटिन्यू’ जैसे लंबी उम्र (longevity) और स्वास्थ्य से जुड़े वेंचर्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
An important update on leadership changes at Eternal. pic.twitter.com/CALn2QQFWE
— Deepinder Goyal (@deepigoyal) January 21, 2026
बोर्ड में क्या होगी भूमिका?
इस्तीफे का मतलब यह नहीं है कि गोयल कंपनी छोड़ रहे हैं।
वे कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में वाइस चेयरमैन के रूप में बने रहेंगे।
वे कंपनी के कल्चर, लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी और लीडरशिप डेवलपमेंट पर सलाह देते रहेंगे।
उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन के 18 साल इस कंपनी को दिए हैं, मेरा आर्थिक भविष्य अभी भी इटरनल से ही जुड़ा है।”

करोड़ों-अरबों रुपयों के शेयरों का हक छोड़ा
ESOPs की वापसी इस ट्रांजिशन की सबसे बड़ी बात गोयल का Financial sacrifice है।
उन्होंने अपने सभी अनवेस्टेड स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) कंपनी के पूल में वापस कर दिए हैं।
आसान भाषा में कहें तो, गोयल ने उन करोड़ों-अरबों रुपयों के शेयरों का हक छोड़ दिया है जो उन्हें भविष्य में मिलने वाले थे।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कंपनी नए टैलेंट को ये शेयर देकर प्रेरित कर सके और मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में कोई कमी (dilution) न आए।

क्या जोमैटो के कामकाज पर असर पड़ेगा?
दीपिंदर गोयल के अनुसार, इटरनल का ढांचा पहले से ही विकेंद्रीकृत (Decentralized) है।
इसका मतलब है कि जोमैटो और ब्लिंकिट जैसी कंपनियां पहले से ही अपने-अपने CEOs के नेतृत्व में स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं।
अलबिंदर के ग्रुप CEO बनने से ब्लिंकिट की ग्रोथ पर और अधिक ध्यान दिया जा सकेगा, जो फिलहाल ग्रुप की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।


