निशा राय, पिछले 12 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।
निशा दहिया की दर्दभरी हार
पेरिस ओलंपिक में रेसलर निशा दहिया की हार ने सभी भारतीय फैंस के दिलों को तोड़ दिया है। क्योंकि ये हार अभी भी सवालों के घेरे में है।
हार या साजिश
निशा खुद हारी ये उन्हें किसी साजिश के तहत हराया गया। ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा लेकिन निशा ने जो दर्द सहा उसकी गवाह पूरी दुनिया है।
5 जुलाई को हुआ था मुकाबला
दरअसल, 5 जुलाई को जब निशा महिलाओं की 68 किलोग्राम फ्रीस्टाइल रेसलिंग मैच के क्वार्टरफाइनल में नार्थ कोरिया की सोल गुम के खिलाफ उतरी।
मैच जीत रही थी निशा
उनका खेल देखकर सबको लग रहा था कि ये मुकाबला वहीं जीतेगीं। पहले राउंड शुरू होने से पहले ही निशा ने 4-0 से बढ़त बना ली थी।
खेल के दौरान हुईं घायल
लेकिन दूसरे राउंड में ऐसा लगा कि जैसे उनकी कोहनी या कंधे की हड्डी का जोड़ हट गया और वह हाथ पकड़कर दर्द से कराहने लगी।
हाथ पर पट्टी बांध कर लड़ीं
मगर निशा ने खेल रोका नहीं और लगातार लड़ती रही, इस दौरान उन्होंने 3 बार मेडिकल हेल्प भी ली। और हाथ पर पट्टी बांधकर लड़ने की कोशिश भी की।
आंखों से आंसू बनकर बहा दर्द
लेकिन ये कोशिश कामयाब नहीं हो पाई और आखिरकार निशा ये मुकाबला हार गई। मुकाबला हारने के बाद निशा अपने आंसू रोक नहीं पाईं और फूट-फूट कर रोने लगी।
टूट गया हौंसला
वहां मौजूद सभी लोग निशा को संभालने की कोशिश करते रहे लेकिन जीता हुआ मैच हार जाने की वजह से निशा का हौंसला टूट गया।
चेहरे पर दिखा दर्द
अपने दर्द से ज्यादा निशा को हार का गम था जो उनके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। निशा के सात-साथ सारा देश रो रहा था।
निशा के जज्बे को सलाम
ये तस्वीर किसी भी खेल प्रेमी का दिल तोड़ सकती है, लेकिन मैच हारने के बाद भी सारा देश निशा के जज्बें को सलाम कर रहा है और उनकी तारीफों के पुल बांध रहा है।