Saina Nehwal Retirement: भारतीय बैडमिंटन की पहचान और ओलिंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने आधिकारिक तौर पर पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास की घोषणा कर दी है।
पिछले तीन सालों से कोर्ट से दूर चल रही साइना ने आखिरकार स्वीकार किया कि उनके घुटने की स्थिति अब इस स्तर की ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धा का बोझ उठाने के लायक नहीं रही है।
एक हालिया पॉडकास्ट में साइना ने अपने इस फैसले के पीछे की वजह बताई।
Saina Nehwal, India’s Olympic bronze medallist and former world No.1️⃣, has called time on her competitive career after a persistent knee injury made it difficult to continue at the highest level 🏸#SainaNehwal #Indiansports #Badminton #Insidesport pic.twitter.com/Fg41SEvcKV
— InsideSport (@InsideSportIND) January 20, 2026
क्यों लिया संन्यास?
साइना ने बताया कि वे पिछले कुछ समय से आर्थराइटिस (गठिया) और घुटने की गंभीर समस्या से जूझ रही हैं।
साइना के मुताबिक, उनके घुटनों का कार्टिलेज (हड्डियों के बीच की कुशनिंग) पूरी तरह घिस चुका है।
साइना ने भावुक होते हुए कहा, “मैं पहले दिन में 8-9 घंटे कड़ी ट्रेनिंग करती थी, लेकिन अब मेरे घुटने महज 1-2 घंटे में ही जवाब दे देते हैं। अभ्यास के बाद सूजन आ जाती है, जिससे दर्द असहनीय हो जाता है। जब आप खेल ही नहीं पा रहे, तो वहीं रुक जाना बेहतर है। मैंने अपनी शर्तों पर खेलना शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही इसे छोड़ रही हूं।”
चोट और संघर्ष का सफर
साइना का करियर 2016 के रियो ओलिंपिक के दौरान लगी घुटने की चोट के बाद से उतार-चढ़ाव भरा रहा।
हालांकि, अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर शानदार वापसी की थी।
लेकिन समय के साथ उम्र और चोटों के प्रभाव ने उनकी स्पीड को धीमा कर दिया।
उन्होंने अपना आखिरी मैच 2023 के सिंगापुर ओपन में खेला था।
INDIA’S star shuttler Saina Nehwal has confirmed her retirement from competitive bedminton, bringing an end to a career that has inspired a generation of Indian athletes.
THANKYOU SANIA FOR MAKING INDIA PROUD 🙌🏻
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— Honey sain (@yougeshsain) January 20, 2026
ऐतिहासिक उपलब्धियों का रिकॉर्ड
2012 के लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर उन्होंने वह इतिहास रचा, जो उनसे पहले किसी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने नहीं किया था।
वे वर्ल्ड नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।
उनकी झोली में कॉमनवेल्थ गेम्स के कई गोल्ड मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप के पदक और अनगिनत सुपर सीरीज खिताब शामिल हैं।
2009 में अर्जुन अवॉर्ड और 2010 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) से उन्हें नवाजा गया।

साइना नेहवाल का संन्यास भले ही खेल प्रेमियों के लिए दुखद हो, लेकिन उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
पीवी सिंधु से लेकर लक्ष्य सेन तक, आज भारत बैडमिंटन में जो मुकाम देख रहा है, उसकी नींव साइना ने ही रखी थी।
कोर्ट पर उनकी आक्रामकता और कभी न हार मानने वाला जज्बा हमेशा याद रखा जाएगा।


