Homeस्पोर्ट्स'जब शरीर साथ न दे तो रुकना ही बेहतर', ओलिंपिक मेडल विजेता...

‘जब शरीर साथ न दे तो रुकना ही बेहतर’, ओलिंपिक मेडल विजेता साइना नेहवाल ने लिया संन्यास

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Saina Nehwal Retirement: भारतीय बैडमिंटन की पहचान और ओलिंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने आधिकारिक तौर पर पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास की घोषणा कर दी है।

पिछले तीन सालों से कोर्ट से दूर चल रही साइना ने आखिरकार स्वीकार किया कि उनके घुटने की स्थिति अब इस स्तर की ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धा का बोझ उठाने के लायक नहीं रही है।

एक हालिया पॉडकास्ट में साइना ने अपने इस फैसले के पीछे की वजह बताई।

क्यों लिया संन्यास?

साइना ने बताया कि वे पिछले कुछ समय से आर्थराइटिस (गठिया) और घुटने की गंभीर समस्या से जूझ रही हैं।

साइना के मुताबिक, उनके घुटनों का कार्टिलेज (हड्डियों के बीच की कुशनिंग) पूरी तरह घिस चुका है।

साइना ने भावुक होते हुए कहा, “मैं पहले दिन में 8-9 घंटे कड़ी ट्रेनिंग करती थी, लेकिन अब मेरे घुटने महज 1-2 घंटे में ही जवाब दे देते हैं। अभ्यास के बाद सूजन आ जाती है, जिससे दर्द असहनीय हो जाता है। जब आप खेल ही नहीं पा रहे, तो वहीं रुक जाना बेहतर है। मैंने अपनी शर्तों पर खेलना शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही इसे छोड़ रही हूं।”

चोट और संघर्ष का सफर

साइना का करियर 2016 के रियो ओलिंपिक के दौरान लगी घुटने की चोट के बाद से उतार-चढ़ाव भरा रहा।

हालांकि, अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर शानदार वापसी की थी।

लेकिन समय के साथ उम्र और चोटों के प्रभाव ने उनकी स्पीड को धीमा कर दिया।

उन्होंने अपना आखिरी मैच 2023 के सिंगापुर ओपन में खेला था।

ऐतिहासिक उपलब्धियों का रिकॉर्ड

2012 के लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर उन्होंने वह इतिहास रचा, जो उनसे पहले किसी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने नहीं किया था।

वे वर्ल्ड नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।

उनकी झोली में कॉमनवेल्थ गेम्स के कई गोल्ड मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप के पदक और अनगिनत सुपर सीरीज खिताब शामिल हैं।

2009 में अर्जुन अवॉर्ड और 2010 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) से उन्हें नवाजा गया।

Saina Nehwal, Saina Nehwal Retirement, Saina Nehwal Arthritis, Indian Badminton Star, Saina Nehwal Olympic Medal, Saina Nehwal Career, Saina Nehwal Achievements, Saina Nehwal post

साइना नेहवाल का संन्यास भले ही खेल प्रेमियों के लिए दुखद हो, लेकिन उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

पीवी सिंधु से लेकर लक्ष्य सेन तक, आज भारत बैडमिंटन में जो मुकाम देख रहा है, उसकी नींव साइना ने ही रखी थी।

कोर्ट पर उनकी आक्रामकता और कभी न हार मानने वाला जज्बा हमेशा याद रखा जाएगा।

- Advertisement -spot_img