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अंटार्कटिका के पेंगुइन का 20 साल पुराना वीडियो हुआ वायरल, लोग क्यों हो रहे हैं इमोशनल?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Penguin Viral Video: सोशल मीडिया की दुनिया में अक्सर मजेदार वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन इन दिनों अंटार्कटिका के एक पेंगुइन का वीडियो लोगों को इमोशनल (भावुक) कर रहा है।

सफेद बर्फ की चादर पर अकेला चलता यह पेंगुइन आज के युवाओं के लिए अकेलेपन और मानसिक संघर्ष का प्रतीक बन गया है।

जिसे इंटरनेट पर ‘निहलिस्ट पेंगुइन’ (Nihilist Penguin) कहा जा रहा है, जो असल में एक दुखद कहानी बयां करता है।

20 साल पुरानी डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा

यह वीडियो नया नहीं है बल्कि साल 2007 में आई मशहूर फिल्म निर्माता वर्नर हेर्जोग की डॉक्यूमेंट्री ‘एनकाउंटर्स एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड’ (Encounters at the End of the World) का एक हिस्सा है।

लगभग दो दशक पहले शूट किए गए इस फुटेज में एक एडेलि पेंगुइन (Adélie Penguin) को अपने झुंड का साथ छोड़कर विपरीत दिशा में, यानी बर्फीले पहाड़ों की ओर बढ़ते देखा जा सकता है।

यह रास्ता समुद्र से 70 किलोमीटर दूर है, जहां न भोजन है और न ही जीवन की कोई संभावना।

क्या है ‘डेथ मार्च’ और लोगों का जुड़ाव?

फिल्म निर्माता वर्नर हेर्जोग ने इस पेंगुइन के सफर को ‘डेथ मार्च’ का नाम दिया है।

डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि जबकि बाकी पेंगुइन समुद्र की ओर (भोजन की तलाश में) जा रहे हैं, यह अकेला पेंगुइन अंटार्कटिका के उन दुर्गम पहाड़ों की ओर बढ़ रहा है जहां उसकी मृत्यु निश्चित है।

आज की ‘रील जनरेशन’ इस वीडियो को अपनी जिंदगी के खालीपन और मानसिक स्वास्थ्य से जोड़कर देख रही है।

लोग हो रहे हैं इमोशनल

इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर लोग इस वीडियो के बैकग्राउंड में ‘द नाइट वी मेट’ या उदास हिंदी गाने लगाकर अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं।

कई यूजर्स का कहना है कि वे भी समाज की भीड़ से थक चुके हैं और इस पेंगुइन की तरह सब कुछ छोड़कर कहीं दूर निकल जाना चाहते हैं।

वैज्ञानिक कारण: आखिर क्यों भटक गया पेंगुइन?

सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘टूटे हुए दिल’ या ‘वैराग्य’ से जोड़ रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के पास इसके अलग तर्क हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पेंगुइन के इस तरह दिशा भटकने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • भ्रम या भटकाव (Disorientation): कभी-कभी पेंगुइन अपना दिशा-बोध खो देते हैं।

  • मानसिक असंतुलन: वैज्ञानिकों का मानना है कि पेंगुइन में भी मानसिक विकार हो सकते हैं, जिसके कारण वे आत्मघाती कदम उठाते हैं।

  • अनुभव की कमी: युवा पेंगुइन अक्सर रास्ता भटक जाते हैं।

एक सवाल जो अक्सर पूछा जाता है कि क्या इसे बचाया नहीं जा सकता था?

वर्नर हेर्जोग बताते हैं कि अगर इस पेंगुइन को पकड़कर वापस झुंड में छोड़ भी दिया जाए, तो भी वह मुड़कर वापस उन्हीं पहाड़ों की तरफ चलना शुरू कर देगा।

यह एक मानसिक स्थिति है जिसे बदला नहीं जा सकता।

राजनीतिक विवाद और मीम्स

इस वीडियो की चर्चा तब और बढ़ गई जब एक AI जनरेटेड तस्वीर इंटरनेट पर आई, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को इस पेंगुइन के साथ चलते दिखाया गया।

हालांकि, यह तस्वीर मजाक का पात्र बनी क्योंकि इसमें पेंगुइन को ग्रीनलैंड में दिखाया गया था, जबकि हकीकत यह है कि पेंगुइन केवल दक्षिणी गोलार्ध (अंटार्कटिका) में पाए जाते हैं, उत्तरी गोलार्ध (ग्रीनलैंड) में नहीं।

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पेंगुइन का यह वीडियो केवल एक जीव के भटकने की कहानी नहीं है, बल्कि यह आज के समाज के उस अकेलेपन को दर्शाता है जिसे लोग अक्सर शब्दों में बयां नहीं कर पाते।

चाहे वह ‘निहलिज्म’ हो या दिशाहीनता, इस छोटे से जीव ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जीवन में ‘सही दिशा’ का होना कितना जरूरी है।

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