Trump 500% Tariff on India: अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा तूफान आने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे विवादित और कड़े बिल को अपनी प्रारंभिक मंजूरी दे दी है, जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों विशेषकर भारत और चीन पर भारी आर्थिक दंड लगाने की वकालत करता है।
इस नए बिल, जिसका नाम ‘सेंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025’ है, के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को रोकने और रूस की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए अमेरिका अब ‘आर्थिक हथियार’ का इस्तेमाल कर रहा है।
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर एक द्विदलीय (Bipartisan) बिल तैयार किया है।
Trump greenlights Russian sanctions bill, says US Senator Graham, that paves way for 500% tariff on countries importing energy from Moscow.
The Senator points out that the bill will ‘incentivize’ China, India and Brazil to stop ‘buying the cheap Russian oil’ pic.twitter.com/mcZOyJJtcp
— Sidhant Sibal (@sidhant) January 8, 2026
इस बिल का तर्क है कि जो देश रूस से तेल खरीद रहे हैं, वे अनजाने में राष्ट्रपति पुतिन की ‘वार मशीन’ (युद्ध तंत्र) को फंडिंग कर रहे हैं।
लिंडसे ग्राहम ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद पुष्टि की कि ट्रंप इस बिल को संसद में पेश करने के पक्ष में हैं।
अगले हफ्ते अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में इस पर वोटिंग होने की संभावना है।

भारत पर इसका क्या असर होगा?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदता रहा है।
हालांकि, अमेरिका ने पहले ही रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा रखा है, जिससे भारत पर कुल टैरिफ का बोझ 50% तक पहुंच चुका है।
अगर यह नया बिल पास हो जाता है और 500% टैरिफ लागू होता है, तो भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले सामान (जैसे टेक्सटाइल, ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग गुड्स) इतने महंगे हो जाएंगे कि अमेरिकी बाजार में उनकी मांग खत्म हो सकती है।
यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा झटका होगा।

ट्रंप का रुख और पीएम मोदी का जिक्र
हाल ही में एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि वे भारत की व्यापार नीतियों और रूस के साथ संबंधों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उन्हें पता है कि मैं (व्यापारिक मोर्चे पर) खुश नहीं हूं। हमें अपने हितों की रक्षा करनी होगी और हम बहुत जल्द टैक्स बढ़ा सकते हैं।”
#WATCH | On India’s Russian oil imports, US President Donald J Trump says, “… They wanted to make me happy, basically… PM Modi’s a very good man. He’s a good guy. He knew I was not happy. It was important to make me happy. They do trade, and we can raise tariffs on them very… pic.twitter.com/OxOoj69sx3
— ANI (@ANI) January 5, 2026
भारत की जवाबी तैयारी और कूटनीति
इस संकट को देखते हुए भारतीय खेमे में भी हलचल तेज है।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने अमेरिकी प्रशासन और सीनेटरों से मुलाकात की है।
भारत ने अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि उसने रूस से तेल का आयात कम करना शुरू कर दिया है।
- आंकड़े बताते हैं: नवंबर में रूस से तेल आयात 17.7 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो दिसंबर में घटकर 12 लाख बैरल रह गया है।
- जनवरी में इसके और कम होकर 10 लाख बैरल से नीचे जाने की उम्मीद है।
- भारत चाहता है कि उस पर लगा मौजूदा 50% टैरिफ घटाकर 15% किया जाए, ताकि व्यापार सुचारू रूप से चल सके।

संसद में बिल की स्थिति
हैरानी की बात यह है कि इस बिल को अमेरिका में भारी जनसमर्थन और राजनीतिक समर्थन हासिल है।
सीनेटर ग्राहम के अनुसार, सीनेट के लगभग 80% से ज्यादा सांसद (85 को-स्पॉन्सर) इस बिल के पक्ष में हैं।
हालांकि, बिल में राष्ट्रपति को ‘प्रेसिडेंशियल वेवर’ (विशेष छूट) देने का अधिकार भी दिया गया है।
इसका मतलब है कि ट्रंप अपनी कूटनीति के हिसाब से किसी खास देश को इस भारी जुर्माने से छूट दे सकते हैं, बशर्ते वह देश अमेरिका की शर्तें मान ले।

कुलमिलाकर आने वाला हफ्ता भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बेहद निर्णायक होने वाला है।
अगर संसद में यह बिल भारी बहुमत से पास होता है, तो भारत को अपनी विदेश नीति और व्यापार नीति के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा।
क्या भारत रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद करेगा या ट्रंप अपनी ‘डील मेकिंग’ कला का इस्तेमाल कर भारत को कोई राहत देंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।


