Caste Census 2026 India: भारत में हर 10 साल पर होने वाली जनगणना (Census) इस बार एक नए रूप में सामने आएगी।
कोरोना महामारी के कारण 2021 में जो प्रक्रिया रुक गई थी, उसे लेकर गृह मंत्रालय ने अब अपना रोडमैप जारी कर दिया है।
यह न केवल एक गिनती है, बल्कि देश के भविष्य की योजनाओं को आकार देने वाला सबसे बड़ा डेटा संग्रह है।
1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली यह जनगणना ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी तरह से कागज रहित और डिजिटल होगी।

दो चरणों में संपन्न होगी प्रक्रिया
सरकार ने इस विशाल अभियान को दो मुख्य हिस्सों में बांटा है ताकि सटीकता बनी रहे:
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पहला चरण (अप्रैल से सितंबर 2026): इसे ‘हाउस लिस्टिंग’ या आवास गणना कहा जाता है। इसमें देश के हर कोने में मौजूद मकानों, दुकानों और व्यावसायिक इमारतों की मैपिंग की जाएगी। इसी दौरान यह भी देखा जाएगा कि देश के कितने नागरिक पक्के घरों में रह रहे हैं और कितनों के पास बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं।
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दूसरा चरण (फरवरी 2027): यह मुख्य ‘जनसंख्या गणना’ का चरण होगा। इसमें हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे शिक्षा, व्यवसाय, धर्म और पहली बार डिजिटल रूप से जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे।
The Central Government declares that the houselisting operations of the Census of India 2027 shall take place between 1st April, 2026 and 30th September, 2026 in all States and Union territories in India during the period of thirty days specified by each State and Union… pic.twitter.com/xObPO4zjOD
— ANI (@ANI) January 7, 2026
स्व-गणना (Self-Enumeration): आपका डेटा, आपकी जिम्मेदारी
डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सरकार ने पहली बार ‘स्व-गणना’ की सुविधा दी है।
इसका मतलब है कि आपको गणनाकर्मी का इंतज़ार करने की जरूरत नहीं है।
सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले एक पोर्टल खोला जाएगा, जहां आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं ही अपने परिवार का विवरण भर सकेंगे।
इसके बाद गणनाकर्मी केवल आपके द्वारा दी गई जानकारी को वेरिफाई करने और छूटे हुए विवरण को ऐप में दर्ज करने आपके घर आएंगे।

95 साल बाद जातिगत आंकड़ों का डिजिटल संग्रह
इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सामाजिक-आर्थिक पहलू है।
1931 के बाद पहली बार देश में व्यापक स्तर पर जातिगत आंकड़े जुटाए जाने की तैयारी है।
हालांकि समय-समय पर इसके लिए मांग उठती रही है, लेकिन इस बार इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम (Android और iOS ऐप) से रिकॉर्ड किया जाएगा।
इससे सामाजिक न्याय की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
Notification for the Phase I of Census of India 2027 i.e. Houselisting & Housing Census (HLO) has been issued.
Houselisting operations will be conducted between 1 April 2026 and 30 September 2026 across all States and Union Territories, during a 30-day period specified by each… pic.twitter.com/Z7m9j7IaFL
— Census India 2027 (@CensusIndia2027) January 7, 2026
क्या-क्या दर्ज किया जाएगा?
इस बार की जनगणना केवल सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह आपके जीवन स्तर का आईना होगी। गणनाकर्मी आपसे निम्नलिखित जानकारियां ले सकते हैं:
- आवास की स्थिति: घर कच्चा है या पक्का, शौचालय की सुविधा, पीने के पानी का स्रोत।
- संपत्ति और सुविधाएं: घर में टीवी, फ्रिज, स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्शन और वाहनों (दोपहिया/चार पहिया) की उपलब्धता।
- ईंधन: खाना पकाने के लिए एलपीजी, बिजली या अन्य माध्यमों का उपयोग।

तकनीक और सुरक्षा का संगम
इस कार्य के लिए लगभग 30 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
सारा डेटा कागज पर लिखने के बजाय सीधे सुरक्षित सर्वर पर अपलोड होगा।
इससे आंकड़ों के हेरफेर या मानवीय त्रुटि की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
साथ ही, डेटा की गोपनीयता का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
2011 में भारत की आबादी 121 करोड़ थी, और अब 15 साल बाद होने जा रही इस गणना से हमें पता चलेगा कि हम एक राष्ट्र के रूप में कहां खड़े हैं।
यह जनगणना न केवल संसाधनों के सही बंटवारे में मदद करेगी, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सटीक नीति निर्धारण का आधार बनेगी।


