BJP National President Election: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए बिगुल फूंक दिया है।
पार्टी के केंद्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।
यह चुनाव जेपी नड्डा के लंबे और सफल कार्यकाल के समाप्त होने के बाद आयोजित किए जा रहे हैं।
चुनावी कार्यक्रम का पूरा विवरण
जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी 2026 से शुरू होगी।
इसी दिन उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।
अगले दिन, यानी 20 जनवरी को परिणामों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
इस प्रक्रिया के दौरान बीजेपी के शीर्ष नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के मौजूद रहने की संभावना है।
भारतीय जनता पार्टी के ‘संगठन पर्व’ के अंतर्गत राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण जी द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा।
निर्वाचन की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होकर 20 जनवरी 2026 तक पूर्ण होगी। pic.twitter.com/okmljzwzED
— BJP (@BJP4India) January 16, 2026
नितिन नबीन सबसे आगे
इस बार अध्यक्ष पद के लिए नितिन नबीन का नाम सबसे तेजी से उभरकर सामने आया है।
वर्तमान में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत नितिन नबीन के निर्विरोध चुने जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
अगर वे अध्यक्ष बनते हैं, तो वे महज 46 वर्ष की आयु में बीजेपी के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे।

यह पार्टी के भीतर ‘पीढ़ीगत बदलाव’ और युवा नेतृत्व को तरजीह देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव कैसे होता है?
बीजेपी का चुनावी ढांचा काफी व्यवस्थित और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर आधारित है।
पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले देश के कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में संगठनात्मक चुनाव संपन्न होना अनिवार्य है।
प्रक्रिया मंडल स्तर से शुरू होकर जिला और फिर प्रदेश स्तर तक पहुंचती है।
-
योग्यता: अध्यक्ष बनने के लिए व्यक्ति को कम से कम 15 वर्षों तक पार्टी का प्राथमिक सदस्य होना चाहिए। साथ ही, उसके पास चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्यता का अनुभव होना जरूरी है।
-
प्रस्ताव: उम्मीदवार का नाम कम से कम पांच अलग-अलग राज्यों की राष्ट्रीय परिषद इकाइयों द्वारा प्रस्तावित किया जाना चाहिए।
-
सहमति और चयन: आमतौर पर बीजेपी में ‘सर्वसम्मति’ की परंपरा रही है। वरिष्ठ नेताओं और आरएसएस के साथ विचार-विमर्श के बाद एक नाम पर सहमति बनाई जाती है, ताकि चुनाव निर्विरोध संपन्न हो सके।

RSS और बीजेपी का तालमेल
भले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का नाम बीजेपी के संविधान में चुनावी प्रक्रिया के लिए दर्ज न हो, लेकिन व्यवहारिक रूप से संघ की राय सर्वोपरि होती है।
वैचारिक मार्गदर्शन और संगठन मंत्री की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में आरएसएस की भूमिका अहम रहती है।
अध्यक्ष के चयन में भी संघ और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच गहन मंथन होता है।


