Why Eat Dates in Ramadan: रमजान का पवित्र महीना इबादत और संयम का समय होता है।
साल 2026 में भी दुनिया भर के मुसलमान पूरे जोश के साथ रोजे रख रहे हैं।
सुबह सहरी से लेकर शाम को सूरज ढलने तक बिना कुछ खाए-पिए रहना एक बड़ी इबादत है।
लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि शाम को जब इफ्तार का वक्त होता है, तो सबसे पहले खजूर (Dates) ही क्यों खाया जाता है?

यह सिर्फ एक रिवाज नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक आस्था और विज्ञान का तालमेल है।
धार्मिक महत्व: सुन्नत और बरकत
इस्लाम में खजूर को एक ‘मुबारक’ यानी बेहद शुभ फल माना गया है।
खजूर से रोजा खोलना ‘सुन्नत’ है, जिसका अर्थ है कि यह पैगंबर हजरत मोहम्मद (PBUH) की पसंदीदा आदतों में से एक था।
वे हमेशा खजूर से ही अपना रोजा खोलते थे।
मान्यता है कि खजूर खाकर रोजा खोलने से इबादत का फल और बढ़ जाता है और घर में बरकत आती है।
अगर किसी के पास खजूर न हो, तो पानी से रोजा खोलने की सलाह दी जाती है।

विज्ञान का नजरिया: एनर्जी का ‘पावर बैंक’
करीब 14-15 घंटे के लंबे उपवास के बाद शरीर की ऊर्जा (Energy) काफी कम हो जाती है।
विज्ञान कहता है कि खाली पेट अचानक भारी या मसालेदार खाना खाने से पेट खराब हो सकता है।
ऐसे में खजूर किसी ‘जादू’ की तरह काम करता है:
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इंस्टेंट एनर्जी: खजूर में मौजूद नेचुरल शुगर (ग्लूकोज और फ्रुक्टोज) शरीर के ब्लड शुगर लेवल को तुरंत बढ़ाकर सुस्ती दूर करते हैं।
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पाचन में मदद: इसमें फाइबर भरपूर होता है, जो पेट को भारी भोजन पचाने के लिए तैयार करता है और कब्ज से बचाता है।
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पोषक तत्वों का खजाना: खजूर में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो मांसपेशियों की कमजोरी और सिरदर्द जैसी समस्याओं को मिनटों में ठीक कर देते हैं।

कुल मिलाकर, खजूर न केवल हमारी परंपरा का हिस्सा है, बल्कि यह हमारे शरीर को फिर से तरोताजा करने का सबसे सही तरीका भी है।


