MP Assembly Budget Session: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का छठा दिन हंगामे और तीखी नोकझोंक के नाम रहा।
एक तरफ जहां कांग्रेस विधायकों ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया, वहीं सदन के भीतर ‘लाड़ली बहना योजना’ के भविष्य और नए रजिस्ट्रेशन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त बहस हुई।
आखिराकर सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
मध्यप्रदेश विधानसभा, बजट सत्र – 06 दिन
विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक दल के साथ मिलकर इंडिया –यूएस ट्रेड डील से किसानों को होने वाले नुकसान और अन्याय के विरोध में जोरदार सांकेतिक प्रदर्शन किया।
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— Umang Singhar (@UmangSinghar) February 23, 2026
अनोखा प्रदर्शन और विदेशी एग्रीमेंट का विरोध
कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले, विधानसभा परिसर के बाहर कांग्रेस विधायकों ने इंडिया-यूएस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
कुछ विधायक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखौटे पहनकर पहुंचे थे।
उनका तर्क था कि इस समझौते से स्थानीय हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
मध्यप्रदेश विधानसभा, बजट सत्र – 06 दिन
स्मार्ट मीटर की डील किसके हित में है जनता के या अडानी ग्रुप जैसे बड़े उद्योगपतियों के?
प्रदेश में बिजली सरप्लस के दावे हैं, फिर आम उपभोक्ता को सस्ती बिजली क्यों नहीं मिल रही?
सरकार स्मार्ट मीटर की पूरी डील सार्वजनिक करे, ठेकेदार… pic.twitter.com/WBgfNMcRMR
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लाड़ली बहना योजना पर घमासान
सदन के भीतर सबसे बड़ा मुद्दा ‘लाड़ली बहना योजना’ के नए रजिस्ट्रेशन का रहा।
कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सीधा सवाल दागा कि जो पात्र महिलाएं अभी तक इस योजना से नहीं जुड़ पाई हैं, उनका पंजीकरण आखिर कब शुरू होगा?
इस सवाल पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में 60 वर्ष से अधिक की महिलाओं को अन्य पात्रता योजनाओं का लाभ मिल रहा है, लेकिन नए रजिस्ट्रेशन के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की जा सकती।
इस जवाब ने विपक्ष को नाराज कर दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मोर्चा संभालते हुए सरकार से तारीख बताने की मांग की।
मध्यप्रदेश विधानसभा, बजट सत्र – 06 दिन
विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक दल के साथ इंडिया–यूएस ट्रेड डील से किसानों को होने वाले नुकसान और अन्याय के विरोध में गांधी प्रतिमा के सामने जोरदार सांकेतिक प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन केवल विरोध नहीं, बल्कि देश के अन्नदाताओं के अधिकार,… pic.twitter.com/C6zYlGmdiv
— Umang Singhar (@UmangSinghar) February 23, 2026
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और वॉकआउट
जब बहस बढ़ी तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद कमान संभाली।
उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले दावा करती थी कि यह योजना सिर्फ चुनावों तक है, लेकिन सरकार इसे पिछले ढाई साल से सफलतापूर्वक चला रही है।
सीएम ने भरोसा दिलाया कि “धीरे-धीरे सब होगा” और सरकार अपने वादे के मुताबिक राशि को ₹3000 तक ले जाएगी।
हालांकि, ‘धीरे-धीरे’ वाले जवाब से सिंघार संतुष्ट नहीं हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाब देने से बच रही है और अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है।
इसके बाद पूरी कांग्रेस पार्टी नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गई।
मेडिकल छात्रा की मौत और सुरक्षा का मुद्दा
सदन में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) की एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला भी गूंजा।
कांग्रेस विधायक सेना महेश पटेल ने इस पर सरकार से जवाब मांगा।
राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का लग रहा है।
कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और छात्रा के पास से एक सुसाइड नोट जैसी जानकारी मिली है, जिसमें पढ़ाई का दबाव और समझ न आने की बात कही गई है।
घटनास्थल से फिनायल की बोतल भी बरामद हुई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पोस्टमॉर्टम पांच डॉक्टरों के पैनल ने किया है और जांच जारी है।
कांग्रेस दफ्तरों पर हुए हमलों पर सवाल
हाल ही में कांग्रेस दफ्तरों पर हुए हमलों को लेकर कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार को घेरा।
इस पर भाजपा विधायक अभिलाष पांडे और पंकज उपाध्याय के बीच तीखी बहस हो गई।
माहौल इतना गरमा गया कि संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को हस्तक्षेप करना पड़ा।
उन्होंने कांग्रेस के पुराने प्रदर्शनों का हवाला देकर तंज कसा।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बार-बार शांत रहने की अपील की ताकि अन्य महत्वपूर्ण विषयों (ध्यानाकर्षण प्रस्तावों) पर चर्चा की जा सके।


