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गौ हत्या से ध्यान बंटाने की साजिश, बच्चे हमारे गुरुकुल के नहीं- यौन शोषण मामले में बोले अविमुक्तेश्वरानंद

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Shankaracharya Sexual Harassment Case: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों एक गंभीर विवाद में फंसे हुए हैं।

प्रयागराज की एक अदालत के आदेश पर उन पर बच्चों के यौन शोषण जैसे संगीन आरोप लगे हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश की सियासत और संत समाज में हड़कंप मच गया है।

सोमवार को इस मामले में नया मोड़ तब आया जब प्रयागराज पुलिस की एक विशेष टीम जांच के लिए वाराणसी रवाना हो गई।

शंकराचार्य बोले: ‘मैं अपराधी नहीं जो डरूं’

सोमवार सुबह वाराणसी स्थित अपने आश्रम में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

उनके चेहरे पर न तो कोई शिकन थी और न ही डर।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं। मैं यहीं अपने आश्रम में हूं। पुलिस को जो भी पूछना है, आकर पूछ ले, मैं जांच में पूरा सहयोग करूंगा।”

उन्होंने इस पूरे मामले को एक राजनीतिक साजिश करार दिया।

शंकराचार्य ने कहा- यह सरकार चाहती है कि हम धर्मगुरु और सरकार दोनों बनें।

देश में 4 शंकराचार्य हैं जिन्होंने हमेशा सनातन धर्म की रक्षा की है। अब उन्होंने उन पर हमला करना शुरू कर दिया है।

हम लंबे समय से ‘गौ माता’ को राष्ट्रमाता घोषित करने और गोहत्या बंद करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं।

ये लोग जनता का ध्यान किसी और चीज़ पर भटकाना चाहते हैं। देश की जनता चाहती है कि गाय माता की रक्षा हो।

उनके मुताबिक, योगी सरकार उनकी इस आवाज को दबाना चाहती है क्योंकि वे सरकार की नीतियों के खिलाफ खड़े हैं।

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि एक ‘हिस्ट्रीशीटर’ व्यक्ति को मोहरा बनाकर उन पर यह झूठे इल्जाम लगाए गए हैं।

जांच पर उठाए सवाल

अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिन बच्चों की बात की जा रही है, उनका उनके गुरुकुल से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि बच्चों की मार्कशीट से पता चला है कि वे हरदोई के किसी स्कूल के छात्र हैं और उनका पंजीकरण कभी उनके मठ या स्कूल में नहीं हुआ।

उन्होंने यह भी पूछा कि अगर बच्चों के साथ कुछ गलत हुआ है, तो अभी तक जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उन्हें अपनी सुरक्षा में क्यों नहीं लिया?

एक अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति बच्चों का अभिभावक बनकर कैसे घूम रहा है?

यूपी पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं

वाराणसी आश्रम में सोमवार को वकीलों की फौज जुटी रही।

हालांकि शंकराचार्य ने कहा कि वे कानूनी दांव-पेंच में ज्यादा दिमाग नहीं लगाना चाहते और अपना ध्यान गौ सेवा पर रखना चाहते हैं, लेकिन उनके कानूनी सलाहकार हाईकोर्ट में गिरफ्तारी पर रोक (Stay) के लिए अर्जी दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद ने जनता के हवाले से कहा कि लोगों को यूपी पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है क्योंकि यहां बीजेपी की सरकार है।

उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच किसी ऐसे राज्य की पुलिस से कराई जाए जहां गैर-बीजेपी सरकार हो।

तीन अदालतों का भरोसा

शंकराचार्य ने आखिर में भावुक होते हुए कहा कि उनके लिए तीन अदालतें मायने रखती हैं पहली ‘जनता’ जो सब देख रही है, दूसरी उनका ‘अंतर्मन’ जो जानता है कि वे निर्दोष हैं, और तीसरी ‘ईश्वर’ की अदालत जहां से उन्हें न्याय की पूरी उम्मीद है।

उन्होंने रामायण के ‘कालनेमि’ राक्षस का उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग साधु का वेश धरकर छल कर रहे हैं, उनका अंत रावण की तरह ही होगा।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज नामक व्यक्ति की शिकायत से हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेला 2024-25 और महाकुंभ के दौरान शंकराचार्य के शिविर में बच्चों का यौन शोषण किया गया।

शिकायतकर्ता ने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो (POCSO) कोर्ट में दो बच्चों को पेश किया, जिनके बयान बंद कमरे में दर्ज किए गए।

कोर्ट के कड़े रुख के बाद शनिवार देर रात झूंसी थाने में अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

संत समाज में मतभेद

इस मामले ने साधु-संतों को दो गुटों में बांट दिया है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी का कहना है कि मामला जांच का है और सच सामने आना चाहिए।

वहीं, कुछ संतों जैसे जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

दूसरी ओर, किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना गिरी ने इसे सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताया और शिकायतकर्ता की नीयत पर सवाल उठाए।

पुलिस की कार्रवाई और सीन रिक्रिएशन

प्रयागराज पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है।

रविवार को पुलिस की टीम शिकायतकर्ता के साथ माघ मेला क्षेत्र पहुंची।

वहां उस जगह का बारीकी से निरीक्षण किया गया जहां शंकराचार्य का शिविर लगा था।

पुलिस ने शिविर के एंट्री और एग्जिट गेट, पीछे के रास्ते और आसपास के रास्तों का नक्शा तैयार किया है।

सूत्रों की मानें तो पुलिस वाराणसी में शंकराचार्य से आमने-सामने पूछताछ कर सकती है और सबूतों के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी संभव है।

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