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भूतड़ी अमावस्या 2026: जानें क्यों खास है चैत्र अमावस्या, पितृ दोष मुक्ति के अचूक उपाय

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhootadi Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का अपना एक अलग ही आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है।

लेकिन जब बात चैत्र महीने की अमावस्या की आती है, तो इसे लोक परंपराओं में ‘भूतड़ी अमावस्या’ के नाम से पुकारा जाता है।

साल 2026 में यह तिथि 18 और 19 मार्च को पड़ रही है।

यह दिन न केवल पूर्वजों (पितरों) को याद करने का है, बल्कि खुद को और अपने घर को नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित करने का भी एक बड़ा अवसर है।

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तिथि और शुभ मुहूर्त: कब है अमावस्या?

पंचांग के अनुसार, चैत्र अमावस्या की शुरुआत 18 मार्च 2026 को सुबह 08:25 बजे से होगी, जो अगले दिन यानी 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी।

  • पितृ पूजन और तर्पण: इसके लिए 18 मार्च का दिन सबसे उपयुक्त है।
  • स्नान और दान: 19 मार्च की सुबह सूर्योदय के समय पवित्र नदियों में स्नान और दान करना शुभ रहेगा।
  • नवरात्रि की शुरुआत: 19 मार्च से ही मां दुर्गा की आराधना का महापर्व ‘चैत्र नवरात्रि’ शुरू हो जाएगा।

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इसे ‘भूतड़ी अमावस्या’ क्यों कहते हैं?

नाम सुनकर भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे गहरी मान्यताएं छिपी हैं।

पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मांड में अदृश्य और सूक्ष्म शक्तियां काफी सक्रिय हो जाती हैं।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन पितृ लोक के द्वार खुलते हैं और हमारे पूर्वज हमें आशीर्वाद देने धरती पर आते हैं।

चूंकि पितरों के साथ-साथ कुछ नकारात्मक या तामसिक ऊर्जाएं भी सक्रिय हो जाती हैं, इसलिए इस दिन को ‘भूतड़ी अमावस्या’ कहा जाता है।

यह नाम दरअसल एक चेतावनी है कि हम अपनी आध्यात्मिक सुरक्षा करें और मन को सात्विक रखें।

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पितृ दोष से मुक्ति के अचूक उपाय

यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है या परिवार में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो इस दिन ये उपाय जरूर करें:

  1. धूप-ध्यान: दोपहर 12 बजे के करीब घर में कंडे (उपले) जलाकर उस पर गुड़ और घी की आहुति दें।
  2. तर्पण: हथेली में जल और काले तिल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को जल अर्पित करें।
  3. सात्विकता: इस दिन पूरी तरह सात्विक भोजन करें और किसी भी प्रकार के विवाद से बचें।

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नकारात्मक ऊर्जा को घर से कैसे भगाएं?

भूतड़ी अमावस्या पर वातावरण में भारीपन महसूस हो सकता है। इससे बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र कुछ सरल तरीके बताता है:

  • हनुमान चालीसा का पाठ: हनुमान जी संकटमोचन हैं। इस दिन उनका पाठ करने से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं।
  • लोबान और गुग्गल: घर के हर कोने में लोबान या गुग्गल की धूनी दें। इसकी सुगंध से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
  • शिव आराधना: भगवान शिव ‘भूतभावन’ हैं। उनके मंत्रों का जाप करने से मन शांत रहता है और सुरक्षा कवच बनता है।

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स्नान-दान का फल

मान्यता है कि इस दिन पानी में काले तिल डालकर नहाने से शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं।

स्नान के बाद जरूरतमंदों को अनाज, काले तिल, जूते या गरम कपड़ों का दान करने से शनि दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

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