Bhojtal Encroachment: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पहचान और यहां की ‘लाइफ लाइन’ कहे जाने वाले बड़े तालाब (भोजताल) के अस्तित्व पर मंडराते खतरों को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली है।
पिछले कई सालों से तालाब के कैचमेंट एरिया और एफटीएल (Full Tank Level) के पास बढ़ते अतिक्रमण को लेकर चिंता जताई जा रही थी, जिस पर अब प्रशासन का ‘हथौड़ा’ चलने को तैयार है।
सीमांकन और लाल निशान का खेल
पिछले महीने जिला प्रशासन के निर्देश पर संत हिरदाराम नगर और टीटी नगर वृत्त के राजस्व अमले ने संयुक्त रूप से सीमांकन की कार्रवाई शुरू की थी।
इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य तालाब की सीमाओं को स्पष्ट करना और एफटीएल से 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में हुए अवैध निर्माणों की पहचान करना था।
जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
वीआईपी रोड से लेकर खानूगांव और सूरज नगर तक, करीब 300 से अधिक ऐसी संपत्तियां मिली हैं जो नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई हैं।
इनमें आलीशान कोठियां, रसूखदारों के बंगले, बड़े होटल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउस शामिल हैं। राजस्व विभाग की टीम ने इन सभी संदिग्ध निर्माणों पर ‘लाल निशान’ लगा दिए हैं।
कहां-कहां मिले अवैध निर्माण?
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, अतिक्रमण के मामले दो मुख्य हिस्सों में बंटे हैं:
संत हिरदाराम नगर:
यहाँ वीआईपी रोड, खानूगांव, हलालपुर, बोरवन और बेहटा जैसे इलाकों में सघन जांच की गई।
इस क्षेत्र में मैरिज गार्डन, कोचिंग सेंटर, डेयरी, स्टील फैक्ट्री और करीब 150 झुग्गियां तालाब की जद में पाई गई हैं।
यहां तक कि कुछ सरकारी इमारतें और आर्मी का खेल परिसर भी इस जांच के दायरे में आए हैं।
टीटी नगर चौराहा:
इस क्षेत्र में प्रेमपुरा, सूरज नगर, गौरा, सेवनियां गौड़ और बिशनखेड़ी जैसे वीआईपी इलाके शामिल हैं।
यहां रसूखदारों के आलीशान बंगले, लग्जरी फार्म हाउस और तालाब किनारे बने रेस्टोरेंट्स ने तालाब की सीमा का उल्लंघन किया है।
नोटिस की मियाद खत्म, अब एक्शन की बारी
प्रशासन ने इन सभी निर्माणकर्ताओं को पहले ही नोटिस जारी कर दिया था और उन्हें निर्माण से संबंधित वैध दस्तावेज (जैसे टीएंडसीपी की अनुमति और नगर निगम की परमिशन) पेश करने का पर्याप्त समय दिया था।
सूत्रों की मानें तो अधिकांश निर्माणकर्ता अपनी वैधता साबित करने वाले दस्तावेज पेश करने में नाकाम रहे हैं।
अब तहसीलदारों ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे एसडीएम के माध्यम से कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के सामने पेश किया जाएगा।
हाल ही में हुई समय सीमा (TL) बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि तालाब के संरक्षण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
रिपोर्ट पर अंतिम मुहर लगते ही नगर निगम और पुलिस बल की मदद से इन अवैध ढांचों को ढहाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
प्रशासन की इस सख्ती से रसूखदारों और भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
