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दतिया में सियासी भूचाल: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की जेल, क्या जाएगी विधायकी?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Datia MLA Rajendra Bharti: मध्यप्रदेश के दतिया जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है।

कांग्रेस के कद्दावर नेता और दतिया से वर्तमान विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 3 साल की सजा सुनाई है।

यह फैसला बैंक एफडी (FD) घोटाले से जुड़े एक आपराधिक मामले में आया है।

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को सुनाए गए इस फैसले के बाद अब भारती की विधानसभा सदस्यता पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

क्या था 25 साल पुराना एफडी घोटाला?

मामला अगस्त 1998 का है, उस समय राजेंद्र भारती की माताजी, सावित्री श्याम ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एक एफडी (Fixed Deposit) कराई थी।

यह एफडी ‘श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामुदायिक विकास संस्थान’ के नाम पर थी।

उस दौर में बैंक इस एफडी पर 13.5% का भारी-भरकम ब्याज दे रहा था।

नियम के मुताबिक यह एफडी केवल 3 साल के लिए थी।

लेकिन पेंच यहाँ फंसा कि उस समय राजेंद्र भारती खुद उसी बैंक के अध्यक्ष (Chairman) थे और जिस संस्था के नाम पर पैसा जमा था, उसके ट्रस्टी भी वही थे।

धोखाधड़ी का आरोप: कैसे बढ़ाया गया समय?

आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक के एक क्लर्क रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेराफेरी की।

जो एफडी 3 साल में खत्म हो जानी चाहिए थी, उसे कागजों में पहले 10 साल और फिर 15 साल तक बढ़ा दिया गया।

ऐसा इसलिए किया गया ताकि 13.5% की ऊंची ब्याज दर का फायदा सालों-साल उठाया जा सके।

इस हेराफेरी की वजह से बैंक को लाखों रुपए का चूना लगा।

साल 1999 से 2011 के बीच हर साल करीब 1.35 लाख रुपए का ब्याज अवैध तरीके से निकाला जाता रहा।

जब भारती पद से हटे और बैंक का ऑडिट हुआ, तब जाकर यह ‘ब्याज का खेल’ दुनिया के सामने आया।

अदालत का फैसला और सदस्यता पर संकट

दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष MP-MLA कोर्ट ने भारती को धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया है।

कोर्ट ने उन्हें अलग-अलग धाराओं में 3 साल की सजा सुनाई है।

हालांकि, सजा सुनाने के तुरंत बाद उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए जमानत भी दे दी गई है।

क्या विधायकी जाएगी?

भारत के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act) के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है।

राजेंद्र भारती के पास अब केवल 60 दिन का समय है। अगर वे इस अवधि के भीतर हाईकोर्ट से अपनी सजा पर ‘स्टे’ (स्थगन) ले आते हैं, तभी उनकी सदस्यता बच पाएगी।

अगर स्टे नहीं मिला, तो विधानसभा सचिवालय उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर देगा और दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन जाएगी।

नरोत्तम मिश्रा को हराने का  इतिहास

राजेंद्र भारती मध्यप्रदेश की राजनीति का वो चेहरा हैं जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर किया था।

उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता और तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराकर सुर्खियां बटोरी थीं।

इससे पहले नरोत्तम मिश्रा ने भारती को लगातार तीन बार हराया था, लेकिन चौथी बार में भारती ने बाजी पलट दी थी।

अब सजा मिलने के बाद दतिया की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

राजेंद्र भारती के लिए कानूनी लड़ाई अब और कठिन हो गई है। जहाँ एक तरफ उनके वकील हाईकोर्ट में अपील की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत बता रहे हैं।

आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि दतिया का प्रतिनिधित्व भारती ही करेंगे या वहां की जनता को नए विधायक के लिए फिर से मतदान करना होगा।

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