Trump 100% Pharma Tariff: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने दुनियाभर के व्यापार जगत में खलबली मचा दी है।
ट्रंप प्रशासन ने विदेशों से आने वाली दवाओं (खासकर पेटेंट वाली दवाओं) पर 100 प्रतिशत टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया है।
इसके पीछे ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका को अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
दवाओं पर 100% टैरिफ
गुरुवार, 2 अप्रैल को व्हाइट हाउस से जारी आदेश के अनुसार, अमेरिका अब उन दवाओं के आयात पर दोगुना टैक्स वसूलेगा जो पेटेंटेड हैं।

इसका मतलब है कि अगर कोई कंपनी अपनी पेटेंट वाली दवा अमेरिका में बेचना चाहती है, तो उसे भारी भरकम टैक्स देना होगा।
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इसमें एक ‘रास्ता’ भी छोड़ा है।
अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिकी सरकार के साथ ‘रीशोरिंग समझौता’ (Reshoring Agreement) करती हैं या ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) के तहत कीमतों को लेकर कोई डील करती हैं, तो उन्हें इस टैक्स से छूट मिल सकती है।
‘रीशोरिंग’ का सरल मतलब है अपनी फैक्ट्री या मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को वापस अमेरिका की धरती पर लगाना।
🚨 BREAKING: President Trump has just slapped a whopping 100% PERCENT TARIFF on Big Pharma drugs who refused to give Americans lower Most Favored Nations pricing
One way to lower their tariffs is to ONSHORE PRODUCTION to the USA! 🔥
Another win from President Trump 🇺🇸 pic.twitter.com/HeQSTbi90e
— Eric Daugherty (@EricLDaugh) April 2, 2026
भारत पर क्या होगा असर?
भारतीय दवा कंपनियां अमेरिका को बड़े पैमाने पर दवाएं निर्यात करती हैं।
ट्रंप के इस फैसले से उन भारतीय कंपनियों को झटका लगेगा जो पेटेंट वाली दवाएं अमेरिका भेजती हैं।
व्हाइट हाउस के अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग के साथ रीशोरिंग समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, उन्हें 100% टैरिफ देना ही होगा।
राहत की बात:
भारतीय निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा ‘जेनेरिक दवाओं’ का है।
फिलहाल, जेनेरिक दवाओं को इस टैरिफ से बाहर रखा गया है।
लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह राहत स्थायी नहीं है।
अगर जेनेरिक दवा कंपनियां जल्द ही अपना उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट नहीं करती हैं, तो भविष्य में उन पर भी टैक्स लग सकता है।
US President Donald Trump has announced 100% tariffs on imported brand-name drugs, introducing a major shift in trade policy. #TheSentinel #Trump #Manufacturers pic.twitter.com/COoBCSCzIg
— The Sentinel (@Sentinel_Assam) April 3, 2026
मेटल कारोबारियों को बड़ी राहत
एक तरफ जहां दवाओं पर सख्ती बढ़ी है, वहीं ट्रंप ने मेटल्स (धातुओं) के क्षेत्र में नियमों को थोड़ा सरल बनाने की कोशिश की है।
स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर के आयात पर भारी टैक्स तो बरकरार है (ताकि घरेलू उत्पादन बढ़े), लेकिन गणना के तरीके बदल दिए गए हैं:
- 15% से कम वजन: अगर किसी उत्पाद में धातु का वजन 15% से कम है, तो उस पर कोई अतिरिक्त मेटल ड्यूटी नहीं लगेगी।
- 15% से अधिक वजन: अगर उत्पाद में धातु की मात्रा 15% से ज्यादा है, तो पूरे उत्पाद की कीमत पर सीधा 25% टैक्स लगेगा।
सरकार का दावा है कि पहले के टैरिफ फैसलों से अमेरिका में स्टील और एल्युमिनियम का उत्पादन बढ़ा है।
अब सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन क्षमता को 80% तक ले जाना है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का तर्क
व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध जैसी स्थितियों में अमेरिका यह जोखिम नहीं ले सकता कि उसकी जान बचाने वाली दवाएं चीन या भारत जैसे देशों से आने वाले शिपमेंट पर निर्भर रहें।
ट्रंप चाहते हैं कि “मेड इन अमेरिका” केवल एक नारा न रहे, बल्कि हकीकत बने।
🚨 BREAKING: Donald Trump announces sweeping pharma tariffs
💊 Up to 100% tariffs on imported patented drugs
🏭 Companies must cut prices or shift manufacturing to the U.S. to avoid penalties.#Trump #Pharma #Tariffs #BreakingNews pic.twitter.com/VYl9qYP3GB— GLOBAL PULSE 360 (@GLOBALPULSE0102) April 3, 2026
कब से लागू होंगे ये नियम?
यह नई टैक्स प्रणाली दो चरणों में लागू होगी:
- बड़ी कंपनियों के लिए: 31 जुलाई से।
- छोटी कंपनियों के लिए: 29 सितंबर से।
डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है।
जहां एक ओर इससे अमेरिका में रोजगार बढ़ने और घरेलू कंपनियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर आम अमेरिकी नागरिकों के लिए दवाइयां महंगी हो सकती हैं।
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