Mukesh Maurya Ajaks President: मध्यप्रदेश के गलियारों में पिछले कई महीनों से एक ही चर्चा थी—”अजाक्स का असली मुखिया कौन?”
अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारियों और कर्मचारियों के इस सबसे शक्तिशाली संगठन में चल रही वर्चस्व की लड़ाई ने अब नया मोड़ ले लिया है।
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस उलझन को सुलझाते हुए साफ कर दिया है कि चौधरी मुकेश मौर्य ही अजाक्स के वैधानिक प्रांताध्यक्ष हैं।

उनके साथ आईएएस विशेष गढ़पाले को कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
क्या था विवाद? (नेमप्लेट से लेकर पुलिस थाने तक)
इस विवाद की सबसे चर्चित तस्वीर 20 मार्च को सामने आई थी।
यह लड़ाई तब सड़कों पर आ गई जब मुकेश मौर्य अपने समर्थकों के साथ राजधानी स्थित अजाक्स कार्यालय पहुंचे।
वहां उन्होंने पहले से लगी जेएन कंसोटिया, संतोष वर्मा और एसएल सूर्यवंशी की नेमप्लेट हटाकर अपनी नेमप्लेट लगा दी।
इसके बाद दूसरे गुट ने पलटवार किया और मौर्य की नेमप्लेट उखाड़ फेंकी।

हालात इतने बिगड़ गए कि मौके पर पुलिस तैनात करनी पड़ी।
मौर्य की शिकायत पर एक महिला के खिलाफ FIR दर्ज हुई और 8 लोगों को शांति भंग करने की आशंका में बाउंडओवर किया गया।
यह सिर्फ नेमप्लेट की लड़ाई नहीं थी, बल्कि संगठन पर कब्जे की एक बड़ी जंग थी।
दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें
एक तरफ मुकेश मौर्य का दावा था कि उनके पास ‘रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी’ की कानूनी मान्यता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना किसी कानूनी आधार के संगठन पर कब्जा जमाए बैठे हैं।
दूसरी तरफ, आईएएस संतोष वर्मा का गुट मौर्य की सदस्यता पर ही सवाल उठा रहा था।

उनका कहना था कि मौर्य संगठन के सदस्य बनने के काबिल ही नहीं हैं और उन पर आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप हैं।
वर्मा ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो एससी-एसटी वर्ग के कर्मचारियों का गुस्सा सरकार पर भारी पड़ सकता है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
विवाद बढ़ता देख मामला विधानसभा तक जा पहुंचा।
प्रांतीय सचिव डॉ. अनिल अर्गल के अनुसार, रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी ने विधानसभा पटल पर उन संगठनों की सूची रखी थी जो कानूनी रूप से मान्य हैं।
इसी सूची को आधार बनाकर सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया।
सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में अजाक्स के नाम पर किसी भी तरह का पत्राचार या संवाद केवल मुकेश मौर्य और विशेष गढ़पाले के साथ ही किया जाए।
इससे दूसरे गुट की दावेदारी पूरी तरह खत्म हो गई है।

अब आगे की क्या है तैयारी?
मान्यता मिलने के बाद मुकेश मौर्य और विशेष गढ़पाले ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
आने वाले दिनों में संगठन के मुख्य लक्ष्य:
* शिक्षा पर जोर: एससी-एसटी छात्रों को मिलने वाली हॉस्टल सुविधाओं का निरीक्षण और सुधार करना।
* योजनाओं का क्रियान्वयन: केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करवाना।
* संगठन की मजबूती: जल्द ही भोपाल के अजाक्स भवन में एक बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सभी जिलों के पदाधिकारियों को शामिल किया जाएगा ताकि संगठन को नई ऊर्जा दी जा सके।
मध्यप्रदेश में अजाक्स सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक बड़ा वोट बैंक और सामाजिक दबाव समूह भी है।
इस विवाद के खत्म होने से अब कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना आसान होगा।
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