Rana Ayyub Controversial Tweets: दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकार राणा अय्यूब द्वारा किए गए कुछ पुराने ट्वीट्स पर बहुत ही सख्त टिप्पणी की है।
अदालत ने इन ट्वीट्स को न केवल अपमानजनक, बल्कि समाज में नफरत फैलाने वाला और सांप्रदायिक करार दिया है।
बुधवार (8 अप्रैल) को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने साफ तौर पर कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की भाषा और सामग्री बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद राणा अय्यूब द्वारा साल 2013 से 2017 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर किए गए कुछ पोस्ट्स से जुड़ा है।
इन ट्वीट्स में कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं (भगवान राम और माता सीता) और दक्षिणपंथी विचारक विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।


अदालत में एडवोकेट अमिता सचदेवा की याचिका पर सुनवाई चल रही थी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन ट्वीट्स को पढ़कर उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राणा अय्यूब ने जानबूझकर ऐसी बातें लिखीं जिनसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।

अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देश
सुनवाई के दौरान जस्टिस कौरव ने कहा कि ये पोस्ट पहली नजर में ही भड़काऊ और अपमानजनक लगते हैं।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई होना जरूरी है ताकि सार्वजनिक शांति बनी रहे।
अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनी X (ट्विटर) को निर्देश दिए हैं कि वे 9 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करें।

साथ ही, राणा अय्यूब को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय करें और आवश्यक कदम उठाएं।
याचिकाकर्ता की दलीलें
वकील अमिता सचदेवा ने अपनी याचिका में राणा अय्यूब के कुल 6 विवादित ट्वीट्स का जिक्र किया है।
उन्होंने दलील दी कि एक पत्रकार होने के नाते जिम्मेदारी निभाने के बजाय, इन पोस्ट्स के जरिए धार्मिक आस्थाओं का मजाक उड़ाया गया।

याचिका के अनुसार, सावरकर को ‘आतंकवादी समर्थक’ कहना और रामायण के पात्रों पर विवादित तुलना करना सनातन धर्म के अनुयायियों का अपमान है।
इससे पहले यह मामला साकेत कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) में भी गया था, जिसने दिल्ली पुलिस को एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया था।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि फिलहाल ये विवादित ट्वीट्स उनके मूल लिंक पर उपलब्ध नहीं हैं।

विवादित ट्वीट्स में क्या लिखा था?
याचिका में जिन ट्वीट्स का हवाला दिया गया है, उनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
- 2013 का पोस्ट: इसमें भगवान राम और रावण की तुलना करते हुए विवादित टिप्पणी की गई थी।
- 2015 का पोस्ट: इसमें सावरकर के विचारों को गलत तरीके से पेश करने और उन्हें अपमानित करने का आरोप है।
- 2016 का पोस्ट: इसमें भारतीय सेना की एक तस्वीर के साथ ऐसी टिप्पणी की गई थी जिसे सुरक्षा बलों की छवि खराब करने वाला माना गया।


अगली सुनवाई कब?
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बहुत कम समय दिया है।
सभी पक्षों को गुरुवार तक अपनी रिपोर्ट और जवाब पेश करना है।
इसके बाद, शुक्रवार यानी 10 अप्रैल को अदालत इस मामले पर दोबारा सुनवाई करेगी और तय करेगी कि आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह मामला अभिव्यक्ति की आजादी और धार्मिक भावनाओं के बीच की बहस को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।
कोर्ट का रुख स्पष्ट है कि ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का मतलब दूसरों की आस्था का अपमान करना या समाज में जहर घोलना नहीं हो सकता।
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