Mary Milben CJP funding allegations: हॉलीवुड की मशहूर सिंगर मैरी मिलबेन ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में अपनी तीखी प्रतिक्रिया से हलचल मचा दी है।
इस बार उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और इसके संस्थापक अभिजीत दीपके पर अमेरिका से भारी फंडिंग मिलने का गंभीर आरोप लगाया है।
मिलबेन का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं, ताकि भारत में सरकार के कामकाज में रुकावट डाली जा सके और देश में अराजकता व अशांति फैलाई जा सके।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक कड़ा संदेश साझा करते हुए मिलबेन ने देश के युवाओं से आगे आने और अपनी आवाज उठाने की अपील की है।

उन्होंने अपने पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा, ‘यह चुप रहने का समय नहीं है।’
‘पारंपरिक नेताओं को निशाना बनाने का पुराना पैंतरा’
मैरी मिलबेन ने अपने बयानों में दावा किया है कि कुछ अमेरिकी और विदेशी डोनर्स दुनियाभर के पारंपरिक और मजबूत नेताओं को निशाना बनाने के लिए एक फिक्स फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘वे उस देश के किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढते हैं जिसने अमेरिका में पढ़ाई की हो, फिर उसे वैचारिक रूप से कट्टर बनाते हैं, वापस उसके देश भेजते हैं और वहां तबाही और अशांति फैलाने के लिए पैसों से उसकी मदद करते हैं।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए मिलबेन ने कहा कि जो नेता पिछले 25 वर्षों से लगातार सरकार में रहकर देश की सेवा कर रहा हो और पिछले 12 सालों से प्रधानमंत्री के पद पर काबिज हो, वह ऐसी बाहरी ताकतों और दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा।
बता दें कि जून 2023 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात मैरी मिलबेन से हुई थी, जहां उन्होंने पीएम मोदी के पैर भी छुए थे।
इसके बाद से ही वे भारत में अपनी राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर चर्चाओं में बनी रहती हैं।

मोदी के समर्थन में मिलबेन का पुराना रिकॉर्ड
मैरी मिलबेन ने इससे पहले भी कई मौकों पर खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों का समर्थन किया है:
* किसान आंदोलन (फरवरी 2021): जब देश में किसान आंदोलन जोरों पर था, तब मिलबेन ने मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के पीएम मोदी के विजन पर पूरा भरोसा है।
* मणिपुर हिंसा (अगस्त 2023): मणिपुर में हुई हिंसा के दौरान भी उन्होंने केंद्र सरकार का पक्ष लिया था और कहा था कि भारत के लोगों को अपने प्रधानमंत्री पर अटूट विश्वास है।

* बीबीसी डॉक्यूमेंट्री विवाद (2023): बीबीसी द्वारा गुजरात दंगों पर बनाई गई विवादित डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की उन्होंने कड़ी आलोचना की थी और मोदी सरकार के रुख का समर्थन किया था।
* CAA कानून (मार्च 2024): नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के लागू होने पर उन्होंने सरकार के इस फैसले की सराहना की थी और लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय मतदाताओं से मोदी के पक्ष में वोट करने की अपील भी की थी।

भारत में भी उठ चुके हैं CJP की फंडिंग पर सवाल
मैरी मिलबेन के इन बयानों से पहले भारत के राजनीतिक गलियारों में भी CJP और अभिजीत दीपके की फंडिंग को लेकर बड़े सवाल खड़े किए जा चुके हैं।
* नेताओं के आरोप:
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अभिजीत दीपके की अमेरिका में हुई पढ़ाई के खर्च पर सवालिया निशान खड़े करते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ी किसी संस्था का हाथ है।
इसके अलावा बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद के जरिए देश में अस्थिरता पैदा करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

* आरटीआई जांच की मांग:
अगस्त 2026 में एक आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के लीगल एड फंड की गहन जांच कराने की मांग उठाई थी।
अभिजीत दीपके और CJP का पक्ष: ‘दोस्तों की मदद से चलता है खर्च’
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके इन सभी विदेशी फंडिंग के आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं।
आंदोलनों के खर्च को लेकर उनका साफ कहना है कि पार्टी या उनके विरोध प्रदर्शनों में आने वाला पैसा वे और उनके कुछ करीबी दोस्त मिलकर आपस में जुटाते हैं।
दीपके का दावा है कि उनके संगठन को देश या दुनिया के किसी भी बड़े उद्योगपति या विदेशी डोनर से एक भी पैसा नहीं मिला है।
भविष्य में वे अपने इन अभियानों को चलाने के लिए क्राउडफंडिंग (जनता से छोटे-छोटे चंदे) का सहारा लेने की योजना बना रहे हैं।

विदेशी फंडिंग के आरोपों पर पलटवार करते हुए दीपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था।
उन्होंने कहा था कि अगर वाकई आंदोलनों में कोई विदेशी पैसा आ रहा है, तो इसकी जांच करना और इस पर रोक लगाना देश की सुरक्षा एजेंसियों और गृह मंत्रालय की सीधी जिम्मेदारी है।
दिल्ली प्रदर्शन पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के दो अलग-अलग बयान
इसी कड़ी में, 10 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के बीच भी मतभेद देखने को मिले।
हार्वर्ड कम्युनिटी से जुड़े समूहों ने इस मामले में दो अलग-अलग और विपरीत बयान जारी किए हैं।
* पहला बयान: 12 अक्टूबर को जारी पहले बयान पर हार्वर्ड के करीब 100 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए। इसमें दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता करने, उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन करने का गंभीर आरोप लगाया गया।
* दूसरा बयान: इसके उलट, बुधवार को जारी दूसरे बयान पर 44 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए। इस समूह ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं—जैसे चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय और संसद—के खिलाफ एक कथित नकारात्मक अभियान चलाए जाने और माहौल खराब करने की कोशिशों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

कुल मिलाकर, मैरी मिलबेन के बयानों और CJP की फंडिंग पर छिड़ी इस बहस ने एक बार फिर देश की राजनीति में बाहरी दखल और आंतरिक आंदोलनों के को लेकर एक नई राष्ट्रीय चर्चा छेड़ दी है।
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