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MP में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों के लौटेंगे अच्छे दिन: ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाएगी मोहन सरकार की ‘शिक्षा घर योजना’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Shiksha Ghar Yojana MP: मध्य प्रदेश के उन लाखों छात्र-छात्राओं के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर आई है, जिन्हें किसी न किसी वजह से स्कूल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी।

राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार ऐसे सभी बच्चों को फिर से स्कूल की दहलीज तक लाने के लिए एक बेहद खास कदम उठाने जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक नई योजना को हरी झंडी दे दी है, जिसका नाम है— ‘शिक्षा घर योजना’

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सरकार के इस बड़े फैसले से न सिर्फ राज्य में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या में कमी आएगी, बल्कि मध्य प्रदेश का शिक्षा स्तर भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और बेहतर होगा।

आइए जानते हैं कि सरकार की इस बैठक में क्या-क्या बड़े फैसले हुए और इस नई योजना से आम जनता और बच्चों को क्या फायदा मिलने वाला है।

मंत्रालय की बैठक में हुआ बड़ा फैसला

दरअसल, हाल ही में राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की एक बहुत ही महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी।

इस बैठक की अध्यक्षता खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कर रहे थे।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के अब तक के कामों का लेखा-जोखा देखा और आने वाली नई योजनाओं पर बारीकी से चर्चा की।

इसी गंभीर मंथन के बाद मुख्यमंत्री ने ‘शिक्षा घर योजना’ को तुरंत लागू करने का रास्ता साफ कर दिया।

सरकार की पूरी तैयारी है कि इसी मौजूदा सत्र से इस योजना को जमीन पर उतार दिया जाए ताकि बच्चों का साल खराब न हो।

किन बच्चों की बदलेगी तकदीर?

अक्सर देखा जाता है कि बच्चे कक्षा 8वीं या उसके आगे की पढ़ाई (जैसे 9वीं, 10वीं या 11वीं) के दौरान किसी विषय में फेल हो जाते हैं, या फिर घर की माली हालत ठीक न होने के कारण बीच में ही स्कूल जाना बंद कर देते हैं।

पढ़ाई का यह गैप धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि बच्चे हमेशा के लिए शिक्षा से दूर हो जाते हैं और मजदूरी या अन्य छोटे-मोटे कामों में लग जाते हैं।

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‘शिक्षा घर योजना’ का पूरा फोकस इसी वर्ग पर है।

सरकार ऐसे सभी किशोर-किशोरियों और युवाओं को ढूंढकर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ेगी।

जो बच्चे परीक्षा में फेल होने के डर या निराशा की वजह से घर बैठ गए थे, उन्हें सरकार एक बार फिर से अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने का सुनहरा मौका देने जा रही है।

इसका सीधा मकसद युवाओं को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाकर उनके भविष्य को सुरक्षित करना है।

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सिलेबस में भी होगा बड़ा बदलाव, बच्चे पढ़ेंगे सम्राट विक्रमादित्य का इतिहास

इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिर्फ बच्चों को स्कूल वापस लाने की चिंता नहीं की, बल्कि स्कूल के भीतर दिए जाने वाले ज्ञान को लेकर भी एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्देश दिया।

अब मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे देश के महान और न्यायप्रिय शासकों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि स्कूली पाठ्यक्रम (सिलेबस) में महान सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को शामिल किया जाए।

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अधिकारियों को इस पूरी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

सीएम का मानना है कि आज की पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और अपने पूर्वजों के पराक्रम की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

जब बच्चे सम्राट विक्रमादित्य जैसे महापुरुषों की कहानियां पढ़ेंगे, तो उन्हें जीवन में सही रास्ते पर चलने और आगे बढ़ने की एक नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलेगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि सरकार द्वारा पहले की गई सभी घोषणाओं को समय पर पूरा किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा कि हर काम को पूरा करने की एक समय-सीमा (डेडलाइन) तय होनी चाहिए और काम में किसी भी तरह की सुस्ती या देरी अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जर्जर स्कूलों पर कड़ा रुख: बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश दिए।

उन्होंने राज्य के सभी सरकारी स्कूल भवनों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और जो स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं, उन पर गहरी चिंता व्यक्त की।

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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त आदेश देते हुए कहा कि जिन भी स्कूलों की इमारतें खराब या जर्जर हो चुकी हैं, उनकी मरम्मत का काम तुरंत, यानी युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”

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सरकार का मानना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए एक सुरक्षित, साफ-सुथरा और बेहतर माहौल मिलना ही चाहिए और यह सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है।

पुरानी 14 योजनाएं भी रहेंगी जारी

गरीब और जरूरतमंद बच्चों को लगातार मदद मिलती रहे, इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की पुरानी 14 योजनाओं को भी आगे जारी रखने का फैसला किया है।

सरकार इन सभी पुरानी सरकारी योजनाओं को और ज्यादा बेहतर और पारदर्शी तरीके से चलाएगी, ताकि राज्य के आखिरी छोर पर बैठे गरीब और वंचित बच्चे तक भी मुफ्त शिक्षा, वर्दी, साइकिल और किताबों जैसी सुविधाओं का पूरा लाभ आसानी से पहुंच सके।

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कुल मिलाकर, डॉ. मोहन यादव सरकार की ‘शिक्षा घर योजना’ और शिक्षा विभाग की यह समीक्षा बैठक मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा तंत्र में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

इससे उन बच्चों को एक नया जीवन मिलेगा जो पढ़ाई की रेस में पीछे छूट गए थे।

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