Ujjain Kaal Bhairav VIP Darshan: उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री कालभैरव मंदिर में अब श्रद्धालुओं के लिए एक नई और खास व्यवस्था शुरू की गई है।
अब आपको बाबा के दर्शन के लिए घंटों लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी।
महाकाल मंदिर की तर्ज पर अब कालभैरव मंदिर में भी ‘शीघ्र दर्शन’ (VIP दर्शन) की व्यवस्था लागू कर दी गई है।

बुधवार से शुरू हुई इस नई व्यवस्था के तहत, जो श्रद्धालु जल्दी और बिना किसी परेशानी के दर्शन करना चाहते हैं, वे ₹500 का टिकट खरीदकर सीधे मंदिर के गर्भगृह (जहाँ बाबा विराजमान हैं) तक जा सकते हैं।
आइए जानते हैं कि यह पूरी व्यवस्था कैसे काम करेगी और इसके पीछे प्रशासन की क्या सोच है।
टिकट कहाँ मिलेगा और क्या होगी टाइमिंग?
प्रशासन ने बताया है कि फिलहाल यह व्यवस्था पूरी तरह ऑफलाइन है। यानी आपको मंदिर परिसर के बाहर बने काउंटर पर जाकर ही यह ₹500 का टिकट लेना होगा।
टिकट काउंटर सुबह 6 बजे खुल जाएगा और रात को 9 बजे तक चालू रहेगा।

जल्द ही इस व्यवस्था को ऑनलाइन भी कर दिया जाएगा, ताकि लोग घर बैठे ही अपना स्लॉट बुक कर सकें।
दलालों और ठगी से मिलेगी मुक्ति
कालभैरव मंदिर के प्रशासक एलएन गर्ग के मुताबिक, मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
इस भीड़ का फायदा उठाकर कई बार स्थानीय दलाल और असामाजिक तत्व सीधे दर्शन कराने के नाम पर सीधे-साधे भक्तों से मोटी रकम वसूल लेते थे और उन्हें ठग लेते थे।

इस ठगी को रोकने के लिए ही प्रशासन ने खुद यह सशुल्क (Paid) व्यवस्था शुरू की है।
अब सारा पैसा सीधे मंदिर के खाते में जाएगा, जिससे मंदिर का विकास होगा।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी और ₹125 करोड़ का कॉरिडोर
उज्जैन में साल 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। इसे देखते हुए अभी से तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
कालभैरव मंदिर और उसके आस-पास के इलाके को सुंदर और सुविधाजनक बनाने के लिए ₹125.17 करोड़ की लागत से एक भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है।

इसी मास्टर प्लान के तहत दर्शन व्यवस्था में भी बदलाव किए जा रहे हैं।
नियम क्या हैं और एंट्री कहाँ से होगी?
एंट्री का रास्ता: ₹500 का टिकट लेने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर के एग्जिट गेट (निकास द्वार) के पास से एक विशेष रास्ते से प्रवेश दिया जाएगा।
यहाँ से वे सीधे गर्भगृह के मुख्य द्वार पर पहुँचेंगे और बाबा कालभैरव के दर्शन कर सकेंगे।

मोबाइल और बेल्ट पर रोक नहीं: जहाँ एक तरफ महाकाल मंदिर में मोबाइल ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी है, वहीं कालभैरव मंदिर में ऐसी कोई रोक नहीं है।
श्रद्धालु अपने साथ मोबाइल और बेल्ट ले जा सकते हैं।
आरती का समय: मंदिर के कपाट सुबह 6:30 बजे खुलते हैं और रात 9:30 बजे बंद होते हैं।
सुबह 8:00 बजे और रात 8:30 बजे होने वाली आरती के समय कुछ देर के लिए दर्शन रोक दिए जाते हैं।
बाकी समय आम श्रद्धालुओं के लिए सामान्य कतारें चलती रहेंगी।

महाकाल मंदिर से कितनी अलग है यह व्यवस्था?
कई लोग इसकी तुलना महाकाल मंदिर की व्यवस्था से कर रहे हैं।
आपको बता दें कि महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन का शुल्क ₹250 है, लेकिन वहाँ श्रद्धालुओं को गर्भगृह में जाने नहीं मिलता, बल्कि बैरिकेड्स या नंदी हॉल के पास से ही दर्शन करने होते हैं।

इसके विपरीत, कालभैरव मंदिर में ₹500 शुल्क जरूर है, लेकिन श्रद्धालु सीधे गर्भगृह के अंदर तक जा सकेंगे।
