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सिर्फ हीट स्ट्रोक नहीं, अब दिमाग और किडनी पर भारी पड़ रही कड़कती धूप; डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Blood clotting due to heat: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में सूरज की तपिश इस समय अपने चरम पर है।

पारा बढ़ने के साथ ही अब इसका सीधा और खतरनाक असर इंसानी शरीर के भीतर देखने को मिल रहा है।

कड़कती धूप और भीषण गर्मी के कारण लोगों के शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) हो रही है, जिसकी वजह से एक नई और डराने वाली समस्या सामने आई है -लोगों का खून गाढ़ा होने लगा है।

अस्पतालों में इन दिनों अचानक ऐसे मरीजों की तादाद बढ़ गई है, जिन्हें तेज सिरदर्द, कमजोरी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नता महसूस हो रही है।

HEAT STROKE

डॉक्टरों का कहना है कि यह सब शरीर में पानी के सूखने और खून के थक्के बनने की वजह से हो रहा है।

पानी की कमी कैसे बन रही है जानलेवा?

सीधे शब्दों में समझें तो हमारा खून काफी हद तक पानी से बना है।

जब बाहर का तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाता है, तो शरीर को ठंडा रखने के लिए पसीने के रूप में बहुत सारा पानी बाहर निकल जाता है।

अगर हम इस खोए हुए पानी की भरपाई के लिए लगातार पानी नहीं पीते, तो शरीर में सूखे जैसे हालात बन जाते हैं।

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जब शरीर में पानी बहुत कम हो जाता है, तो खून की तरलता खत्म होने लगती है और वह गाढ़ा (Thick) होने लगता है।

गाढ़ा खून नसों में आसानी से बह नहीं पाता और उसके थक्के (Clots) जमने लगते हैं।

अगर खून का यह थक्का बहते-बहते दिमाग की नसों में जाकर फंस जाता है, तो वहां खून की सप्लाई रुक जाती है।

इसे ही ‘ब्रेन स्ट्रोक’ कहा जाता है।

इतना ही नहीं, इस गर्मी में एक बेहद दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी ‘साइनस थ्रोम्बोसिस’ के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं, जिसमें दिमाग की मुख्य नसों में खून पूरी तरह जम जाता है।

अकेले हमीदिया अस्पताल में वीनस थ्रोम्बोसिस के 38 मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से चार की हालत साइनस थ्रोम्बोसिस के कारण बेहद गंभीर है।

मासूम बच्चों और बुजुर्गों की किडनी पर मंडराया संकट

इस भीषण गर्मी और उमस का सबसे बुरा असर हमारे घर के बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।

शिशु रोग विशेषज्ञ के मुताबिक, बच्चों का शरीर बड़ों के मुकाबले बहुत जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है।

जब शरीर में पानी की गंभीर किल्लत होती है, तो खून का दबाव कम हो जाता है और किडनी को खून छानने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।

 

इस वजह से बच्चों और बुजुर्गों में ‘एक्यूट किडनी इंजरी’ (AKI) यानी अचानक किडनी डैमेज होने या फेल होने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

डॉक्टरों ने बताया कि बीते महज 20 दिनों के भीतर ही हमीदिया अस्पताल में छह ऐसे बच्चे इलाज के लिए आ चुके हैं, जिनकी किडनी पर इस जानलेवा डिहाइड्रेशन का सीधा असर पड़ा है।

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

अगर आपको या आपके परिवार में किसी को भी नीचे दिए गए लक्षण दिखते हैं, तो उसे सामान्य थकान या गर्मी न समझें।

यह शरीर के भीतर खून गाढ़ा होने या स्ट्रोक का शुरुआती संकेत हो सकता है:

  • अचानक से बहुत तेज सिरदर्द होना (जो दवा से भी ठीक न हो)।
  • शरीर के किसी एक हिस्से (हाथ, पैर या चेहरे) में अचानक कमजोरी या सुन्नपन आना।
  • बोलने में जुबान लड़खड़ाना या सामने वाले की बात समझने में दिक्कत होना।
  • चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छा जाना या धुंधला दिखना।
  • उल्टी होना, बहुत ज्यादा सुस्ती महसूस होना या पेशाब का रंग गहरा पीला होना (या पेशाब कम आना)।

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क्या करें और क्या न करें: डॉक्टरों की ‘हेल्थ गाइड

इस जानलेवा गर्मी से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टरों ने कुछ बेहद आसान लेकिन बेहद जरूरी उपाय बताए हैं।

इन्हें अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें:

क्या करें? (Do’s)

पानी को बनाएं हथियार: दिनभर में कम से कम 2 से 3 लीटर (8 से 10 गिलास) पानी जरूर पीएं, चाहे आपको प्यास लगी हो या न लगी हो।

नेचुरल ड्रिंक्स लें: सादे पानी के अलावा नींबू पानी, छाछ, ओआरएस (ORS) का घोल, नारियल पानी और ताजे फलों का रस पीते रहें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो।

कपड़ों का चुनाव: जब भी बाहर निकलें, हमेशा हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती (Cotton) कपड़े ही पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे।

सुरक्षा कवच: धूप में निकलते समय सिर को सूती कपड़े से ढकें, छाते का इस्तेमाल करें और सनग्लासेस जरूर पहनें।

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क्या न करें? (Don’ts)

दोपहर की धूप से बचें: दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब धूप सबसे तेज होती है, तब बिना किसी बेहद जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें।

खाली पेट न रहें: लंबे समय तक भूखे पेट रहने से शरीर की सहनशक्ति कम हो जाती है। घर से हमेशा कुछ खाकर और पानी पीकर ही निकलें।

चाय-कॉफी से दूरी: अत्यधिक मात्रा में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स पीने से बचें, क्योंकि ये चीजें शरीर से पानी को और तेजी से बाहर निकालती हैं (Diuretic effect)।

लापरवाही न बरतें: बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार (जैसे शुगर या बीपी के मरीज) लोगों को अकेले धूप में बिल्कुल न भेजें।

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डॉक्टरों का अंतिम संदेश: इस मौसम में ‘बचाव ही सबसे बड़ा इलाज’ है।

प्यास लगने का इंतजार न करें, खुद को हाइड्रेटेड रखें और किसी भी असामान्य लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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