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करोड़ों फॉलोअर्स भी न आए काम: सोशल मीडिया पर रील्स बनाने वाले शहडोल के ट्रैफिक हेड कांस्टेबल सस्पेंड

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Police Reels Controversy: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

सोशल मीडिया पर अपनी खास पहचान बना चुके और करोड़ों दिलों पर राज करने वाले ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी को पुलिस अधीक्षक (SP) राम जी श्रीवास्तव ने तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।

विवेकानंद तिवारी कोई आम पुलिसकर्मी नहीं हैं, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उनके वीडियो को करोड़ों लोग देखते हैं।

वह अक्सर लोगों को बेहद अनोखे अंदाज में ट्रैफिक नियमों की जानकारी देते और समझाते हुए नजर आते थे।

लेकिन अब उन पर हुई इस कार्रवाई के बाद से पूरे पुलिस महकमे और सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया है।

क्यों गिरी निलंबन की गाज? जानिए सरकारी आदेश में क्या है

शहडोल एसपी द्वारा जारी निलंबन आदेश के मुताबिक, हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी पिछले कुछ समय से अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरत रहे थे।

आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि विवेकानंद तिवारी 19 मई 2026 से बिना किसी पूर्व सूचना या मंजूरी के लगातार अपनी ड्यूटी से गैरहाजिर (अनुपस्थित) चल रहे थे।

इतना ही नहीं, आदेश में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि इस गैरहाजिरी के दौरान विवेकानंद तिवारी ने सरकारी सेवा में रहते हुए अपने निजी फायदे और सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार के लिए अलग-अलग जगहों पर जाकर वीडियो बनाए और उन्हें इंटरनेट पर अपलोड किया।

पुलिस प्रशासन का मानना है कि यह कदम ‘पुलिस रेगुलेशन 64’ के तहत सेवा की शर्तों और नियमों का खुला उल्लंघन है।

इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही मानते हुए एसपी ने उन्हें सस्पेंड कर रक्षित केंद्र (लाइन) शहडोल भेज दिया है।

शहडोल एसपी राम जी श्रीवास्तव ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पहले ट्विटर) पर इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए लिखा कि सरकारी ड्यूटी से 15 दिनों तक बिना बताए गायब रहने और व्यक्तिगत लाभ के लिए वीडियो बनाने के कारण ही यह एक्शन लिया गया है।

कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ गई जंग

जैसे ही विवेकानंद तिवारी के सस्पेंशन की खबर इंटरनेट पर फैली, उनके चाहने वालों और आम जनता के बीच बहस शुरू हो गई।

देखते ही देखते कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कोई पुलिस की इस सख्त कार्रवाई को बिल्कुल सही ठहरा रहा है, तो कोई अपने पसंदीदा पुलिसकर्मी के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है।

लोगों का कहना है कि वे वीडियो के जरिए समाज को जागरूक ही तो कर रहे थे।

हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी ने खोला मोर्चा, बताई अंदर की कहानी

इस पूरे विवाद और निलंबन के बाद अब हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी ने भी चुप्पी तोड़ी है।

उन्होंने 6 जून की सुबह अपने फेसबुक पेज पर एक भावुक और लंबा पोस्ट लिखकर जनता के सामने अपनी सफाई पेश की है।

इसके साथ ही उन्होंने अपने इलाज से जुड़े कुछ मेडिकल दस्तावेज और पर्चियां भी सार्वजनिक की हैं।

विवेकानंद तिवारी ने लिखा, “मैं सभी शहडोल वासियों और समर्थकों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया। लेकिन पिछले 3 महीनों से मेरी मानसिक स्थिति ठीक नहीं चल रही है। मुझे रात में नींद न आना, घबराहट होना, बेचैनी महसूस होना और किसी सड़क हादसे को देखने के बाद मन का व्याकुल हो जाना जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। चिड़चिड़ाहट इतनी बढ़ गई थी कि मेरी मानसिक हालत बिगड़ने लगी थी।”

“मैं बिना बताए गायब नहीं था” – पुलिसकर्मी का दावा

अपने बचाव में विवेकानंद ने आगे बताया कि 19 मई 2026 को उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब थी। उस समय उनकी पत्नी और बच्चे मायके गए हुए थे और वह घर पर अकेले थे।

लगातार तीन दिन और तीन रात न सो पाने के कारण वह इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज गए थे। वहां उन्होंने साइकेट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) को दिखाया।

डॉक्टर ने उन्हें मानसिक तनाव और नींद की दवाइयां दीं और एक हफ्ते तक पूरी तरह आराम करने (बेड रेस्ट) की सलाह दी।

हेड कांस्टेबल का दावा है कि उन्होंने दोपहर 12:17 बजे ही मेडिकल कॉलेज की पर्ची को पुलिस विभाग के उस आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में भेज दिया था, जिसमें खुद पुलिस अधीक्षक (SP) भी जुड़े हुए हैं।

विवेकानंद का आरोप है कि इसके बावजूद दोपहर 2:00 बजे उनकी ड्यूटी जय स्तंभ चौक पर लगा दी गई और जब वह बीमारी के कारण वहां नहीं पहुंच पाए, तो शाम 5:00 बजे के आसपास उन्हें ड्यूटी से गैरहाजिर (एब्सेंट) दिखा दिया गया।

विभाग की गरिमा का सम्मान, लेकिन मजबूरी में उठाने पड़े कदम

विवेकानंद तिवारी ने अपने पोस्ट के आखिरी में लिखा कि वह अपने पुलिस विभाग की गरिमा का पूरा सम्मान करते हैं और कभी भी इन बातों को सोशल मीडिया पर लाकर सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे।

लेकिन जब उन पर बिना सूचना गायब रहने के झूठे आरोप लगे, तो मजबूर होकर उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए डॉक्टर के पर्चे और दस्तावेज जनता के सामने रखने पड़े।

 

अब यह मामला ‘खाकी के अनुशासन’ बनाम ‘कर्मचारी की मजबूरी’ के बीच उलझ गया है।

एक तरफ जहां पुलिस प्रशासन नियमों के उल्लंघन पर सख्त है, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों फैंस वाले इस पुलिस इन्फ्लुएंसर की बीमारी की दलील ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

देखना होगा कि आने वाले दिनों में जांच के बाद विभाग इस पर क्या अंतिम फैसला लेता है।

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