Homeन्यूजमार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी: चाइल्ड पोर्नोग्राफी, डीपफेक और...

मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी: चाइल्ड पोर्नोग्राफी, डीपफेक और PM का वीडियो हटाने के विवाद पर बैकफुट पर Meta CEO

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Mark Zuckerberg Apology PM Modi: दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में से एक मेटा (Meta) और भारत सरकार के बीच तनातनी अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है।

सूत्रों और न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से प्लेटफॉर्म पर मौजूद बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), एआई-जनरेटेड डीपफेक कंटेंट और कंपनी के संचालन में हुई गंभीर लापरवाही को लेकर बिना शर्त माफी मांग ली है।

यह बड़ा फैसला तब आया है जब भारतीय संसदीय समिति ने मेटा को 3 दिनों के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का सख्त अल्टीमेटम दिया था।

समिति ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर कंपनी समय रहते माफी नहीं मांगती है, तो उसे भारतीय आईटी कानून के तहत मिलने वाली ‘कानूनी सुरक्षा’ (Safe Harbour Protection) और अन्य रियायतों को रद्द करने पर विचार किया जाएगा।

IT मंत्रालय में बैठकों का दौर, दिल्ली बुलाई गई ग्लोबल टीम

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय और मेटा के शीर्ष अधिकारियों के बीच दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक चल रही है।

सरकार के कड़े रुख को देखते हुए मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली तलब किया गया है।

5 अगस्त को इस बैठक का पहला चरण संपन्न हुआ, जिसमें मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कापलान की अगुआई वाले प्रतिनिधिमंडल ने IT सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की।

मंत्रालय की जांच इस बात पर केंद्रित है कि मेटा भारतीय कानूनों का किस हद तक पालन कर रही है और उसके सेफगार्ड सिस्टम (सुरक्षा कवच) बार-बार फेल क्यों हो रहे हैं।

इसके अलावा इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री और व्हाट्सएप की नई यूजरनेम पॉलिसी को लेकर भी सख्त सवाल पूछे जा रहे हैं।

विवाद की मुख्य चिंगारी: PM मोदी का वीडियो हटना

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी और ताजा वजह 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया एक वीडियो संदेश था।

लगभग 2 मिनट 56 सेकंड के इस वीडियो में पीएम मोदी ने देश में NEET UG पेपर लीक और युवाओं की समस्याओं पर बात की थी।

उन्होंने देश के लाखों छात्रों को भरोसा दिलाया था कि पेपर लीक के गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।

हालांकि, पोस्ट किए जाने के कुछ ही समय बाद मेटा ने इस वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया।

यूजर्स जब वीडियो देखने की कोशिश कर रहे थे, तो स्क्रीन पर संदेश लिखा आ रहा था— “यह वीडियो भारत में उपलब्ध नहीं है।”

हालांकि बाद में मेटा ने इसे तकनीकी खराबी (Glitch) बताते हुए बहाल कर दिया और माफी मांगी, लेकिन आईटी मंत्रालय ने इस सफाई को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री जैसे वीआईपी अकाउंट और संवेदनशील मुद्दों से जुड़ी पोस्ट अचानक गायब होना केवल एक मामूली तकनीकी खामी नहीं हो सकती।

डीपफेक और साइबर क्राइम पर FIR का शिकंजा

मामला केवल वीडियो हटाने तक सीमित नहीं है।

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर बनाए गए मॉर्फ्ड और एआई (AI) आधारित डीपफेक पोस्ट के मामले में मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कई अन्य अकाउंट होल्डर्स के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि मेटा जैसी दुनिया की विशालकाय कंपनी से उम्मीद की जाती है कि उसके पास ऐसे मजबूत सुरक्षा तंत्र हों, जो डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत रोक सकें।

सरकार अब यह समझना चाहती है कि भारतीय कानूनों को लागू करने के लिए मेटा के पास वास्तविक धरातल पर क्या व्यवस्था है।

आम भारतीय यूजर्स पर इसका क्या असर होगा?

भारत मेटा का सबसे बड़ा बाजार है। देश में इसके यूजर बेस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:

  •  व्हाट्सएप: 60 करोड़ से ज्यादा यूजर्स
  •  इंस्टाग्राम: लगभग 48 करोड़ यूजर्स
  •  फेसबुक: लगभग 40 करोड़ यूजर्स

ऐसे में सरकार और मेटा के बीच चल रही इस तनातनी का सीधा असर देश के आम सोशल मीडिया यूजर्स पर भी पड़ेगा:

* सख्त कंटेंट मॉडरेशन: अब आपत्तिजनक, फर्जी या डीपफेक कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई होगी।

 * कंपनियों की जवाबदेही: गलत तरीके से किसी भी यूजर की पोस्ट या अकाउंट हटाने पर कंपनियों को स्पष्ट जवाब देना होगा।

* कानूनी सुरक्षा पर संकट: यदि मेटा को आईटी कानून के सेक्शन 79 के तहत मिलने वाली कानूनी छूट (Safe Harbour) खत्म होती है, तो प्लेटफॉर्म पर किसी भी यूजर द्वारा पोस्ट की गई आपत्तिजनक सामग्री के लिए सीधे मेटा पर केस दर्ज किया जा सकेगा।

ED action, online betting, online betting apps, online betting laws, ED notice, Google, Meta, gambling rules in India, online betting app case, betting ban, India online gambling laws

सरकार का यह कड़ा रुख संदेश देता है कि चाहे टेक कंपनी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, भारत के डिजिटल स्पेस में देश के कानूनों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

#MarkZuckerberg #MetaIndia #ITMinistry #Deepfake #SocialMediaRegulations #PMModi #TechNewsIndia

- Advertisement -spot_img