Shooter Jaspal Rana Dies: भारतीय खेल जगत के लिए एक बेहद बुरी खबर सामने आई है।
देश के सबसे महान निशानेबाजों में से एक जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। वह सिर्फ 49 वर्ष के थे।
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष कालीकेश नारायण सिंह देव ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है।

फ्लाइट में बिगड़ी थी तबीयत
यह पूरा मामला 1 जून से शुरू हुआ, जब जसपाल राणा जर्मनी से भारत लौट रहे थे। सफर के दौरान ही फ्लाइट में अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई।
दिल्ली के हवाई अड्डे पर उतरते ही उन्हें तुरंत एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उनके दिल में स्टेंट (Stent) डाला था।
अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके जाने से पूरा खेल जगत सदमे में है।

मेडल मशीन थे जसपाल: कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में मचाया था धमाल
जसपाल राणा को भारतीय शूटिंग का ‘पोस्टर बॉय’ कहा जाता था। उन्होंने अपने करियर में रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी थी।
अगर सिर्फ कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स की बात करें, तो उन्होंने देश की झोली में कुल 23 मेडल डाले थे।
- कॉमनवेल्थ गेम्स: उन्होंने यहां एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 9 गोल्ड मेडल जीते थे। इसके अलावा 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल भी उनके नाम थे।
- एशियन गेम्स: इस मंच पर भी उनका जलवा बरकरार रहा। उन्होंने लगातार 4 बार गोल्ड मेडल जीता। एशियन गेम्स में उनके नाम 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज सहित कुल 8 मेडल रहे।

उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें महज 18 साल की उम्र में ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से नवाजा था।
हाल ही में फरवरी 2025 में, उन्हें भारतीय जूनियर टीम (25 मीटर पिस्टल) का हाई-परफॉर्मेंस कोच भी नियुक्त किया गया था।
वह पेरिस ओलंपिक में इतिहास रचने वाली शूटर मनु भाकर के भी गुरु (कोच) रहे थे।

जब फटी जींस पहनकर वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ जीता था सोना
जसपाल राणा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि हौसले की मिसाल थे।
साल 1994 की बात है, इटली के मिलान में वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप होनी थी।
मैच से ठीक एक दिन पहले जसपाल के घुटने में एक बड़ा और दर्दनाक फोड़ा हो गया।
दर्द इतना था कि डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत भर्ती कर लिया और सर्जरी की सलाह दी। डॉक्टरों ने उन्हें खेलने से साफ मना कर दिया था।

लेकिन जसपाल के सिर पर देश के लिए खेलने का जुनून सवार था। वे अपने कोच सनी थॉमस के साथ अस्पताल से बाहर आ गए। उसी रात वह फोड़ा फूट गया और दर्द असहनीय हो गया।
जसपाल इतने बेबस थे कि दर्द के मारे अपनी जींस तक नहीं उतार पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने हार नहीं मानी; उन्होंने अपनी जींस को नीचे से फाड़कर हाफ पैंट बनाया।
अगली सुबह वे उसी हाल में शूटिंग रेंज पर उतरे। उन्होंने हर शॉट के साथ दर्द से कराहते हुए निशाना लगाया और न सिर्फ गोल्ड जीता, बल्कि जूनियर कैटेगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना दिया।
इसी साल उन्होंने हिरोशिमा एशियन गेम्स में भी सोना जीता था।

पिता ने 10 साल की उम्र में थमाई थी बंदूक
जसपाल राणा के रगों में अनुशासन और देश सेवा का जज्बा बचपन से था। उनके पिता नारायण सिंह राणा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में अधिकारी थे।
जब जसपाल सिर्फ 10 साल के थे, तब उनके पिता ने उन्हें राइफल और पिस्टल थमाई थी।
शुरुआत में उन्होंने दोनों से प्रैक्टिस की, लेकिन बाद में नियमों के कारण उन्होंने सिर्फ पिस्टल शूटिंग को अपना करियर चुना।

महज 12 साल की उम्र में उन्होंने 1988 की नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर दुनिया को अपने आने का संकेत दे दिया था।
दिग्गजों ने जताया दुख
भारत को ओलंपिक में पहला व्यक्तिगत गोल्ड दिलाने वाले शूटर अभिनव बिंद्रा ने दुख जताते हुए लिखा, “जसपाल का जाना भारतीय शूटिंग के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। वे बेहद प्रतिभाशाली और जुनूनी खिलाड़ी थे।”

वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और इसे खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
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