Sonia Gandhi on Manmohan Singh: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूरी तरह बेदाग करार देते हुए क्लीन चिट दे दी है।
इस फैसले के बाद कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।
एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्र (‘द इंडियन एक्सप्रेस’) में प्रकाशित अपने विशेष लेख में सोनिया गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल और मौजूदा मोदी सरकार के काम करने के तरीके की तुलना की।

उन्होंने लिखा है कि डॉ. मनमोहन सिंह की ईमानदारी और पारदर्शिता का रिकॉर्ड आज की सरकार की कार्यशैली से बिल्कुल अलग था।
सोनिया ने भरोसा जताया कि इतिहास डॉ. मनमोहन सिंह को एक शांत, सरल, लेकिन देश के सबसे प्रभावशाली और दूरदर्शी प्रधानमंत्रियों में से एक के रूप में याद रखेगा।
सुनियोजित साजिश का शिकार बनाए गए थे डॉ. सिंह
सोनिया गांधी ने अपने लेख में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ एक बहुत ही सोची-समझी रणनीति और साजिश के तहत अभियान (लॉबी कैंपेन) चलाया गया था।
इस अभियान में केवल राजनीतिक विरोधी ही शामिल नहीं थे, बल्कि अफसरशाही, मीडिया का एक बड़ा वर्ग, न्यायपालिका, सिविल सोसाइटी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) व बीजेपी से जुड़े लोग भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे।

उन्होंने कहा कि इस दुर्भावनापूर्ण अभियान का अंत अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ शून्य पर हो गया है।
अदालत के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि डॉ. मनमोहन सिंह पूरी तरह निष्कलंक और बेदाग थे।
समझें क्या था पूरा कोयला ब्लॉक आवंटन मामला?
* आवंटन की शुरुआत (2005): यह मामला साल 2005 का है, जब ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक का आवंटन महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL), नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NLC) और निजी क्षेत्र की कंपनी हिंदाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Hindalco) को संयुक्त रूप से किया गया था।
आरोप यह लगाया गया था कि शुरुआती सिफारिश NLC के पक्ष में थी, लेकिन बाद में नियमों को ताक पर रखकर हिंदाल्को को इसमें शामिल किया गया।

* डॉ. मनमोहन सिंह पर आरोप: उस समय डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे थे।
उन पर यह आरोप लगा कि उन्होंने स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों के बावजूद फाइल को दोबारा खुलवाया और निजी कंपनी हिंदाल्को को लाभ पहुँचाने वाले आवंटन को हरी झंडी दी।
* CBI की जांच और ट्रायल कोर्ट का रुख: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मामले की गहराई से जांच करने के बाद 2014 में अपनी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की।
CBI ने साफ कहा कि डॉ. सिंह के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है।
हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और 2015 में डॉ. सिंह समेत कई अन्य अधिकारियों को आरोपी के रूप में समन जारी कर दिया।

* सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट: सुप्रीम कोर्ट ने CBI की उस क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह सही माना और ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया।
सर्वोच्च अदालत ने टिप्पणी की कि CBI की क्लोजर रिपोर्ट को दरकिनार करने का ट्रायल कोर्ट के पास कोई ठोस आधार नहीं था।
* मामले का अंत: सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम और ऐतिहासिक फैसले के साथ ही डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों पर पूर्णविराम लग गया।
गौरतलब है कि 27 दिसंबर 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो चुका था।

29 जुलाई भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक दिन: सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने अपने लेख में 29 जुलाई के दिन को भारत के राजनीतिक इतिहास का एक बेहद अहम मोड़ बताया।
उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह हमेशा से एक उच्च नैतिक मूल्यों और सत्यनिष्ठा वाले व्यक्ति रहे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सार्वजनिक जीवन में फैलाए गए झूठ और चरित्र हनन के एक बेहद दुखद दौर का अंत कर दिया है।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे ED (प्रवर्तन निदेशालय) और CBI का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है।

इन एजेंसियों का काम अब अपराध रोकना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाना, उन्हें चुप कराना या फिर डरा-धमकाकर बीजेपी में शामिल कराना रह गया है।
सोनिया गांधी के लेख की 5 सबसे बड़ी बातें
1. PM मोदी की पुरानी बयानबाजी पर निशाना
सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2017 में राज्यसभा के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. मनमोहन सिंह पर तंज कसते हुए कहा था कि “केवल डॉ. साहब को ही रेनकोट पहनकर नहाने की कला आती है।”
सोनिया ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री दूसरों को माफ करने की बात करते हैं, तो उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई अपनी इस अशोभनीय और गरिमाहीन टिप्पणी के लिए खुद का भी आत्मचिंतन करना चाहिए।

2. UPA सरकार की आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियां
सोनिया ने डॉ. सिंह के कार्यकाल की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि 2004 से 2014 के बीच देश ने ऐतिहासिक आर्थिक प्रगति देखी।
2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से खड़ी रही।
UPA शासनकाल में शिक्षा का अधिकार, IIT/IIM में OBC आरक्षण, मनरेगा (MGNREGA), वन अधिकार कानून और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून जैसे क्रांतिकारी कदम उठाए गए, जिन्होंने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला।
3. अभिव्यक्ति की आजादी और जवाबदेही
सोनिया गांधी ने लिखा कि मनमोहन सरकार के समय नागरिकों और छात्रों को सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन करने की आजादी थी।
उस दौर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन या गोलियां नहीं चलाई जाती थीं।
डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में 100 से अधिक बिना स्क्रिप्ट वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मीडिया और जनता के सामने अपनी जवाबदेही तय की थी।

4. भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (Nuclear Deal)
सोनिया गांधी ने ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को डॉ. मनमोहन सिंह के अदम्य साहस का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि इस समझौते ने भारत पर लगे दशकों पुराने परमाणु प्रतिबंधों को खत्म किया और भारत को एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया।
5. डॉ. मनमोहन सिंह का कथन सच साबित हुआ
सोनिया ने अपने लेख का अंत करते हुए कहा कि जनवरी 2014 में डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि “इतिहास मेरे प्रति मीडिया या संसद से ज्यादा दयालु रहेगा।”
आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनका कहा एक-एक शब्द सच साबित हो रहा है।
#SoniaGandhi #ManmohanSingh #Congress #PMModi #CoalScam #SupremeCourt #IndianPolitics #ManmohanSinghCleanChit #PoliticalNews #UPA Government
