Meenakshi Natarajan Nomination Cancelled: इस वक़्त मध्य प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक एक ऐसा सियासी बवंडर खड़ा हो गया है जिसने कांग्रेस और बीजेपी को आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज होने से शुरू हुआ यह पूरा विवाद अब राष्ट्रपति भवन की चौखट, सुप्रीम कोर्ट की दहलीज और नेताओं की तीखी बयानबाजी तक पहुंच चुका है।

आइए जानते हैं इस मामले में ताजा अपडेट और पूरा विवाद…
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मीनाक्षी की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को राहत देने से इनकार कर दिया है। शुक्रवार, 12 जून को हुई सुनवाई में कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो तब उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों में न्यायिक दखल की एक सीमा होती है। इस समय वह चुनावी प्रक्रिया को नहीं रोक सकता।
इस फैसले के साथ ही मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका लगा है।

दिल्ली में कांग्रेस का हंगामा
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट से जुड़ा है। कांग्रेस ने यहां से अपनी सीनियर नेता मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था।
आंकड़ों के लिहाज से कांग्रेस के पास जीत के लिए पर्याप्त विधायकों का समर्थन (संख्या बल) भी था।
लेकिन 9 जून को अचानक खेल बदल गया। रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त (कैंसिल) कर दिया।

क्यों रद्द हुआ फॉर्म?
बीजेपी ने मीनाक्षी के फॉर्म पर आपत्ति जताई थी। बीजेपी का आरोप था कि मीनाक्षी ने अपने ऊपर दर्ज एक पुराने मामले की जानकारी नामांकन पत्र में छुपाई है।
रिटर्निंग ऑफिसर ने इस शिकायत को सही माना और उनका पर्चा खारिज कर दिया।
नतीजा यह हुआ कि गुरुवार (11 जून) को नाम वापसी का समय खत्म होते ही बीजेपी के तीनों उम्मीदवार—रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट—निर्विरोध चुनाव जीत गए।

दिल्ली की सड़कों पर हाईवोल्टेज ड्रामा:
इस फैसले से नाराज मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस के कई विधायक दिल्ली पहुंचे।
वे इस मामले की शिकायत करने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने राष्ट्रपति भवन की तरफ मार्च कर रहे थे।
हालांकि, राष्ट्रपति उत्तराखंड के दो दिन के दौरे पर थीं, इसलिए मुलाकात का समय नहीं मिल सका।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उमंग सिंघार और अन्य कांग्रेसी विधायकों को रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया।



सुप्रीम कोर्ट में दलील—”हार मंजूर है, लेकिन चुनाव तो लड़ने दो”
पर्चा खारिज होने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
देश की सबसे बड़ी अदालत में मीनाक्षी नटराजन की तरफ से मशहूर वकील अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी कर रहे हैं।
सिंघवी ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा, “रिटर्निंग ऑफिसर ने शुरुआती स्तर पर ही कांग्रेस उम्मीदवार को रेस से बाहर कर दिया, जो कि मनमानी है। उन्हें चुनाव मैदान में उतरने की इजाजत दी जानी चाहिए। अगर चुनाव में उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिलते हैं, तो वे हार स्वीकार कर लेंगी, क्योंकि लोकतंत्र की असली प्रक्रिया यही है।”

कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ एक तकनीकी कमी की आड़ में पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ताक पर नहीं रखा जा सकता।
दिग्विजय सिंह का कोर्ट पर बयान और इंदौर मेयर की ‘अवमानना’ वाली चेतावनी
इस पूरे मामले में असली राजनीतिक धमाका तब हुआ जब कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बड़ा बयान दे दिया।
दरअसल, दिग्विजय सिंह इस बात से नाराज थे कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर गुरुवार को तुरंत सुनवाई क्यों नहीं की और शुक्रवार की तारीख क्यों दी, जबकि गुरुवार शाम 4 बजे ही नाम वापसी का समय खत्म हो रहा था।
नाराज दिग्विजय सिंह ने कहा, “जब चोरी होती है तो सब मिले होते हैं। इसमें राज्य सरकार, केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मुझे भारी मन से कहना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है। जब कोर्ट को पता था कि गुरुवार शाम 4 बजे के बाद इस याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाएगा, तो सुनवाई शुक्रवार को क्यों रखी गई? यह पूरी तरह से मिली-जुली चोरी है।”

इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव का तीखा पलटवार:
दिग्विजय सिंह के इस बयान पर बीजेपी भड़क उठी है।
इंदौर के महापौर (मेयर) पुष्यमित्र भार्गव ने इस पर सख्त ऐतराज जताते हुए कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत के खिलाफ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद शर्मनाक है।
भार्गव ने तंज कसते हुए कहा, “दिग्विजय सिंह खुद ‘मिस्टर बंटाधार’ रहे हैं, जिन्होंने पहले एमपी का बंटाधार किया और अब कांग्रेस का कर रहे हैं। उनके पास बड़े-बड़े वकील हैं, फिर भी वे दो दिन तक सोते क्यों रहे? नामांकन में केस की जानकारी छुपाने की क्या जरूरत थी? नियम के मुताबिक चुनाव आयोग के पास इस मामले में अपील सुनने का अधिकार ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने तो फिर भी मामले को तुरंत हाथ में लिया, लेकिन कांग्रेस की अपनी लापरवाही थी।”

महापौर ने आगे चेतावनी दी कि यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) है।
उन्होंने कहा, “या तो सुप्रीम कोर्ट इस बयान पर खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई करे, नहीं तो हम खुद दिग्विजय सिंह के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज कराएंगे। ऐसा लगता है कि उन्हें भारत के संविधान पर भरोसा ही नहीं है।”
