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MP में UCC की दस्तक: CM बोले- मुस्लिम समाज से भी आए पॉजिटिव सुझाव, तलाक और लिव-इन जैसे बड़े मुद्दों पर टिकी सबकी नजर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

UCC Survey MP: मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने अपने कदम तेजी से आगे बढ़ा दिए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में साफ तौर पर संकेत दे दिए हैं कि प्रदेश सरकार आगामी शीतकालीन सत्र से पहले UCC विधेयक (बिल) को विधानसभा में पेश करने और उसे पास कराने की पूरी कोशिश में जुटी है।

मुख्यमंत्री का मानना है कि जब पूरा देश एक है, हमारा संविधान एक है, तो अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग नागरिक कानून होने की कोई जरूरत नहीं है। सभी नागरिकों को एक समान अधिकार मिलने चाहिए।

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इस बड़े बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में काम कर रही है।

सरकार ने इसके लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया है, जो समाज के हर वर्ग से बातचीत कर रही है और उनके विचार जान रही है।

लाखों लोगों ने दिए सुझाव, मुस्लिम समाज से भी मिला सकारात्मक रिस्पॉन्स

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात साझा करते हुए बताया कि UCC को लेकर अब तक प्रदेश के लाखों नागरिकों के सुझाव सरकार को मिल चुके हैं।

सबसे खास बात यह है कि इस कानून को लेकर मुस्लिम भाई-बहनों की तरफ से भी बहुत ही सकारात्मक और अच्छे सुझाव आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि सरकार किसी भी वर्ग की अनदेखी नहीं करेगी। जितने भी सुझाव मिल रहे हैं, उनका बहुत गहराई से अध्ययन किया जा रहा है।

इन सभी सुझावों को ध्यान में रखकर ही एक ऐसा मजबूत मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया जाएगा, जो समाज के हर व्यक्ति के लिए न्यायपूर्ण हो और जिसमें सभी की भावनाओं का सम्मान हो।

जमीन पर शुरू हुआ सर्वे: आंगनवाड़ी और शिक्षकों को मिली जिम्मेदारी

सीएम डॉ. मोहन यादव के कड़े निर्देशों के बाद प्रदेश के कोने-कोने में यूसीसी को लेकर एक व्यापक सर्वे अभियान शुरू कर दिया गया है।

यह सर्वे केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के हर गांव और हर घर तक पहुंच रहा है।

सरकार की कोशिश है कि इस कानून को बनाने में प्रदेश के हर एक नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

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इस सर्वे को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सरकारी शिक्षकों को सौंपी गई है।

इन कर्मचारियों को हर दिन कम से कम 10 फॉर्म भरवाने का टारगेट दिया गया है।

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फॉर्म भरवाने के बाद उसका स्क्रीनशॉट लेकर संबंधित अधिकारियों को भेजें, ताकि डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे।

 

क्या है फॉर्म में? इन 12 सवालों पर जनता से मांगा जा रहा जवाब

इस सर्वे के तहत जनता के बीच जो फॉर्म ले जाया जा रहा है, उसमें नागरिकों की बुनियादी जानकारियां जैसे उनका नाम, धर्म, जिला, पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया जा रहा है।

इसके साथ ही फॉर्म में कुल 12 विशेष सवाल शामिल किए गए हैं, जिन पर लोगों को केवल ‘हां’ या ‘ना’ में अपनी राय देनी है।

सुझावों में सबसे ज्यादा ध्यान महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधारों पर दिया गया है।

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सर्वे के ज्यादातर सवाल निम्नलिखित मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं:

  • तलाक की प्रक्रिया और नियम: तलाक को लेकर सभी धर्मों में एक समान और पारदर्शी व्यवस्था कैसे हो।
  • लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationships): लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के अधिकारों और उनके लिए नियमों को लेकर जनता की क्या राय है।
  • महिलाओं के अधिकार और संपत्ति: पैतृक संपत्ति में बेटियों और महिलाओं के समान अधिकारों को लेकर सवाल।
  • शादी और गोद लेने के नियम: शादी की उम्र और बच्चों को गोद लेने की प्रक्रियाओं को सभी के लिए एक जैसा बनाने पर राय।

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एमपी की सियासत में गर्माएगा मुद्दा

उत्तराखंड के बाद मध्यप्रदेश देश के उन बड़े राज्यों की कतार में शामिल होने जा रहा है, जो अपने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बेहद करीब पहुंच चुके हैं।

सरकार के इस बड़े फैसले और जमीनी स्तर पर शुरू हुए सर्वे के बाद अब प्रदेश की राजनीति भी गर्माने की पूरी संभावना है।

विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि समिति अपनी फाइनल रिपोर्ट में क्या सिफारिशें सौंपती है और सरकार विधानसभा में किस तरह का बिल पेश करती है।

देखना दिलचस्प होगा कि सरकार शीतकालीन सत्र से पहले इस ऐतिहासिक कानून को अमलीजामा पहनाने में कितनी कामयाब होती है।

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