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NCERT का बड़ा फैसला: अब 9वीं के बच्चे भी पढ़ेंगे 1975 की इमरजेंसी का ‘काला अध्याय’, नई किताब में शामिल हुआ चैप्टर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Emergency in NCERT Book: देश के स्कूली पाठ्यक्रम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है।

नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने पहली बार कक्षा 9वीं के Social Science के सिलेबस में साल 1975 से 1977 के बीच लगी देश की इमरजेंसी (आपातकाल) के काले दौर को शामिल किया है।

NCERT की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (Understanding Society: India and Beyond) में आपातकाल के उस दौर को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में पेश किया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह पहली बार है जब नौवीं कक्षा के छात्रों को इतने विस्तार से इस ऐतिहासिक घटना के बारे में पढ़ाया जाएगा।

इंदिरा सरकार के खिलाफ गुस्सा और इमरजेंसी की वजह

किताब में इस बात का साफ जिक्र किया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ आम जनता में असंतोष और नाराजगी बहुत तेजी से बढ़ रही थी।

देश में बेरोजगारी, लगातार बढ़ती महंगाई और सरकारी कुप्रबंधन (Mismanagement) के गंभीर आरोपों के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

हालात इतने बिगड़ गए कि जून 1975 में सरकार ने ‘आंतरिक अशांति’ को आधार बनाकर पूरे देश में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की घोषणा कर दी।

किताब बच्चों को समझाती है कि इस दौरान देश के नागरिकों के अधिकांश मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) सस्पेंड यानी निलंबित कर दिए गए थे।

मीडिया पर पाबंदी (प्रेस सेंसरशिप) लगा दी गई थी, जिससे सरकार के खिलाफ कुछ भी छापना मुमकिन नहीं था।

इसके साथ ही, विपक्ष के बड़े-बड़े राजनीतिक नेताओं और समाजसेवियों को जेलों में डाल दिया गया था।

किताब के अनुसार, यह वो दौर था जब देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव था और लोगों की आजादी पूरी तरह छिन गई थी।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण और जनता का जवाब

इस नए सिलेबस में ‘लोकनायक’ जयप्रकाश नारायण (JP) की भूमिका को बहुत ही प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।

किताब में बताया गया है कि कैसे जेपी ने छात्रों, युवाओं और आम लोगों को एकजुट किया।

उनके नेतृत्व में बिहार और गुजरात में बहुत बड़े जन आंदोलन खड़े हुए, जिसने तत्कालीन सरकार की नींव हिला दी।

किताब आगे बताती है कि 1977 में जब इमरजेंसी खत्म हुई, तो देश में फिर से आम चुनाव कराए गए।

भारतीय जनता ने अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करते हुए तत्कालीन सत्तारूढ़ सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

NCERT ने इस घटना को इस बात का सबसे बड़ा सबूत माना है कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें कितनी मजबूत हैं।

चुनाव आयोग की पीठ थपथपाई

इमरजेंसी के अलावा, इसी किताब के ‘इलेक्शंस’ (चुनाव) चैप्टर में भारत के चुनाव आयोग (ECI) की जमकर तारीफ की गई है।

किताब कहती है कि भारत जैसे विशाल देश में, जहां की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां इतनी जटिल हैं, वहां चुनाव कराना दुनिया के सबसे कठिन कामों में से एक है।

इसके बावजूद, चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ चुनाव संपन्न कराता है।

आंकड़ों के जरिए बच्चों को देश के लोकतंत्र का आकार समझाया गया है।

किताब के मुताबिक, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे।

इतने बड़े नेटवर्क को संभालना अपने आप में एक मिसाल है।

चुनाव आयोग निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट (RPA), आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct), EVM और VVPAT जैसी तकनीकों और नियमों का इस्तेमाल करता है।

लोकतंत्र के सामने आज के दौर के नए खतरे

किताब सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज के दौर की व्यावहारिक चुनौतियों से भी छात्रों को रूबरू कराती है।

इसमें लोकतंत्र के सामने मौजूद आधुनिक खतरों पर चर्चा की गई है, जैसे:

  • फेक न्यूज और गलत जानकारियां (Misinformation): सोशल मीडिया के जमाने में अफवाहें फैलाकर माहौल खराब करना।
  • सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान: विरोध के नाम पर देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और नियमों को तोड़ना।
  • सामाजिक बुराइयां: गरीबी, क्षेत्रवाद, जातिगत व सामाजिक भेदभाव, और लैंगिक असमानता (Gender Inequality)।

‘डेमोक्रेसी एंड यू’ और मीडिया की भूमिका

NCERT ने किताब में एक बिल्कुल नया सेक्शन जोड़ा है, जिसका नाम है— ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ (लोकतंत्र और आप)।

इसका मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को यह समझाना है कि एक नागरिक के तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी क्या भूमिका और जिम्मेदारी है।

इसी के साथ, मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताते हुए एक विशेष हिस्सा शामिल किया गया है।

इसमें लिखा गया है कि जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में मीडिया की भूमिका बेहद अहम है।

किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र को समझाने के लिए गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत के केस स्टडीज को भी शामिल किया गया है, ताकि बच्चे जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के काम करने के तरीके को सीख सकें।

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