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वेनेजुएला में 126 साल की सबसे बड़ी आपदा: कराकस में ब्लैकआउट, PM मोदी बोले- भारत साथ खड़ा है

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Venezuela Earthquake: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।

बुधवार की शाम वेनेजुएला के लोगों के लिए काल बनकर आई, जब महज 60 सेकंड (1 मिनट) के भीतर एक के बाद एक दो बेहद शक्तिशाली भूकंप के झटकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।

पहला झटका बुधवार शाम 6:34 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.2 मापी गई।

लोग संभल पाते, इससे ठीक एक मिनट बाद यानी 6:35 बजे 7.5 तीव्रता का दूसरा और पहले से भी ज्यादा खतरनाक झटका आया।

जिस वक्त वेनेजुएला में धरती डोल रही थी, उस समय भारत में गुरुवार तड़के के 3:34 और 3:35 बज रहे थे।

इन दोनों झटकों ने वेनेजुएला के कई हंसते-खेलते शहरों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है।

10 हजार से ज्यादा लोगों की जान जाने की आशंका

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की रिपोर्ट ने इस आपदा की भयावहता को लेकर एक डरावना अनुमान जारी किया है।

USGS के मुताबिक, इस भूकंप में 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की 44% आशंका है।

वहीं, 30% आशंका इस बात की भी है कि मरने वालों का आंकड़ा एक लाख को पार कर सकता है।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक 32 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 700 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

मलबे को हटाने का काम जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।

तबाही का मंजर: झुक गईं इमारतें, एयरपोर्ट की छत गिरी

भूकंप का केंद्र वेनेजुएला की राजधानी कराकस से करीब 290 किलोमीटर पश्चिम में था।

केंद्र के पास होने की वजह से कई शहरों में बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं, जबकि सैकड़ों इमारतें खतरनाक तरीके से एक तरफ झुक गई हैं।

राजधानी कराकस के मुख्य एयरपोर्ट की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया, जिससे वहां चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए।

पीएम मोदी ने बढ़ाया मदद का हाथ

इस भीषण आपदा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर लिखा: “भारत इस बेहद मुश्किल समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। इस संकट से उबरने के लिए भारत जरूरत पड़ने पर हरसंभव मानवीय सहायता और राहत सामग्री देने के लिए पूरी तरह तैयार है।”

देश में नेशनल इमरजेंसी लागू

यह वेनेजुएला में पिछले 126 साल में आया सबसे बड़ा और विनाशकारी भूकंप है।

इससे पहले साल 1900 में यहां 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था।

हालात की गंभीरता को देखते हुए देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने तुरंत पूरे देश में ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ (National Emergency) की घोषणा कर दी है।

उत्तरी इलाके के तटीय राज्य ‘ला गुएरा’ को सबसे ज्यादा प्रभावित यानी ‘डिजास्टर जोन’ घोषित किया गया है।

दुनियाभर से उमड़ी मदद, 8 पड़ोसी देश आए आगे

वेनेजुएला की इस पुकार पर दुनिया के कई देश मदद के लिए सामने आए हैं।

दक्षिण अमेरिका के 8 बड़े देशों—ब्राजील, अर्जेंटीना, पेरू, मेक्सिको, कोलंबिया, बोलीविया, कोस्टा रिका और एल सल्वाडोर ने अपनी संवेदनाएं भेजी हैं।

इन सभी देशों ने साफ कहा है कि वे अपनी रेस्क्यू टीमें, डॉक्टरों की टीम और जरूरी राहत सामग्री भेजने के लिए तैयार हैं।

अमेरिका, डोमिनिकन रिपब्लिक और मेक्सिको की बचाव टीमें जल्द ही वेनेजुएला पहुंचने वाली हैं।

विपक्ष ने घेरा, कहा- सरकार के बस की बात नहीं

इस महा-आपदा के बीच वेनेजुएला में राजनीति भी शुरू हो गई है।

देश के मुख्य विपक्षी नेता एडमंडो गोंजालेज उरुतिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस तरह की विशाल आपात स्थिति से निपटने की क्षमता मौजूदा सरकार के पास नहीं है।

उन्होंने कहा कि भूकंप के कई घंटे बीत जाने के बाद भी सरकार के पास नुकसान का सही आंकड़ा नहीं है और उनकी राहत व्यवस्था जनता की जरूरतों के सामने बेहद कम है।

वेनेजुएला को इस संकट से निकलने के लिए पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर रहना होगा।

ब्लैकआउट: बिजली गुल, गैस और मेट्रो सेवाएं ठप

भूकंप के तुरंत बाद सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने बड़े कदम उठाए हैं।

राजधानी कराकस समेत पड़ोसी राज्य मिरांडा में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

कई इलाकों में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर गिरने से ब्लैकआउट की स्थिति है, यानी चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ है।

इसके अलावा, भूकंप की वजह से पानी की बड़ी पाइपलाइनें फट गई हैं, जिससे सड़कों पर पानी भर गया है।

आगजनी या बड़े विस्फोटों को रोकने के लिए गृह मंत्री डियोसदादो काबेलो ने प्रभावित इलाकों में गैस सप्लाई को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

क्यों इतना खतरनाक होता है 7.5 तीव्रता का भूकंप?

इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं।

अगर एक सामान्य इंसान जमीन पर 10 किलो के हथौड़े से वार करे और दूसरा इंसान 300 किलो के भारी-भरकम हथौड़े से मारे, तो दोनों से जमीन हिलेगी।

लेकिन 300 किलो वाले हथौड़े का असर आसपास की हर चीज को तबाह कर देगा। भूकंप के साथ भी ऐसा ही होता है।

7.5 तीव्रता का भूकंप, 6.5 तीव्रता के भूकंप के मुकाबले 32 गुना ज्यादा ताकत से धरती को हिलाता है।

यही वजह है कि इसमें सीमेंट और कंक्रीट से बने मजबूत पुल, चौड़ी सड़कें और बड़ी इमारतें भी खुद को संभाल नहीं पातीं और जमींदोज हो जाती हैं।

टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव है असली वजह:

वेनेजुएला भौगोलिक रूप से एक ऐसे डेंजर जोन में स्थित है, जहां जमीन के नीचे दो बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें—’कैरीबियन प्लेट’ और ‘साउथ अमेरिकन प्लेट’ आपस में मिलती हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार इन प्लेटों के बीच की फॉल्ट लाइन (दरार) अचानक हॉरिजॉन्टिली (आड़े रूप में) बहुत तेजी से खिसक गई।

इस अचानक हुई हलचल की वजह से ही धरती पर इतना बड़ा झटका महसूस हुआ।

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी तेज ‘आफ्टरशॉक्स’ (भूकंप के बाद के झटके) आ सकते हैं, इसलिए लोगों को जर्जर हो चुकी इमारतों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

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