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वाहन चालकों को बड़ी राहत: अब नए हाईवे पर 60 किमी से पहले नहीं मिलेगा टोल बूथ, जानिए क्या है सरकार का नया प्लान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Toll Tax New Rules: अगर आप अक्सर कार या किसी अन्य वाहन से हाईवे पर सफर करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद अच्छी खबर है।

केंद्र सरकार ने हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों को एक बड़ी राहत दी है।

अब देश में बनने वाले किसी भी नए हाईवे या एक्सप्रेसवे पर 60 किलोमीटर की दूरी से पहले कोई भी टोल बूथ (Toll Plaza) नहीं बनाया जा सकेगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में 24 जून को एक आधिकारिक गाइडलाइन यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दी है।

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इस नए नियम का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा और उनका सफर भी बिना किसी रुकावट के पूरा हो सकेगा।

अभी क्या है जमीनी हकीकत और दिक्कतें?

फिलहाल देश में हाईवे पर सफर करते समय वाहन चालकों को सबसे बड़ी शिकायत यही रहती है कि थोड़ी-थोड़ी दूरी पर टोल टैक्स वसूलने के लिए बूथ बने हुए हैं।

आंकड़ों की बात करें तो देश में इस समय लगभग 130 ऐसी जगहें हैं, जहां यात्रियों को महज 60 किलोमीटर के दायरे में दो बार टोल टैक्स चुकाना पड़ता है।

हद तो तब हो जाती है जब इनमें से करीब 22 टोल प्लाजा ऐसे हैं जो एक-दूसरे से 30 किलोमीटर से भी कम की दूरी पर स्थित हैं।

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उदाहरण के लिए, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजियाबाद के छिजारसी टोल प्लाजा और एक्सप्रेसवे के एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स के बीच की दूरी बहुत कम है, जिसे लेकर स्थानीय लोग सालों से विरोध कर रहे हैं।

इसी तरह अंबाला-चंडीगढ़ रूट (NH-152 और NH-44) पर भी बहुत कम दूरी में कई टोल बूथ बने हुए हैं।

इस वजह से एक छोटे से सफर के लिए भी लोगों की जेब दो बार ढीली हो जाती है।

जनता की इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।

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क्या कहती है मंत्रालय की नई SOP?

सरकार द्वारा जारी किए गए नए नियमों के मुताबिक, अब कोई भी प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनी या ठेकेदार अपनी मर्जी से 60 किलोमीटर से कम दूरी पर टोल प्लाजा नहीं बना पाएगा।

अगर किसी खास वजह से इतनी कम दूरी पर टोल बूथ बनाना बेहद जरूरी है, तो इसके लिए कंपनी को पहले एक विशेष ‘टोल कमेटी’ से लिखित और औपचारिक मंजूरी लेनी होगी।

यह अनुमति भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही लेनी होगी।

इसके अलावा, यदि कोई टोल प्लाजा किसी शहर की सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे में बनाना है, तो उसके लिए भी यही कड़ा नियम लागू होगा।

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नई SOP में पारदर्शिता (Transparency) बढ़ाने के लिए एक और बड़ा नियम जोड़ा गया है।

अब हाईवे का निर्माण कार्य 95 फीसदी पूरा होने से पहले ही टोल टैक्स वसूलने की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी करना अनिवार्य होगा।

साथ ही, नियमों में किसी भी तरह की छूट पाने के लिए कंपनियों को एडवांस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा।

मनमानी रोकने के लिए कौन रखेगा नजर?

अक्सर देखा जाता था कि सड़क बनाने वाली कंपनियां अपनी सुविधा और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में कहीं भी टोल नाका खड़ा कर देती थीं।

इस मनमानी को रोकने के लिए सरकार ने एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है।

इस कमेटी के अध्यक्ष नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के मेंबर (कमर्शियल ऑपरेशन) होंगे।

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इस हाई-पावर कमेटी में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अपर सचिव, संयुक्त सचिव (टोल) और एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) जैसे कई बड़े और वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं।

यानी अब टोल बूथ कहां बनेगा और कहां नहीं, इसका अंतिम फैसला कोई प्राइवेट कंपनी नहीं बल्कि यह सरकारी कमेटी तय करेगी।

दिल्ली में भी टोल नियमों को लेकर सख्ती

हाईवे के साथ-साथ देश की राजधानी दिल्ली में भी टोल टैक्स वसूलने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी हो चुकी है।

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने टोल नाकों को लेकर नए उपनियम (Bye-laws) तैयार किए हैं, जिसे गुरुवार को सदन से मंजूरी मिल गई है।

अब इस प्रस्ताव को दिल्ली सरकार के पास अंतिम मुहर के लिए भेजा जाएगा।

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इस नियम के लागू होते ही टोल टैक्स की चोरी करने वाले या नियम तोड़ने वाले वाहनों को सीधे ई-नोटिस (E-Notice) भेजे जाएंगे, जिससे दिल्ली के बॉर्डर पर जाम की स्थिति से भी राहत मिलेगी।

पारदर्शिता की ओर बढ़ता कदम

सरकार का यह फैसला भले ही पहली नजर में छोटा बदलाव लगे, लेकिन रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए यह एक बड़ी राहत है।

इससे न सिर्फ लोगों के पैसों की बचत होगी, बल्कि बार-बार टोल पर लगने वाले लंबे जाम और समय की बर्बादी से भी मुक्ति मिलेगी।

नए नियमों से पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और ठेकेदारों की मनमानी पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।

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