Ram Mandir Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान और चंदे में भारी हेराफेरी के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के हाथ कुछ ऐसे पुख्ता सबूत लगे हैं, जिससे साफ हो गया है कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी किसी एक दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत लगातार की जा रही थी।
42 दिनों का ‘चोरी चक्र’ जिसने सबको चौंकाया
SIT की जांच रिपोर्ट में जो सबसे हैरान करने वाला खुलासा हुआ है, वह है चोरी की टाइमलाइन।
जांच अधिकारियों ने जब 27 अप्रैल से लेकर 05 जून के बीच की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को बारीकी से खंगाला, तो उनके होश उड़ गए।

महज 42 दिनों के भीतर मंदिर के भीतर एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 70 बार चोरी की वारदातों को अंजाम दिया गया।
सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई तस्वीरें साफ गवाही दे रही हैं कि आरोपी कितनी बेखौफ होकर इस काम को अंजाम दे रहे थे।
यह एक संगठित नेटवर्क था, जो लगातार मंदिर की संपत्ति को चूना लगा रहा था।

नोटों की गिनती वाले कमरे में चल रहा था खेल
आखिर इतनी बड़ी सुरक्षा के बीच यह सब कैसे हो रहा था?
SIT ने जब मंदिर के ‘गणना कक्ष’ (जहां चढ़ावे के पैसे गिने जाते हैं) की जांच की, तो वहां नियमों की धज्जियां उड़ती मिलीं।
पैसों की गिनती और उसके रख-रखाव का तरीका बेहद लचर और कमजोर था।
किसका क्या काम है, किसकी क्या जिम्मेदारी है, इसे लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कोई स्पष्टता नहीं थी।
आंतरिक नियंत्रण प्रणाली इतनी फ्लॉप साबित हुई कि चोर आसानी से अपनी जेबें भरते रहे और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई।

तीन साल के ऑडिट में भी ‘लाल निशान’
यह गड़बड़ी अचानक नहीं हुई। SIT ने जब वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट खंगाली, तो पता चला कि कमियों के संकेत बहुत पहले से मिल रहे थे।
दानपात्रों (हुंडियों) की संख्या और सरकारी कागजों में दर्ज रिकॉर्ड के आंकड़ों में बड़ा अंतर था। जितने बड़े पैमाने पर सुरक्षा होनी चाहिए थी, उतनी नहीं थी।
सीसीटीवी कैमरों की कवरेज में कई ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (जहां कैमरा न देख पाए) थे।
सीधे शब्दों में कहें तो सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गए थे।

चांदी की ईंटों की सच्चाई आई सामने
इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर चांदी की ईंटों को लेकर कई तरह की अफवाहें और दावे तैर रहे थे। हालांकि, SIT ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
सोशल मीडिया पर अनुराग रस्तोगी द्वारा दान की गई चांदी की ईंटों को लेकर जो बातें कही जा रही थीं, वे बेबुनियाद निकलीं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, 21 जुलाई 2020 और 28 जुलाई 2020 को दो बार में कुल 38 किलो चांदी मिली थी।
इसके बाद 29 जुलाई 2020 को 25.576 किलोग्राम चांदी की ईंटें दान में मिली थीं, जिन्हें सुरक्षित गलाकर बैंक के लॉकर में रखवा दिया गया है। यानी चांदी की ईंटें पूरी तरह सुरक्षित हैं।

चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई
मामले की गंभीरता और चौतरफा दबाव को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा भूचाल आ गया है।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अहम सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
दोनों का कहना है कि वे इस पूरे घटनाक्रम से आहत हैं और नैतिकता के आधार पर पद छोड़ रहे हैं।
देश के इतने बड़े और संवेदनशील मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम है।

चंपत राय के करीबी ‘टिन्नू’ समेत 8 गिरफ्तार
इस पूरे चंदा चोरी कांड में श्रीराम जन्मभूमि थाने में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस और SIT की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 8 लोगों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
गिरफ्तार होने वालों में चंपत राय का बेहद करीबी माना जाने वाला रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव भी शामिल है।

उसके अलावा अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष यादव को गिरफ्तार किया गया है।
इन सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
फिलहाल पुलिस इन सभी से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल के पीछे और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
