Cockroaches Mice in Sampark Kranti: भारतीय रेलवे अक्सर अपनी ट्रेनों को आधुनिक और ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने का दावा करता है, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
ताजा मामला देश की प्रीमियम ट्रेनों में शुमार ‘कर्नाटका संपर्क क्रांति एक्सप्रेस’ का है, जहाँ रेलवे की लापरवाही के कारण यात्रियों को बेहद कड़वा अनुभव हुआ।
ट्रेन के सबसे महंगे और प्रीमियम कोच यानी ‘एसी फर्स्ट क्लास’ (AC 1st Class) में सफर कर रहे यात्रियों को पूरी रात चूहों और कॉकरोच के आतंक के बीच काटनी पड़ी।
हैरान करने वाली बात यह है कि यात्रियों ने ट्रेन के स्टाफ से लेकर रेल मंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन सफर खत्म होने तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

भोपाल से कोचीपुरम का सफर बना बुरा सपना
यह पूरा वाकया भोपाल से तमिलनाडु के कोचीपुरम जा रहे यात्रियों के साथ हुआ।
पीड़ित यात्री अनिल तिवारी ने बताया कि उन्होंने आरामदायक सफर के लिए भारी-भरकम किराया चुकाकर एसी फर्स्ट क्लास के ‘ए-केबिन’ का टिकट लिया था।
उन्हें उम्मीद थी कि प्रीमियम क्लास में बेहतरीन सुविधाएं और सफाई मिलेगी। लेकिन जैसे ही रात हुई, केबिन का नजारा बदल गया।
पूरे केबिन में चूहे और कॉकरोच खुलेआम घूमने लगे। चूहों की उछल-कूद और कॉकरोच की वजह से केबिन में गंदगी और बदबू फैल गई।
यात्रियों ने तुरंत इसकी शिकायत ऑनबोर्ड ट्रेन स्टाफ से की। लेकिन स्टाफ ने उनकी मदद करने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया।

अनिल तिवारी का आरोप है कि स्टाफ ने उल्टा यात्रियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
कर्मचारियों ने कहा, “आप लोग केबिन के अंदर खाना खाते हैं, इसलिए खाने की महक से चूहे आते हैं।”
यात्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर इतनी महंगी टिकट लेने के बाद भी रेलवे की ऐसी बदहाल सुविधाएं हैं, तो बेहतर होगा कि लोग ट्रेनों में सफर करना ही बंद कर दें।

‘बालों में घुसे कॉकरोच, शरीर पर दौड़ते रहे चूहे’
इसी केबिन में सफर कर रहे एक अन्य यात्री शिवांश तिवारी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए रेलवे की व्यवस्था को शर्मनाक बताया।
उन्होंने कहा कि चूहों और कॉकरोच के कारण उनका पूरा परिवार रातभर एक पल के लिए भी सो नहीं सका।
शिवांश के मुताबिक, हालात इतने बदतर थे कि चूहे सीटों पर और सोते हुए यात्रियों के शरीर के ऊपर से गुजर रहे थे।
वहीं, कॉकरोच रेंगते हुए उनके बालों तक में घुस गए।

शिकायत करने पर स्टाफ ने सिर्फ खानापूर्ति की। कर्मचारियों ने केबिन में चूहों को पकड़ने के लिए एक ‘रैट ट्रैप’ (चूहेदानी) लाकर रख दिया।
शिवांश ने सवाल उठाया कि जब दर्जनों चूहे पूरे केबिन और सीटों पर खुलेआम दौड़ रहे हों, तो महज एक ट्रैप रख देने से क्या समाधान हो जाता?
स्टाफ की दलील पर भड़कते हुए उन्होंने कहा, “क्या एसी फर्स्ट क्लास का किराया देने वाले यात्री ट्रेन में खाना भी नहीं खा सकते? यह कैसी व्यवस्था है?”

सोशल मीडिया पर रेल मंत्री से गुहार, फिर भी नतीजा ‘सिफर’
जब ट्रेन स्टाफ ने हाथ खड़े कर दिए, तो यात्रियों ने डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया।
अनिल तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर केबिन के भीतर की बदहाली का जिक्र करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करके शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने रेलवे के ‘वर्ल्ड क्लास कोच’ के दावों पर सीधे सवाल खड़े किए।

ट्वीट के बाद रेलवे सेवा (Railway Seva) की तरफ से हमेशा की तरह तुरंत जवाब आया।
उनसे पीएनआर (PNR) नंबर मांगा गया और कहा गया कि शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है।
इसके अलावा यात्रियों ने रेलवे की आधिकारिक हेल्पलाइन 139 पर भी कॉल करके अपनी परेशानी दर्ज कराई। लेकिन डिजिटल सक्रियता के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ।
यात्रियों का कहना है कि पूरी यात्रा के दौरान उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया और उन्हें उसी नरक जैसे केबिन में सफर पूरा करना पड़ा।

रेलवे प्रशासन की सफाई और उठते सवाल
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता नवल अग्रवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और यात्रियों को हुई असुविधा के लिए वे इस पूरे प्रकरण की तुरंत जांच करवाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी यात्री को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कर्नाटका संपर्क क्रांति एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेन के सबसे महंगे कोच में इस तरह की घटना होना भारतीय रेलवे के मैनेजमेंट और साफ-सफाई के दावों की पोल खोलता है।
महंगे टिकट खरीदने के बाद भी अगर यात्रियों को कीड़े-मकोड़ों और चूहों के बीच रात गुजारनी पड़े और शिकायत के बाद भी कोई त्वरित कार्रवाई न हो, तो यात्रियों का भरोसा टूटना लाजमी है।
