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MP जंगल सफारी पर ‘मानसून ब्रेक’: आज के बाद नहीं देख पाएंगे बाघ, 1 अक्टूबर से पहले नहीं मिलेगा मौका

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Jungle Safari Monsoon Break: अगर आप मध्य प्रदेश के घने जंगलों में घूमना पसंद करते हैं, बाघों की दहाड़ सुनना चाहते हैं या फिर मानसून की दस्तक के बीच सफारी का मजा लेना चाहते हैं, तो अगले 3 महीने तक ऐसा नहीं कर पाएंगे।

आज सूरज ढलने के साथ ही मध्य प्रदेश के सभी मशहूर नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के कोर एरिया के गेट पर्यटकों के लिए बंद हो गए हैं।

इसके बाद सैलानियों को दोबारा जंगलों का रुख करने के लिए पूरे तीन महीने का लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

वन विभाग के इस फैसले के बाद कूनो नेशनल पार्क, कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा, माधव, रातापानी, रानी दुर्गावती और संजय-डुबरी टाइगर रिजर्व में सन्नाटा पसर जाएगा।

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हालांकि, वन्यजीव प्रेमियों के लिए थोड़ी राहत की बात यह है कि कुछ चुनिंदा नेशनल पार्कों के बफर जोन (बाहरी इलाके) मानसून के दौरान भी खुले रहेंगे, जहां सीमित संख्या में सफारी की जा सकेगी।

लेकिन मुख्य जंगल (कोर एरिया) पूरी तरह ब्लॉक रहेगा।

आखिर क्यों हर साल मानसून में बंद कर दिए जाते हैं जंगल?

कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि जब मानसून में प्रकृति अपनी सबसे खूबसूरत छटा बिखेरती है, चारों तरफ हरियाली होती है, तो ऐसे में पर्यटन को क्यों रोक दिया जाता है?

वन विभाग के अधिकारियों ने इसके पीछे दो सबसे बड़े और महत्वपूर्ण कारण बताए हैं:

1. वन्यजीवों का ‘प्राइवेट टाइम’ (प्रजनन काल):

यह समय जंगलों में रहने वाले जानवरों, खासकर बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों का मुख्य ब्रीडिंग सीजन यानी प्रजनन काल होता है।

इस संवेदनशील समय में जानवरों को पूरी तरह से शांत और सुरक्षित माहौल की जरूरत होती है।

अगर जंगलों में लगातार गाड़ियां चलती रहेंगी और पर्यटकों का शोर-शराबा होगा, तो उनकी प्राकृतिक गतिविधियों में खलल पड़ेगा।

वन्यजीवों के संरक्षण के लिहाज से उन्हें यह ‘प्राइवेसी’ देना बेहद जरूरी है।

Image Credit: MP Tourism
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2. रास्तों का टूटना और सुरक्षा के इंतजाम:

बारिश के मौसम में जंगलों के कच्चे और पथरीले रास्ते बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

कई जगहों पर छोटे-मोटे नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे सफारी वाहनों के फंसने या पलटने का खतरा बढ़ जाता है।

इन तीन महीनों के दौरान वन विभाग जंगलों के अंदरूनी रास्तों की मरम्मत, पुलियों का रख-रखाव और सुरक्षा चौकियों को मजबूत करने का काम करता है।

विशेष नोट: वन विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर देश में मानसून समय से पहले बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है या मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है, तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पार्कों को तय तारीख (30 जून) से पहले भी बंद किया जा सकता है।

आखिरी दिनों में उमड़ी पर्यटकों की भारी भीड़

जैसे ही पर्यटकों को पता चला कि 30 जून के बाद सफारी बंद होने वाली है, मध्य प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में बुकिंग के लिए मारामारी मच गई।

जून के आखिरी हफ्ते में कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच जैसे मशहूर पार्कों में पैर रखने की जगह नहीं थी।

दूर-दूर से आए सैलानी मानसून की पहली फुहारों के बीच जंगल का दीदार करने पहुंचे।

वन विभाग ने भी इस दौरान पर्यटकों से खास अपील की है।

Image Credit: MP Tourism

विभाग का कहना है कि जो भी सैलानी आखिरी वक्त में सफारी का लुत्फ उठा रहे हैं, वे जंगल के नियमों का कड़ाई से पालन करें।

प्लास्टिक का कचरा जंगल में न फेंकें, जानवरों के करीब जाकर उन्हें परेशान न करें और हमेशा गाइड के निर्देशों को मानें।

जिम्मेदार पर्यटन से ही हम प्रकृति और वन्यजीवों को सुरक्षित रख सकते हैं।

Image Credit: MP Tourism
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कब दोबारा खुलेगा बाघों का संसार?

अगर आप इस बार सफारी का मौका चूक गए हैं, तो निराश होने की जरूरत नहीं है।

मानसून का सीजन बीतने के बाद, 1 अक्टूबर से प्रदेश के सभी नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व एक बार फिर पूरी भव्यता के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए खोल दिए जाएंगे।

तब तक के लिए प्रकृति और जानवरों को इंसानी दखल से दूर, खुलकर सांस लेने दीजिए!

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