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MP में भारी बारिश से जनजीवन बेपटरी: ग्वालियर-चंबल में रेड और ऑरेंज अलर्ट, जाने अपने शहर के मौसम का हाल

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

मध्य प्रदेश में इन दिनों मानसून पूरी तरह मेहरबान है।

राज्य के लगभग सभी हिस्सों में काले बादलों का डेरा है और कहीं रिमझिम तो कहीं मूसलाधार बारिश का दौर जारी है।

बुधवार को प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में हुई भारी बारिश ने जहां एक तरफ मौसम को सुहाना बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त भी कर दिया है।

नदी-नाले उफान पर हैं, सड़कें तालाब बन चुकी हैं और कई इलाकों का संपर्क टूट गया है।

मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए भी कड़ा अलर्ट जारी किया है।

खासकर ग्वालियर-चंबल संभाग में भारी तबाही की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

आइए जानते हैं कि आपके इलाके में मौसम का क्या हाल रहने वाला है।

ग्वालियर-चंबल समेत इन जिलों में अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, मध्य प्रदेश के ऊपर इस समय मजबूत वेदर सिस्टम एक्टिव है।

इसी के चलते गुरुवार को भिंड जिले में अति भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है।

यहां रहने वाले लोगों को बिना जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा ग्वालियर, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, राजगढ़, आगर-मालवा और रतलाम में ‘ऑरेंज अलर्ट’ रहेगा, यानी यहां भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

उज्जैन-सागर संभाग में भी अलर्ट

उत्तरी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों जैसे नीमच, उज्जैन, शाजापुर, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना में भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश का पूरा उत्तरी हिस्सा पानी-पानी हो सकता है।

राजधानी भोपाल समेत इन जिलों में होगी बौछारें

गुरुवार को राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग समेत राज्य के लगभग सभी जिलों (जैसे सीहोर, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, सतना और सीधी) में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहेगा।

जमीनी हालात: कहीं डूबे पुल, कहीं जान जोखिम में

बुधवार को हुई बारिश के बाद प्रदेश के कई जिलों से डराने वाली तस्वीरें सामने आईं।

* शाजापुर: यहां ग्रामीण इलाकों में नदी-नाले उफान पर आ गए। इसके बावजूद स्कूल के शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करते हुए स्कूल पहुंचे।

* रतलाम और सेंधवा: रतलाम के शहरी इलाकों में बने अंडरब्रिज पानी में पूरी तरह डूब गए, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया। वहीं सेंधवा के ग्रामीण अंचलों में नदी-नालों का पानी सड़कों पर आने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है।

* कहां कितनी बारिश हुई: पिछले 24 घंटों में दमोह में पौने दो इंच, नर्मदापुरम में 1.1 इंच, खजुराहो और टीकमगढ़ में पौन इंच के करीब पानी गिरा। इसके अलावा इंदौर, जबलपुर, धार, उज्जैन और सागर में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई।

तापमान में भारी गिरावट

लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के चलते प्रदेश के दिन के तापमान में बड़ी गिरावट आई है।

बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर सबसे ठंडा रहा, जहां पारा सिर्फ 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

जबलपुर में 28.5 डिग्री, उज्जैन में 29.2 डिग्री और राजधानी भोपाल में तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश में सबसे कम तापमान छिंदवाड़ा में 25.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

आंकड़ों का खेल: जून का सूखा जुलाई ने किया पूरा

यह मानसून सीजन बेहद दिलचस्प रहा है। पूरे जून के महीने में आंधी-तूफान तो आए, लेकिन बारिश उम्मीद से 30% कम हुई।

ऐसा लग रहा था कि सूखा पड़ेगा, लेकिन जुलाई की शुरुआत होते ही बादलों ने ऐसा यू-टर्न लिया कि पिछले 8 दिनों में ही सारा कोटा पूरा हो गया।

वर्तमान में मध्य प्रदेश में सामान्य से 10 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है।

अब तक राज्य में औसतन 223.7 मिमी (लगभग 9 इंच) पानी बरस चुका है, जबकि इस समय तक सामान्य बारिश का आंकड़ा 202.5 मिमी होता है।

इसमें भी पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 30% ज्यादा पानी गिरा है, जबकि पूर्वी हिस्से में अभी भी 10% की कमी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जुलाई का महीना पूरे मानसून सीजन का सबसे अहम महीना होता है।

कुल बारिश का करीब 40% हिस्सा इसी महीने में बरसता है। उदाहरण के लिए, भोपाल में सालभर में होने वाली 39 इंच बारिश में से अकेले 14 इंच जुलाई में होती है। वहीं जबलपुर में इस महीने 17 इंच से ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड है।

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