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ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े तार तो भाई के सपोर्ट में उतरे जीतू पटवारी, सरकार से पूछा- क्या राजनीतिक केस होने से कोई हिस्ट्रीशीटर बन जाता है?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Jitu Patwari brother arrested: मध्यप्रदेश की राजनीति में इस वक्त घमासान मचा हुआ है।

9 जुलाई को इंदौर पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC चीफ) जीतू पटवारी के छोटे भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी को ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिया था।

पुलिस का दावा है कि ब्राउन शुगर के साथ रंगे हाथों पकड़े गए दो तस्करों ने पूछताछ में नाना पटवारी का नाम लिया था, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई।

पुलिस ने नाना को करीब 12 घंटे तक हिरासत में रखा। पूछताछ के बाद देर रात उन्हें छोड़ा गया।

गुरुवार को हुई इस हिरासत और देर रात तक चली पूछताछ ने सूबे की सियासत में उबाल ला दिया है।

कांग्रेस ने कहा बदले की राजनीति

जहाँ एक तरफ पुलिस इसे कानून सम्मत कार्रवाई बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर बीजेपी सरकार की “बदले की राजनीति” करार दिया है।

पूछताछ के बाद जब देर रात नाना पटवारी को छोड़ा गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद शुक्रवार सुबह जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

दोनों भाइयों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए और इसे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया।

नाना पटवारी का कबूलनामा: ‘3-4 साल पहले ड्रग्स लेता था, पर इस बार मुझे फंसाया गया’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नाना पटवारी ने मीडिया के सामने एक चौंकाने वाला सच स्वीकार किया।

उन्होंने साफ कहा, “मैं तीन-चार साल पहले ड्रग्स लेता था, वह मेरी एक बड़ी गलती थी। लेकिन अब मैं पूरी तरह सुधर चुका हूं, यहां तक कि मैं अब शराब को हाथ भी नहीं लगाता।”

जब उनसे ड्रग पेडलर गोलू चंदेरी उर्फ इमरान और संजय कौशल उर्फ रानी भाई के साथ संपर्कों को लेकर सवाल पूछा गया, तो नाना ने सफाई देते हुए कहा कि ये दोनों उनकी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं।

उन्होंने कहा, “नेता होने के नाते मुझे सब जानते हैं। गोलू पटाखों का व्यापार करता है और रानी का एक गैरेज है, जहां मेरी गाड़ियां ठीक होती हैं। सिर्फ जान-पहचान होने का मतलब यह नहीं कि मैं उनके काले धंधे में शामिल हूं।”

नाना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सुबह करीब 9:30 से 10:00 बजे के बीच सनशाइन के पास से पकड़ा गया था।

पुलिस ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया और दिनभर इंदौर के आस-पास गाड़ी में घुमाती रही। जब उन्होंने वजह पूछी तो कोई जवाब नहीं मिला।

देर रात उन्हें राजेंद्र नगर थाने ले जाया गया और आरोपियों के सामने बैठाकर बस इतना पूछा गया कि क्या तुम इन्हें जानते हो?

सच तो यह है मेरी कोई गलती नहीं है मुझे बस जीतू पटवारी का भाई होने की सजा मिली है। 

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भाई के बचाव में उतरे PCC चीफ जीतू पटवारी

जीतू पटवारी ने इस पूरी कार्रवाई को सरकारी तंत्र का दुरुपयोग बताया।

उन्होंने मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके परिवार और करीबियों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

जीतू पटवारी ने कहा, “मेरे भाई का इस ड्रग्स केस से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार हमें डराने के लिए कभी हमारे वेयरहाउस पर नोटिस भेजती है, तो कभी अवैध कॉलोनी काटने का फर्जी आरोप लगाती है।”

9 आपराधिक मामलों का भी दिया जवाब

नाना पटवारी पर दर्ज 9 आपराधिक मामलों को लेकर जब सवाल उठा, तो जीतू पटवारी ने एक-एक कर सबका हिसाब दिया।

उन्होंने बताया कि इन 9 मामलों में से 5 केस साल 2017 के किसान आंदोलन के समय के हैं, जो पूरी तरह राजनीतिक थे।

इसके अलावा तेजाजी नगर थाने का जमीन विवाद भी फर्जी है, जिसमें पुलिस आज तक कोर्ट में चालान पेश नहीं कर पाई है।

बाकी के दो मामले चुनाव के समय के आपसी विवाद के हैं, जो दोनों पक्षों पर दर्ज हुए थे।

जीतू पटवारी ने कड़े शब्दों में पूछा कि अगर किसी पर सिर्फ राजनीतिक आंदोलन के केस दर्ज हों, तो क्या वह हिस्ट्रीशीटर हो जाता है?

उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस सरकार के इन हथकंडों से डरेगी नहीं, बल्कि डटकर मुकाबला करेगी।

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कांग्रेस का पलटवार: ‘विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश’

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है।

हाल ही में कांग्रेस ने प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार और उज्जैन जमीन खरीद घोटाले को लेकर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी।

कांग्रेस का आरोप है कि इसी आंदोलन से घबराकर सरकार नाना पटवारी पर झूठे आरोप लगाकर दबाव बनाने की राजनीति कर रही है।

राज्यसभा सांसद और सीनियर वकील विवेक तन्खा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

मामले की शुरुआत इंदौर की राजेंद्र नगर पुलिस की एक रूटीन चेकिंग से हुई।

डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, पुलिस टीम को रेतमंडी चौराहा स्थित डी-मार्ट के पास कुछ संदिग्ध हलचल दिखाई दी।

पुलिस ने घेराबंदी करके इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और रोनी नाम के दो युवकों को दबोच लिया।

जब इनकी तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए। उनके पास से करीब 10 ग्राम कीमती ‘ब्राउन शुगर’ बरामद हुई।

पुलिस ने जब इन दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने ड्रग्स के इस खेल में दो बड़े नाम उगल दिए—पहला नाम था कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी और दूसरा मानव गंगवानी।

आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस तुरंत एक्शन में आई और गुरुवार दोपहर नाना पटवारी को हिरासत में ले लिया गया।

एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर फॉरेंसिक (FSL) की टीम को भी बुलाया गया, जिसने करीब 5 घंटे तक साक्ष्य जुटाए।

कॉल रिकॉर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच

डीसीपी रावत ने बताया कि पुलिस फिलहाल बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। नाना पटवारी और मानव गंगवानी से घंटों पूछताछ करने के बाद देर रात उन्हें छोड़ दिया गया है, लेकिन क्लीन चिट नहीं मिली है।

पुलिस अब दोनों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), मोबाइल चैट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को खंगाल रही है।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पकड़े गए ड्रग तस्करों और नाना पटवारी के बीच क्या बातचीत होती थी।

पुलिस का कहना है कि जैसे ही तकनीकी सबूत पुख्ता होंगे, आगे की गिरफ्तारी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर नाना को दोबारा समन भेजा जाएगा।

फिलहाल, इंदौर पुलिस के इस कदम से मध्य प्रदेश की राजनीति में कड़वाहट और बढ़ गई है।

देखना होगा कि आने वाले दिनों में सीडीआर (CDR) जांच के बाद पुलिस क्या नया खुलासा करती है।

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