Ethanol Cooking Fuel India: अगर आप हर महीने रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से परेशान रहते हैं, तो आपके लिए एक बेहद राहत भरी खबर है।
आने वाले दिनों में आपके घर का चूल्हा केवल एलपीजी से नहीं, बल्कि जैव ईंधन यानी एथेनॉल (Ethanol) से भी जल सकता है।
केंद्र सरकार अब एथेनॉल का इस्तेमाल सिर्फ गाड़ियों के पेट्रोल टैंक तक सीमित नहीं रखना चाहती।
इसे घरों में खाना पकाने के एक सुरक्षित, सस्ते और हरित विकल्प के रूप में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान 10 अगस्त को राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने देश में एथेनॉल की खपत और ब्लेंडिंग को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

उन्होंने बताया कि सरकार किस तरह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) पर देश की निर्भरता को कम करने के लिए बड़े कदम उठा रही है।
रसोई गैस की जगह एथेनॉल क्यों? समझिए 2 मुख्य कारण
सरकार का मानना है कि खाना बनाने के लिए एथेनॉल का उपयोग एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।
इसके पीछे दो सबसे बड़े और ठोस कारण हैं:
* LPG के भारी आयात में कटौती: भारत को अपनी जरूरत की अधिकांश रसोई गैस (LPG) दूसरे देशों से आयात (Import) करनी पड़ती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ते ही देश में सिलेंडर के दाम आसमान छूने लगते हैं।
अगर एथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के रूप में अपनाया जाता है, तो देश को विदेशों से कम एलपीजी खरीदनी पड़ेगी, जिससे देश का अरबों रुपया बचेगा और आम जनता पर भी महंगाई का बोझ कम होगा।

अतिरिक्त एथेनॉल का सही इस्तेमाल: पिछले कुछ सालों में भारत में एथेनॉल का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ा है। गन्ना, मक्का और अन्य अनाज से एथेनॉल तैयार किया जा रहा है।
देश में एथेनॉल की पैदावार इतनी अधिक हो चुकी है कि गाड़ियों में इस्तेमाल के बाद भी इसका स्टॉक बच जाता है।
इस अतिरिक्त एथेनॉल का सही और पूरा इस्तेमाल रसोई ईंधन के रूप में किया जा सकेगा।
एथेनॉल वाले चूल्हे पर काम शुरू
यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पर काम भी शुरू हो चुका है।
देश की दिग्गज सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)—के संयुक्त उपक्रम LERC (लुब्रिकेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर) ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

ये कंपनियां मिलकर ऐसे खास एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव (चूल्हे) और बर्नर विकसित कर रही हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित, प्रदूषण मुक्त और इस्तेमाल में आसान हों।
क्या E20 पेट्रोल बंद होकर पुराना पेट्रोल वापस आएगा?
अक्सर सोशल मीडिया और बाजार में अफवाहें उड़ती रहती हैं कि सरकार E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिला पेट्रोल) को बंद करके दोबारा पुराना E0 (बिना एथेनॉल वाला) या E10 पेट्रोल शुरू कर सकती है।
सरकार ने संसद में इन सभी अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि E0 या E10 पेट्रोल पर वापस लौटने का सरकार का कोई इरादा या प्रस्ताव नहीं है।
इसके पीछे सरकार ने दो मुख्य वैज्ञानिक और तकनीकी कारण बताए हैं:
* वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल स्वीकृति: E20 पेट्रोल पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। भारत के वाहन निर्माता उद्योग (Automobile Industry) ने अपने नए वाहनों के इंजन को E20 पेट्रोल के अनुकूल बना लिया है, इसलिए पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
* लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का खर्च:देशभर में 1 लाख से भी ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। यदि वहां E0, E10 और E20 तीनों तरह के पेट्रोल के लिए अलग-अलग स्टोरेज टैंक और सप्लाई चेन बनाई जाए, तो इसका रख-रखाव और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बहुत अधिक बढ़ जाएगा, जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।

कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल देश को ऊर्जा के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की ओर एक बड़ा कदम है।
एथेनॉल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने और आम नागरिकों की रसोई का बजट संभालने में भी मददगार साबित होगा।
आने वाले समय में एथेनॉल से चलने वाले चूल्हे रसोई गैस का एक बेहतरीन और सस्ता विकल्प बनने जा रहे हैं।
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